सुप्रभात!
आप देख रहे हैं — ‘अहसास… दिल से’
आज इस सुबह में हम बात करेंगे जंतर-मंतर की उस सटीक परछाईं की, जो हमें सही समय की अहमियत सिखाती है। उस दौर में जब घड़ियां नहीं थीं, तब भी पत्थरों की छाया देखकर समय का हिसाब लगाया जाता था।
आज World Metrology Day के मौके पर हम सिर्फ समय नहीं, बल्कि अपने शब्दों का वज़न भी महसूस करेंगे। कबीर दास जी का दोहा — “ऐसी बानी बोलिये…” हमें याद दिलाता है कि मीठे शब्द रिश्तों को जोड़ते हैं और मन को सुकून देते हैं।
इस एपिसोड में एक छोटी सी कहानी भी है, जो बताएगी कि शब्द एक बार निकल जाएं, तो वापस नहीं आते।
तो आइए, आज कोशिश करते हैं कि हमारी जुबान से शहद टपके… ज़हर नहीं।
