Mangarh Dham National Monument: राजस्थान के आदिवासी बहुल डूंगरपुर में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। इसी मुद्दे को लेकर भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने डूंगरपुर शहर में रैली निकालकर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपकर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराई।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक प्रदर्शन की शुरुआत श्री भोगीलाल पंड्या राजकीय महाविद्यालय के खेल मैदान से हुई। यहां बड़ी संख्या में BAP कार्यकर्ता और समर्थक जुटे और इसके बाद रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।

मानगढ़ धाम का मुद्दा हाल के दिनों में इसलिए भी राजनीतिक रूप से गर्माया हुआ है क्योंकि केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में संसद में स्पष्ट किया था कि इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है।
Mangarh Dham National Monument की मांग को लेकर सड़क पर उतरी BAP
Mangarh Dham National Monument की मांग लंबे समय से दक्षिण राजस्थान के आदिवासी संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा उठाई जाती रही है। अब भारत आदिवासी पार्टी ने इसे लेकर डूंगरपुर में अपना शक्ति प्रदर्शन किया।
स्थानीय इनपुट के अनुसार BAP कार्यकर्ताओं ने शहर के अलग-अलग मार्गों से रैली निकालते हुए जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। रैली में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने और आदिवासी शहीदों के इतिहास को उचित सम्मान दिलाने से जुड़े नारे लगाए गए।
कलेक्ट्रेट के बाहर कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।
पुतला फूंककर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान BAP कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध जताने के लिए प्रतीकात्मक पुतला भी फूंका।
पार्टी नेताओं का आरोप है कि मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व के बावजूद इसे अब तक राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं दिया गया। कार्यकर्ताओं ने इसे आदिवासी समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार से अपने रुख पर पुनर्विचार करने की मांग की।
हालांकि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनाए जाने को लेकर केंद्र सरकार का मौजूदा आधिकारिक पक्ष यह है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से यह जानकारी 23 मार्च 2026 को लोकसभा में दी गई थी।
जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
Mangarh Dham National Monument की मांग को औपचारिक रूप से सरकार तक पहुंचाने के लिए BAP प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के जरिए पार्टी ने मांग रखी कि मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक और आदिवासी विरासत से जुड़े महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए।
स्थानीय नेताओं ने कहा कि मानगढ़ केवल एक पर्यटन या धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि वह आदिवासी समाज के संघर्ष, शहादत और स्वाभिमान की पहचान है।
Mangarh Dham National Monument: मानगढ़ धाम का इतिहास क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
मानगढ़ धाम राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित है और भील समुदाय समेत राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी समाज के लिए विशेष ऐतिहासिक महत्व रखता है।
भारत सरकार के Press Information Bureau के अनुसार 17 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में मानगढ़ पहाड़ी पर बड़ी संख्या में आदिवासी एकत्र हुए थे। ब्रिटिश सैनिकों ने वहां गोलीबारी की, जिसमें करीब 1,500 आदिवासियों के शहीद होने का आधिकारिक विवरण मिलता है।
इस घटना को आदिवासी स्वतंत्रता संघर्ष के सबसे बड़े बलिदानों में से एक माना जाता है।
इसी कारण मानगढ़ को कई बार आदिवासी समाज के “जलियांवाला बाग” के रूप में भी संदर्भित किया जाता है।
गोविंद गुरु से जुड़ी है मानगढ़ की विरासत
मानगढ़ धाम का इतिहास समाज सुधारक और आदिवासी नेता गोविंद गुरु से गहराई से जुड़ा है।
गोविंद गुरु ने आदिवासी समाज में सामाजिक सुधार, शिक्षा, एकता और अधिकारों के लिए जागरूकता पैदा की। उन्होंने ब्रिटिश शासन के शोषण के खिलाफ भी आवाज उठाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम में आयोजित कार्यक्रम में गोविंद गुरु को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सामाजिक सुधारक, आध्यात्मिक नेता और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला महान व्यक्तित्व बताया था।
PM मोदी भी पहुंचे थे Mangarh Dham
Mangarh Dham National Monument की मांग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2022 की मानगढ़ यात्रा का भी बार-बार जिक्र होता है।
1 नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री ने ‘Mangarh Dham Ki Gaurav Gatha’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। उन्होंने मानगढ़ को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के लोगों की साझा विरासत बताया था।
प्रधानमंत्री ने उस समय चारों राज्यों को मानगढ़ के व्यापक विकास के लिए मिलकर रोडमैप तैयार करने की बात भी कही थी।
हालांकि उस कार्यक्रम में मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी।
मार्च 2026 में केंद्र ने संसद में क्या कहा?
