ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बाद अमेरिका ने उसके जहाज IRIS डेना को निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठे थे, क्योंकि यह हमला भारतीय समुद्री क्षेत्र के करीब हुआ था और जहाज भारत से वापस लौट रहा था। लेकिन इस हफ्ते हालात और भी गंभीर होते नजर आ रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी कार्रवाई को लेकर अब भारत में भी चिंता बढ़ गई है। Oman के तट के करीब सिर्फ तीन दिनों के भीतर दो ऐसे जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनके चालक दल में भारतीय नागरिक शामिल थे। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका संबंधों और क्वाड सहयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिनास बंदरगाह के पास हुई इस घटना को लेकर भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि वह पूरे मामले पर करीबी नजर रख रहा है। दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और घटना की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
भारत में नाराज़गी बढ़ी
अमेरिकी नेवी की कार्रवाई के बाद भारत में नाराज़गी बढ़ गई है। अमेरिकी नौसेना ने बुधवार को 24 भारतीय नागरिकों को लेकर जा रहे ऑयल टैंकर सेटेबेलो पर हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। मृतकों में 23 वर्षीय नाविक आदित्य शर्मा भी शामिल हैं।
हमले के बाद भारत में अमेरिका की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने अमेरिका के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि मैरिवेक्स और सेटेबेलो के क्रू ने निर्देशों का पालन नहीं किया। उनका कहना है कि क्रू को कोई रेडियो चेतावनी नहीं मिली थी।
वहीं, जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने घटना पर दुख जताते हुए नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही है।
यह तीसरी ऐसी घटना है जब भारतीय क्रू वाले किसी कमर्शियल जहाज़ पर अमेरिका ने हमला किया है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों बताया कि शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, क्रू के सभी सदस्य अभी सुरक्षित हैं। इन लोगों ने उस जहाज़ की पहचान ‘जलवीर’ के तौर पर की है, जो गिनी-बिसाऊ के झंडे वाला टैंकर है।
अमेरिका के रवैये पर उठे सवाल
सेटेबेलो पर हुए हमले के बाद 21 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह घटना मैरीवेक्स जहाज पर हुए हमले के ठीक दो दिन बाद सामने आई। हालांकि, मैरीवेक्स पर हमले के दौरान सभी 24 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था।
तीन दिनों के भीतर भारतीय नागरिकों से जुड़े दो जहाजों पर कार्रवाई और नाविकों की मौत के बाद भारत में अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका ने घटना पर संवेदना जताने के बजाय अपनी कार्रवाई को सही ठहराने पर ज्यादा जोर दिया है।
इस पूरे मामले ने हिंद महासागर क्षेत्र में QUAD सहयोग, समुद्री सुरक्षा समझौतों और भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
भारत ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलब, हमलों पर जताई नाराजगी
कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत ने गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि इन घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों की जान गई है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए इन्हें सैन्य सफलता के तौर पर पेश किया है।
भारत ने बुधवार को अमेरिका के चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब कर ओमान के तट के पास कमर्शियल जहाज सेटेबेलो पर हुए हमले का औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
हालांकि, अब तक अमेरिका की ओर से इस मामले में खेद जताने या जिम्मेदारी स्वीकार करने जैसा कोई संकेत नहीं मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डाल सकती हैं, बल्कि ईरान के आसपास चल रही अमेरिकी रणनीति के लिए भी चुनौती बन सकती हैं।
अमेरिका का मत
अमेरिकी नौसेना ने मैरिवेक्स पर हुए हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की है। CENTCOM ने 8 जून को बताया कि USS Abraham Lincoln से उड़ान भरने वाले एक F/A-18 सुपर हॉर्नेट ने जहाज के इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग कंपार्टमेंट को निशाना बनाते हुए सटीक हमला किया था।
इसके बाद सेटेबेलो पर हुई कार्रवाई को लेकर भी अमेरिका ने अपनी बात रखी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि जहाज ने दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
