“पुण्य” का प्याला या “पाप” का कचरा? | क्या हम अनजाने में गौ माता को नुकसान पहुँचा रहे हैं? 

Umang Mathur - Beauro Head (TNC)
1 Min Read

धार्मिक आयोजनों में प्यासे को पानी पिलाना हमारी सनातन संस्कृति की महान परंपरा है। लेकिन जब वही आयोजन खत्म होने के बाद सड़कों पर प्लास्टिक के ग्लास और कचरे का ढेर छोड़ जाते हैं, तो यह सिर्फ गंदगी नहीं फैलाता, बल्कि बेजुबान पशुओं, पर्यावरण और पूरे शहर के लिए गंभीर खतरा बन जाता है। इस विशेष प्रस्तुति में देखिए कैसे एक छोटी-सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है और क्यों सेवा के साथ स्वच्छता भी उतनी ही जरूरी है। आइए, मिलकर संकल्प लें—पुण्य भी कमाएंगे और अपने शहर को भी स्वच्छ रखेंगे।

Share This Article
Leave a Comment