इस पूरे विवाद को समझने के लिए केंद्र सरकार का मौजूदा आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण है।
23 मार्च 2026 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि वर्तमान में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इस जवाब के बाद राजस्थान में मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग फिर राजनीतिक मुद्दा बन गई।
Banswara-Dungarpur सांसद और BAP नेता राजकुमार रोत सहित कई आदिवासी नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई। कांग्रेस के नेताओं ने भी राष्ट्रीय दर्जे की मांग का समर्थन किया है।
पहले भी उठती रही है Mangarh Dham National Monument की मांग
Mangarh Dham National Monument का मुद्दा केवल मौजूदा प्रदर्शन तक सीमित नहीं है।
दक्षिण राजस्थान में लंबे समय से विभिन्न आदिवासी संगठनों और नेताओं द्वारा यह मांग उठाई जाती रही है। 2026 में भी आदिवासी संगठनों ने अलग-अलग कार्यक्रमों के दौरान मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है।
अगस्त 2026 की शुरुआत में BAP सांसद राजकुमार रोत और कांग्रेस नेता ताराचंद भगोरा ने भी केंद्र सरकार से मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग की थी।
यानी डूंगरपुर का मौजूदा प्रदर्शन इसी लंबे आंदोलन की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।
BAP जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने सरकार को घेरा
Mangarh Dham National Monument स्थानीय जानकारी के अनुसार डूंगरपुर में प्रदर्शन के बाद BAP जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम आदिवासी समाज की आस्था के साथ उसके संघर्ष और बलिदान से जुड़ा स्थल है। इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलना केवल विकास परियोजना का विषय नहीं, बल्कि आदिवासी शहीदों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का सवाल है।
उन्होंने सरकार से इस मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
अनुतोष रोत वर्तमान में डूंगरपुर में BAP के जिला नेतृत्व से जुड़े हैं और इससे पहले भी स्थानीय राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी की ओर से सक्रिय रहे हैं।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
Mangarh Dham National Monument को लेकर BAP नेताओं ने संकेत दिया कि यदि सरकार ने मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह किसी एक दल की राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि मानगढ़ में शहीद हुए आदिवासियों के सम्मान और उनकी ऐतिहासिक पहचान का मुद्दा है।
इसलिए पार्टी चाहती है कि केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दे।
हालांकि आगे BAP की ओर से किस तारीख को क्या आंदोलन किया जाएगा, इसका विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम फिलहाल सामने नहीं आया है।
राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा क्यों चाहती है BAP?
BAP और आदिवासी संगठनों का तर्क है कि मानगढ़ की घटना भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से:
- मानगढ़ की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
- आदिवासी शहीदों के योगदान के बारे में देशभर में जागरूकता बढ़ेगी।
- क्षेत्र में शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।
- पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल सकती है।
- आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
ये BAP और समर्थक संगठनों की मांग से जुड़े तर्क हैं; राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।
Mangarh Dham National Monument की बड़ी बातें
- BAP ने डूंगरपुर में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग पर प्रदर्शन किया।
- स्थानीय जानकारी के मुताबिक रैली SBP कॉलेज के खेल मैदान से शुरू हुई।
- कार्यकर्ता शहर से होते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे।
- कलेक्ट्रेट के बाहर धरना और नारेबाजी की गई।
- विरोध स्वरूप पुतला दहन भी किया गया।
- जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।
- BAP जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने मांग जल्द पूरी करने की अपील की।
- मानगढ़ में 17 नवंबर 1913 को ब्रिटिश सैनिकों की गोलीबारी में करीब 1,500 आदिवासियों के शहीद होने का आधिकारिक विवरण है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर 2022 में मानगढ़ धाम पहुंचे थे।
- केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में कहा कि मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।
डूंगरपुर के प्रदर्शन से फिर गरमाया मानगढ़ का मुद्दा
कुल मिलाकर Mangarh Dham National Monument की मांग एक बार फिर दक्षिण राजस्थान की राजनीति के केंद्र में आ गई है। डूंगरपुर में BAP के प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आदिवासी समाज मानगढ़ के राष्ट्रीय दर्जे की मांग को छोड़ने के मूड में नहीं है।
मानगढ़ का ऐतिहासिक महत्व केंद्र सरकार भी स्वीकार करती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इसे चार राज्यों की साझा विरासत बताया था और वहां आदिवासी शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी।
लेकिन मार्च 2026 के संसदीय जवाब के मुताबिक इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव अभी सरकार के विचाराधीन नहीं है।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि BAP और अन्य आदिवासी संगठनों के बढ़ते दबाव के बाद क्या केंद्र सरकार भविष्य में अपना रुख बदलेगी या मानगढ़ का विकास राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिए बिना ही आगे बढ़ाया जाएगा।
रिपोर्ट: सादिक़ अली, डूंगरपुर:
मानगढ़ धाम के इतिहास और केंद्र सरकार के आधिकारिक पक्ष की जानकारी Press Information Bureau और Ministry of Culture के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर देखी जा सकती है।
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