यूरोप में आसमानी आफत: फ्रांस में भीषण हीटवेव से 18 की मौत; जानिए क्या है वो ‘ओमेगा ब्लॉक’ जिसने यूरोप को बनाया भट्टी!

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Image: India Today

पेरिस/नई दिल्ली: ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दौर में इस समय आधा यूरोप भीषण और जानलेवा हीटवेव (लू) की चपेट में है। फ्रांस, स्पेन, इटली और ब्रिटेन समेत कई देशों में पारा 40°C से 42°C के पार पहुंच चुका है। इस जानलेवा गर्मी के कारण कई देशों में हेल्थ अलर्ट जारी किए गए हैं, रेल-सड़क यातायात ठप हो गया है और अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) के मुताबिक, अकेले फ्रांस में ही अब तक कम से कम 18 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक खड़ी कार के अंदर बंद रह गए दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। फ्रांस के प्रसिद्ध वाइन क्षेत्र बोरदो (Bordeaux) में तापमान 41.9°C रिकॉर्ड किया गया, जिसने पिछले साल अगस्त का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप बाकी दुनिया के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

इन यूरोपीय देशों में मची है हाहाकार

1. फ्रांस (France):

फ्रांस इस समय इस मौसम की सबसे भीषण मार झेल रहा है। देश के कुछ हिस्सों में तापमान 42°C को भी पार कर गया है। गर्मी के कारण नदियों और तालाबों में डूबने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं क्योंकि लोग राहत पाने के लिए असुरक्षित जलस्रोतों में नहाने जा रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो यह साल 2003 की उस ऐतिहासिक हीटवेव जैसा रूप ले सकती है, जिसमें अकेले फ्रांस में 15,000 लोगों की मौत हो गई थी।

2. यूनाइटेड किंगडम (UK):

आमतौर पर ठंडे रहने वाले ब्रिटेन में इस हफ्ते पारा 39°C तक पहुंचने का अनुमान है। अगर ऐसा हुआ तो यह साल 1957 और 1976 में बने जून के ऑल-टाइम रिकॉर्ड (35.6°C) को ध्वस्त कर देगा। ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) ने देश के इतिहास का दूसरा ‘हीट-हेल्थ अलर्ट’ जारी किया है। हैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ देश भीषण गर्मी के लिए रेड अलर्ट पर है, वहीं राजधानी लंदन में अचानक गरज-चमक के साथ तूफान और बारिश देखी जा रही है, जो मौसम के इस खतरनाक मिजाज को दर्शाती है।

3. स्पेन और इटली (Spain & Italy):

स्पेन अपनी इस साल की पहली आधिकारिक हीटवेव का सामना कर रहा है, जहाँ पारा 40°C को छू रहा है। सरकार ने जंगलों में भीषण आग (Wildfires) लगने की चेतावनी जारी की है। वहीं, इटली ने देश के 12 बड़े शहरों में अत्यधिक गर्मी को लेकर ‘रेड अलर्ट’ घोषित कर दिया है।

आखिर क्या है ‘ओमेगा ब्लॉक’ (Omega Block) और ‘हीट डोम’?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप को भट्टी की तरह दहकाने के पीछे एक बेहद खास और खतरनाक वायुमंडलीय पैटर्न (Atmospheric Pattern) जिम्मेदार है, जिसे ‘ओमेगा ब्लॉक’ (Omega Block) कहा जा रहा है। इसी के कारण यूरोप के ऊपर एक ‘हीट डोम’ (Heat Dome) यानी गर्म हवा का गुंबद बन गया है, जो उत्तर अफ्रीका से आ रही बेहद गर्म हवाओं को सोखकर उन्हें पश्चिमी और मध्य यूरोप के ऊपर कैद कर रहा है।

बहुत ही आसान शब्दों में समझें तो, ‘ओमेगा ब्लॉक’ एक कारण है और ‘हीट डोम’ उसका नतीजा है।

  • ओमेगा ब्लॉक क्या है? यह अंतरिक्ष में बनने वाली हवा की एक ऐसी स्थिर स्थिति है, जहां एक हाई-प्रेशर सिस्टम (उच्च दबाव का क्षेत्र) दो लो-प्रेशर सिस्टम (कम दबाव के क्षेत्र) के बीच सैंडविच की तरह फंस जाता है। ग्रीक भाषा के शब्द ओमेगा ($\Omega$) जैसे दिखने वाले इस चक्र के कारण वहां का मौसम कई दिनों तक एक ही जगह पर ‘लॉक’ यानी स्थिर हो जाता है।
  • हीट डोम क्या है? ओमेगा ब्लॉक के कारण जब हाई-प्रेशर सिस्टम एक ही जगह रुक जाता है, तो वह ऊपरी वायुमंडल में एक ढक्कन (Lid) की तरह काम करता है। यह नीचे की गर्म हवा को बाहर नहीं निकलने देता और धूप के कारण हवा लगातार गर्म और संकुचित होती जाती है। इसे ही ‘हीट डोम’ कहते हैं।

भारतीय संदर्भ: हमारे लिए सामान्य, यूरोप के लिए जानलेवा क्यों?

भारत के लिहाज से देखा जाए तो गर्मियों में 40°C या 42°C का तापमान हमारे लिए बहुत सामान्य बात है। उत्तर और मध्य भारत के लोग हर साल 45°C से 48°C तक की गर्मी झेलते हैं। लेकिन यूरोप के लिए यह स्थिति पूरी तरह अलग और जानलेवा है।

यूरोप के देशों में घर, दफ्तर, पब्लिक ट्रांसपोर्ट (जैसे ट्रेन और बसें) और बुनियादी ढांचा ठंड के अनुकूल बनाए गए हैं। वहां के अधिकांश घरों में एसी (AC) नहीं होते, बल्कि खिड़कियां और दीवारें इस तरह बनाई जाती हैं जो गर्मी को अंदर रोक सकें। ऐसे में जब अचानक वहां तापमान 40°C पार करता है, तो वहां की पूरी लाइफलाइन चरमरा जाती है और लोगों के शरीर के लिए इसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि जो तापमान भारत में रूटीन जैसा लगता है, वह इस समय यूरोप में मौत का कारण बन रहा है।

(इनपुट: रॉयटर्स / डब्लूएमओ रिपोर्ट)

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