SIR 2026: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत की वयस्क आबादी का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा, यानी लगभग 10 करोड़ लोग, नागरिक होने के बावजूद मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। चिदंबरम ने इसे “non-voting citizens” की नई श्रेणी बनने जैसा बताया है।
चिदंबरम की यह प्रतिक्रिया पूर्व भारतीय राजनयिक नवदीप सूरी के उस अनुभव के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने पंजाब में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान अपने दस्तावेज और 2003 की मतदाता सूची के रिकॉर्ड में mismatch का मुद्दा उठाया था। हालांकि पंजाब के चुनाव अधिकारियों ने साफ किया है कि सूरी का नाम voter list से हटाया नहीं गया है।
SIR 2026 पर चिदंबरम ने क्या कहा?
SIR 2026 को लेकर पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के अनुभव का हवाला देते हुए Election Commission of India पर सवाल उठाए।
चिदंबरम ने दावा किया कि अब तक सामने आए SIR के परिणामों के आधार पर प्रक्रिया के अंत तक देश की adult population का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ऐसी स्थिति में पहुंच सकता है, जहां लोग भारतीय नागरिक तो होंगे लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में नहीं होगा।
उन्होंने इसे लगभग 10 करोड़ लोगों से जुड़ा संभावित खतरा बताया और ECI पर “non-voting citizens” की नई category तैयार करने का आरोप लगाया।
यहां यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि 10 करोड़ का आंकड़ा चिदंबरम का अनुमान है। चुनाव आयोग ने ऐसा कोई आधिकारिक अनुमान जारी नहीं किया है कि SIR के कारण 10 करोड़ eligible citizens मताधिकार खो देंगे।
नवदीप सूरी के मामले से क्यों उठा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी की 23 अगस्त को की गई सोशल मीडिया posts से हुई।
सूरी ने बताया कि उन्होंने पंजाब में SIR प्रक्रिया के दौरान अपने Booth Level Officer यानी BLO से संपर्क किया था और Voter ID तथा Aadhaar जमा किया। उनके मुताबिक शुरुआत में उन्हें बताया गया कि documents सही हैं।
बाद में एक volunteer से उन्हें जानकारी मिली कि उनके कुछ details 2003 की SIR electoral roll से match नहीं कर रहे हैं।
इसके बाद सूरी ने दोबारा BLO से संपर्क किया। उनके मुताबिक उन्हें एक notice लेने और भारतीय नागरिकता से संबंधित अतिरिक्त documents प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
SIR 2026: 2003 में लंदन में तैनात थे नवदीप सूरी
नवदीप सूरी ने अपनी स्थिति समझाते हुए कहा कि वर्ष 2003 में वह भारत में नहीं बल्कि London में diplomatic posting पर थे।
यही वजह थी कि उस समय की voter-list revision exercise से उनके वर्तमान विवरण को जोड़ने में समस्या सामने आई।
सूरी ने सवाल किया कि अगर तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके व्यक्ति को प्रक्रिया समझने और citizenship documents को लेकर ऐसी परेशानी हो सकती है, तो सामान्य नागरिक किन मुश्किलों का सामना कर सकता है।
सूरी भारत के UAE और Egypt में Ambassador तथा Australia में High Commissioner रह चुके हैं। इससे पहले वह London समेत कई भारतीय missions में काम कर चुके हैं।
SIR 2026 में 2002-03 की सूची क्यों अहम?
Election Commission के official voter portal पर SIR 2026 के लिए मतदाताओं को पिछले Special Intensive Revision की electoral roll में अपना नाम खोजने की सुविधा दी गई है।
ECI portal स्पष्ट करता है कि संबंधित राज्यों के लिए 2002 या 2003 की final electoral roll, जैसा लागू हो, Chief Electoral Officer के कार्यालय से मिली जानकारी के आधार पर उपलब्ध कराई गई है।
Portal पर मतदाता:
- SIR enumeration form भर सकते हैं
- पिछली SIR voter list में अपना नाम खोज सकते हैं
- Notice जारी होने पर documents submit कर सकते हैं
- Current electoral roll में अपना नाम check कर सकते हैं
इन services के लिए ECI का official voter portal उपलब्ध है।
SIR 2026: लेकिन नवदीप सूरी का वोट कटा नहीं- Punjab CEO
SIR 2026 विवाद में पंजाब के चुनाव अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
Punjab Chief Electoral Officer Anindita Mitra ने कहा कि नवदीप सूरी का नाम electoral roll से कभी हटाया नहीं गया।
उनके अनुसार सूरी का नाम 13 अगस्त को प्रकाशित draft electoral roll में मौजूद था। उन्हें केवल notice दिया गया और संबंधित documents उपलब्ध कराने को कहा गया था। आवश्यक documents मिलने के बाद उनका नाम electoral roll में बना रहा।
CEO ने यह भी कहा कि सूरी का वोट पहले भी Amritsar में registered था और अब भी वहीं registered है।
इसलिए सूरी के उदाहरण को सीधे “मताधिकार छिनने” के मामले के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। उनका मामला फिलहाल verification/documentation process से जुड़ा विवाद है।
SIR 2026: चिदंबरम ने इसी मामले को बनाया आधार
इसके बावजूद पी. चिदंबरम ने नवदीप सूरी के अनुभव को व्यापक SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए आधार बनाया।
उनका तर्क है कि जब एक पूर्व senior diplomat को पुराने electoral records से linkage स्थापित करने में परेशानी हो रही है, तो ऐसे करोड़ों लोगों की स्थिति मुश्किल हो सकती है जिनके पास पुराने records, birth documents या अन्य जरूरी papers आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
कांग्रेस इससे पहले भी SIR को लेकर voter exclusion की आशंका जताती रही है।
हालांकि चुनाव आयोग का कहना रहा है कि electoral rolls का revision eligible voters को शामिल करने और ineligible, duplicate या dead electors के नाम हटाने जैसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
क्या notice आने का मतलब नाम कटना है?
