Jan Bharat: फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण पर Supreme Court सख्त, पूछा- पैदल यात्री जाएं तो जाएं कहां?

Atul Ahsas
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Image: TNC

भारत में पैदल चलना अब सिर्फ एक सामान्य गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि कई शहरों में यह एक जोखिम भरा अनुभव बन चुका है। इसी गंभीर स्थिति पर Supreme Court ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि सुरक्षित फुटपाथ एक्सेस और सुरक्षित पैदल आवागमन हर नागरिक का मौलिक अधिकारहै।

सोचने वाली बात यह है कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी देश की सर्वोच्च अदालत को यह याद दिलाना पड़ रहा है कि नागरिकों को सुरक्षित तरीके से पैदल चलने का अधिकार है। यह केवल एक कानूनी टिप्पणी नहीं, बल्कि देश की urban infrastructure, city planning और public safety व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

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क्या यह सिर्फ एक अदालत की टिप्पणी है?

यह केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला संदेश है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या इस टिप्पणी की गूंज Municipal Corporation, Development Authority, PWD और राज्य सरकारों तक पहुंचेगी, या फिर यह भी अन्य महत्वपूर्ण निर्देशों की तरह फाइलों में सीमित होकर रह जाएगी?

Footpath या Encroachment Zone?

देश के अधिकांश शहरों में फुटपाथ अब पैदल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के encroachment का केंद्र बन चुके हैं।

कहीं फुटपाथ दुकानों का विस्तार बन गए हैं, कहीं अस्थायी बाजार, कहीं अवैध पार्किंग और कई जगह राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अतिक्रमण का स्थायी अड्डा।

ऐसी स्थिति में यदि कोई नागरिक फुटपाथ पर चलने की कोशिश करता है, तो उसे अक्सर सड़क पर उतरना पड़ता है, जिससे सड़क दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

Urban Development बनाम Pedestrian Safety

सरकारें बड़े-बड़े flyover projects, smart city initiatives और आधुनिक शहरी विकास योजनाओं की घोषणा करती हैं। करोड़ों रुपये की परियोजनाएं शुरू होती हैं, लेकिन pedestrian infrastructure अक्सर प्राथमिकता से बाहर रह जाता है।

विशेषज्ञ लगातार यह सवाल उठाते रहे हैं कि जब सड़कें और यातायात व्यवस्था विकसित की जा रही है, तो walkability, public mobility और footpath accessibility को समान महत्व क्यों नहीं दिया जाता?

Encroachment Removal पर कार्रवाई क्यों मुश्किल?

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगभग हर शहर में घोषित होती है, लेकिन जमीन पर स्थायी समाधान बहुत कम दिखाई देता है।

हर वर्ष नई योजनाएं बनती हैं, नए अभियान शुरू होते हैं, लेकिन illegal encroachment और unauthorized construction लगातार बढ़ते रहते हैं।

यही कारण है कि आम नागरिकों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कई स्थानों पर प्रशासन समस्या का समाधान करने के बजाय उसे लंबे समय तक बनाए रखता है।

Road Safety केवल Drivers की जिम्मेदारी नहीं

जब कोई बच्चा, बुजुर्ग या महिला सड़क दुर्घटना का शिकार होता है, तो पूरी जिम्मेदारी केवल वाहन चालक पर नहीं डाली जा सकती।

यदि फुटपाथ उपलब्ध नहीं है, यदि पैदल यात्रियों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो यह administrative negligence और public infrastructure failure का भी मामला बन जाता है।

कई सड़क दुर्घटनाएं वास्तव में खराब शहरी नियोजन और फुटपाथों की अनुपलब्धता का परिणाम होते हैं।


Car-Centric Development Model पर सवाल

भारत के कई शहरों का विकास मॉडल अभी भी काफी हद तक vehicle-centric development पर आधारित दिखाई देता है।

  • सड़कें वाहनों के लिए
  • फ्लाईओवर वाहनों के लिए
  • पार्किंग वाहनों के लिए
  • बजट का बड़ा हिस्सा वाहनों के लिए

लेकिन pedestrian rights, footpath safety और non-motorized transport infrastructure को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पाती।

यही असंतुलन आज शहरी सुरक्षा के सबसे बड़े मुद्दों में से एक बन चुका है।

Supreme Court ने दिखाया आईना

Supreme Court की टिप्पणी केवल कानूनी बहस का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, स्थानीय निकायों और नीति निर्माताओं के लिए चेतावनी भी है।

यदि फुटपाथों पर अतिक्रमण है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि पैदल यात्री असुरक्षित हैं, तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

किसी नागरिक की जान केवल एक सड़क दुर्घटना में नहीं जाती, कई बार उसके पीछे वर्षों की प्रशासनिक लापरवाही और असफल urban governance भी जिम्मेदार होती है।

निष्कर्ष

किसी भी विकसित शहर की पहचान केवल चौड़ी सड़कों, फ्लाईओवर और ऊंची इमारतों से नहीं होती। असली विकास तब माना जाता है जब एक आम नागरिक सुरक्षित तरीके से पैदल चल सके।

यदि किसी शहर में safe footpath, pedestrian safety, urban mobility और public accessibility सुनिश्चित नहीं है, तो वहां विकास के दावों पर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

Supreme Court की यह टिप्पणी देश के सभी शहरों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है— विकास का असली पैमाना केवल वाहनों की सुविधा नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और सम्मानजनक आवागमन भी है।

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