जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी-20 में 18 रन देकर दो विकेट लिए, प्लेयर ऑफ द मैच बने; कहा—मुश्किल दौर में भी भारत के लिए खेलने की प्रेरणा कभी कम नहीं हुई
हरारे। लगातार चोटों और लंबे अंतराल के बाद भारतीय टीम में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज मयंक यादव ने कहा है कि मुश्किल परिस्थितियां भी देश के लिए खेलने के उनके जुनून को कम नहीं कर सकीं। जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में शानदार गेंदबाजी करने के बाद मयंक ने अपने संघर्ष, वापसी और भारतीय टीम के युवा खिलाड़ियों के साथ तालमेल पर खुलकर बात की।
Mayank Yadav Comeback भारत के लिए बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने हरारे स्पोर्ट्स क्लब में चार ओवर में केवल 18 रन देकर दो विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। भारत ने जिम्बाब्वे को 20 ओवर में 125 रन पर रोकने के बाद लक्ष्य 13.2 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया और सात विकेट से जीत दर्ज की।
चोटों के कारण दो साल टीम से रहे दूर
मयंक यादव ने अक्टूबर 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। हालांकि इसके बाद बार-बार सामने आई फिटनेस समस्याओं ने उनके करियर की रफ्तार रोक दी। जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला भारत के लिए उनका चौथा टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच और लगभग दो साल बाद राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी थी।
मैच के बाद मयंक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से इतने लंबे समय तक बाहर रहना उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। उस समय उनकी उम्र करीब 22-23 वर्ष थी और इतने कम उम्र में लगातार चोटों तथा पुनर्वास की प्रक्रिया से गुजरना आसान नहीं था।
उन्होंने कहा कि कठिन दौर में भी भारत के लिए खेलने का सपना उनके भीतर जिंदा रहा। यही प्रेरणा उन्हें पुनर्वास के दौरान लगातार मेहनत करने और फिर से पहले जैसी गेंदबाजी करने के लिए प्रेरित करती रही।
मयंक के अनुसार, हर खिलाड़ी का बचपन से सपना होता है कि वह अपने देश का प्रतिनिधित्व करे। राष्ट्रीय टीम में वापसी करने और भारत के लिए फिर से अच्छा प्रदर्शन करने की इच्छा ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में हार नहीं मानने दी।
पहली ही गेंद पर मयंक ने दिया झटका
मयंक ने मुकाबले की पहली ही गेंद पर जिम्बाब्वे के सलामी बल्लेबाज ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। इसके बाद उन्होंने अपनी रफ्तार, उछाल और सटीक लाइन-लेंथ से मेजबान बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
हरारे की पिच से तेज गेंदबाजों को मिल रही मदद का उन्होंने पूरा फायदा उठाया। मयंक ने बताया कि उन्होंने जिम्बाब्वे की परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों को सहायता मिलने के बारे में सुना था। पहली बार हरारे में खेलते हुए उन्हें पिच से अच्छी गति और उछाल मिला, जिससे वह टीम की सफलता में योगदान दे सके।
उनके शुरुआती स्पैल ने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया और मेजबान टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। जिम्बाब्वे की ओर से वेस्ली मधेवेरे ने सर्वाधिक 39 रन बनाए, लेकिन टीम सात विकेट पर 125 रन ही बना सकी।
युवा तेज गेंदबाजों के बीच बेहतर तालमेल
पहले टी-20 में भारत अपेक्षाकृत युवा तेज गेंदबाजी आक्रमण के साथ मैदान पर उतरा। अशोक शर्मा ने इसी मुकाबले से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया, जबकि प्रिंस यादव भी अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के शुरुआती दौर में हैं।
मयंक ने बताया कि युवा तेज गेंदबाज आपस में केवल गति को लेकर चर्चा नहीं करते, बल्कि परिस्थितियों, सही लेंथ और बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखने के तरीकों पर भी लगातार बातचीत करते हैं।
पहला ओवर फेंकने के बाद मयंक ने अशोक शर्मा और प्रिंस यादव को बताया कि पिच से किस प्रकार की मदद मिल रही है और किन गेंदों का इस्तेमाल अधिक प्रभावी हो सकता है। उनका कहना था कि पहले छह ओवरों के बाद भारतीय गेंदबाजी इकाई अच्छी स्थिति में थी, इसलिए चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि जिम्बाब्वे को लगातार दबाव में कैसे रखा जाए।
श्रेयस अय्यर ने गेंदबाजों को दी आजादी
मयंक यादव ने कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मैच से पहले कप्तान के साथ उनकी ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी, लेकिन मैदान पर अय्यर ने गेंदबाजों की योजनाओं पर पूरा भरोसा दिखाया।
मयंक के अनुसार, कप्तान ने उन्हें अपनी योजना के मुताबिक गेंदबाजी करने की स्वतंत्रता दी। साथ ही जब अय्यर ने किसी बदलाव या रणनीति की सलाह दी तो उसे लागू करने में भी मयंक ने पूरा आत्मविश्वास महसूस किया।
यह पहला अवसर था जब मयंक यादव श्रेयस अय्यर की कप्तानी में खेले। उन्होंने कहा कि इससे पहले वह अय्यर को टेलीविजन पर या दूसरी टीमों की कप्तानी करते हुए देखते थे, लेकिन उनके नेतृत्व में मैदान पर उतरने का अनुभव काफी सहज और सकारात्मक रहा।
वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी से प्रभावित हुए मयंक
मयंक ने 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की भी जमकर प्रशंसा की। वैभव ने 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत की जीत आसान बनाई। उनकी पारी में चार चौके और चार छक्के शामिल थे। वह पुरुष टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज भी बने।
मयंक ने कहा कि इतनी कम उम्र में वैभव जिस आत्मविश्वास और बेखौफ अंदाज से बल्लेबाजी करते हैं, वह अविश्वसनीय है। अभ्यास के दौरान वैभव के खिलाफ गेंदबाजी करते हुए भी उन्होंने ऐसे शॉट लगाए, जिनकी सामान्य तौर पर कम अनुभवी खिलाड़ी से उम्मीद नहीं की जाती।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में आईपीएल मुकाबले को भी याद किया, जब वैभव ने राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए उनकी टीम के गेंदबाजों पर आक्रामक प्रहार किए थे। मयंक ने कहा कि इस बार वैभव को विपक्षी टीम के बजाय अपने साथ देखकर उन्हें काफी खुशी हुई।
वापसी ने भारतीय टीम को दिया सकारात्मक संकेत
Mayank Yadav Comeback केवल दो विकेट लेने तक सीमित नहीं रहा। लंबे समय तक फिटनेस समस्याओं से जूझने के बाद चार ओवर का पूरा स्पैल करना, शुरुआती सफलता दिलाना और प्लेयर ऑफ द मैच बनना भारतीय टीम के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
मयंक अपनी तेज रफ्तार के कारण आईपीएल 2024 में चर्चा में आए थे। हालांकि उनके भविष्य के लिए केवल गति ही नहीं, बल्कि फिटनेस, नियंत्रण और लगातार मैच खेलने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
तीन मैचों की सीरीज में भारत ने 1-0 की बढ़त बना ली है। दूसरा और तीसरा टी-20 क्रमशः 25 और 26 जुलाई को हरारे में खेला जाएगा।