नहीं। SIR के दौरान notice जारी होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि व्यक्ति का नाम voter list से हटा दिया गया है।
ECI के official portal पर ही “Submit Document Against Notice Issued” का विकल्प मौजूद है। इसका अर्थ है कि notice phase में मतदाता को records या eligibility से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
नवदीप सूरी के मामले में भी Punjab CEO ने यही कहा कि उन्हें notice मिला था, लेकिन उनका नाम draft electoral roll में मौजूद था।
इसलिए SIR notice, voter-list deletion और citizenship determination—तीनों को एक ही चीज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR 2026 का आधिकारिक कार्यक्रम
Election Commission ने SIR 2026 को अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से चलाने का कार्यक्रम जारी किया है।
Official schedule में Punjab भी Andhra Pradesh, Arunachal Pradesh, Haryana, Chandigarh और Telangana के साथ SIR exercise के एक चरण में शामिल है। इस प्रक्रिया में house-to-house verification, draft electoral roll, claims-objections और notice/disposal phase जैसे अलग-अलग चरण शामिल हैं।
मतदाताओं के लिए ECI ने अपनी website पर पुराने SIR records खोजने और electoral roll से जुड़ी services भी उपलब्ध कराई हैं।
SIR 2026 की बड़ी बातें
- पी. चिदंबरम ने SIR 2026 को लेकर ECI पर गंभीर सवाल उठाए।
- उन्होंने दावा किया कि करीब 10 करोड़ भारतीय voting rights से वंचित हो सकते हैं।
- यह संख्या चिदंबरम का दावा है, ECI का आधिकारिक आंकड़ा नहीं।
- विवाद पूर्व diplomat नवदीप सूरी के Punjab SIR अनुभव के बाद बढ़ा।
- सूरी ने Voter ID और Aadhaar जमा करने की बात कही।
- उनके वर्तमान details और 2003 SIR records में mismatch सामने आया।
- सूरी 2003 में London में diplomatic posting पर थे।
- उन्हें additional citizenship-related documents लाने के लिए notice दिया गया।
- Punjab CEO के मुताबिक सूरी का नाम electoral roll से हटाया नहीं गया।
- उनका नाम 13 अगस्त की draft voter list में मौजूद था।
- ECI portal पर 2002/2003 की previous SIR electoral rolls search की जा सकती हैं।
- Notice मिलने वाले electors के लिए documents submit करने की official facility भी उपलब्ध है।
SIR 2026: अब ECI के जवाब पर नजर
कुल मिलाकर SIR 2026 को लेकर नवदीप सूरी का अनुभव अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। पी. चिदंबरम ने इसे आधार बनाकर लगभग 10 करोड़ लोगों के संभावित disenfranchisement का दावा किया है, लेकिन फिलहाल इस संख्या की पुष्टि चुनाव आयोग या किसी स्वतंत्र आधिकारिक assessment से नहीं हुई है।
दूसरी ओर Punjab CEO का कहना है कि सूरी स्वयं voter list से बाहर नहीं हुए हैं और उनका नाम draft roll में मौजूद है। ऐसे में इस विवाद का मुख्य सवाल अब यह है कि SIR verification process आम मतदाताओं के लिए कितनी सरल, पारदर्शी और accessible रहती है तथा notice मिलने के बाद genuine voters को अपने records ठीक कराने में कितना समय और अवसर मिलता है।
आधिकारिक SIR और voter-list information के लिए Election Commission of India – Electoral Roll और ECI Voters Service Portal देख सकते हैं।
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