Rajasthan Horse Trading: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिन निकायों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर पार्षदों को डेढ़ करोड़ से ढाई करोड़ रुपये तक का कथित प्रलोभन देने और पुलिस-प्रशासन के जरिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
गहलोत के आरोपों पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने पलटवार करते हुए उन्हें “गलत और बेबुनियाद” बताया। बेढम ने 2020 के राजस्थान राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर अपनी पुरानी “बाड़ाबंदी” की राजनीति भाजपा पर थोपने का आरोप लगाया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी कहा कि राज्य में कानून के अनुसार काम हो रहा है और कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
Rajasthan Horse Trading को लेकर गहलोत ने क्या आरोप लगाए?

Rajasthan Horse Trading विवाद की शुरुआत अशोक गहलोत के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को भाजपा की ओर से बड़ी रकम के ऑफर दिए जा रहे हैं।
गहलोत ने गुरुवार, 17 सितंबर को कहा कि उन्हें अलग-अलग जगहों से डेढ़ करोड़, दो करोड़ और ढाई करोड़ रुपये तक के प्रलोभन दिए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। उनका आरोप है कि कुछ पार्षदों पर पुलिस और प्रशासन के जरिए भी दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि निकायों में भाजपा बोर्ड बनाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल हो रहा है।
गहलोत ने मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर भी आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ अधिकारी जिलों में भाजपा का बोर्ड बनवाने के लिए अधिकारियों पर दबाव डाल रहा है। इन आरोपों के समर्थन में फिलहाल कोई स्वतंत्र जांच निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है; भाजपा और राज्य सरकार ने इन्हें खारिज किया है।
Rajasthan Horse Trading, बेढम बोले- आरोप बेबुनियाद

गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने Rajasthan Horse Trading के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
बेढम ने कहा कि भाजपा के स्थानीय निकाय बोर्ड “जनादेश और समर्थन” के आधार पर बन रहे हैं, पैसे के दम पर नहीं। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी अपनी “बाड़ाबंदी और हॉर्स ट्रेडिंग की संस्कृति” भाजपा पर न थोपे।
बेढम ने गहलोत सरकार के दौरान हुए 2020 के राजनीतिक संकट की याद दिलाई और जयपुर के फेयरमोंट होटल तथा जैसलमेर के सूर्यगढ़ होटल में कांग्रेस विधायकों को एक साथ रखे जाने का जिक्र किया।
Rajasthan Horse Trading: 2020 में क्या हुआ था?
साल 2020 में राजस्थान कांग्रेस के भीतर अशोक गहलोत और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। उस दौरान गहलोत समर्थक विधायक पहले जयपुर के Fairmont Hotel में ठहरे थे और बाद में उन्हें जैसलमेर के Suryagarh Hotel ले जाया गया था। समकालीन रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने विधायकों को एकजुट रखने और संभावित विश्वास मत से पहले बाहरी राजनीतिक दबाव से बचाने के लिए यह कदम उठाया था।
हालांकि उस समय विधायकों को होटल में रखने का तथ्य दर्ज है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि कांग्रेस ने “horse trading” की थी। उस संकट के दौरान खुद गहलोत ने भाजपा पर उनकी सरकार गिराने और विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप लगाए थे, जिन्हें भाजपा ने तब भी नकारा था।
इसलिए वर्तमान बहस में 2020 का उदाहरण बेढम की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है, न कि मौजूदा कथित खरीद-फरोख्त के आरोपों का कोई स्वतंत्र प्रमाण।
Rajasthan Horse Trading: मदन राठौड़ ने क्या कहा?
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी अशोक गहलोत के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।
राठौड़ ने कहा कि राज्य में कानून के मुताबिक कार्रवाई हो रही है और किसी को कानून से ऊपर रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने गहलोत की परिसीमन संबंधी आपत्तियों को भी खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया को लेकर आपत्ति थी तो उसे निर्धारित व्यवस्था के तहत उठाया जाना चाहिए था।
राठौड़ ने यह भी कहा कि कुछ मतदाताओं ने भाजपा से असंतुष्ट होने की स्थिति में कांग्रेस के बजाय निर्दलीय उम्मीदवारों को चुना। यह भाजपा का राजनीतिक आकलन है।
गहलोत ने परिसीमन पर भी उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने निकाय चुनाव से पहले हुए परिसीमन को लेकर भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि जोधपुर और जयपुर जैसे शहरों में कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद वार्डों की संख्या में अपेक्षित बढ़त नहीं मिली। गहलोत ने अपने सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थक इलाकों को इस तरह जोड़ा गया जिससे चुनावी परिणाम प्रभावित हो सकें।
ये भी राजनीतिक आरोप हैं। किसी स्वतंत्र या न्यायिक निष्कर्ष ने फिलहाल यह स्थापित नहीं किया है कि परिसीमन भाजपा के पक्ष में चुनाव परिणाम बदलने के उद्देश्य से किया गया था।
निकाय नतीजों के बाद क्यों बढ़ी सियासत?
राजस्थान के 2026 शहरी निकाय चुनाव के परिणामों में कई जगह किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। BJP राज्य स्तर पर सबसे अधिक निकायों में प्रमुख दल बनकर सामने आई, जबकि कांग्रेस भी बड़ी संख्या में निकायों में प्रतिस्पर्धा में रही और कई स्थानों पर निर्दलीय निर्णायक स्थिति में पहुंचे।
इसी वजह से मेयर, सभापति और अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया से पहले निर्दलीय तथा छोटे समूहों के पार्षदों के समर्थन को लेकर दोनों प्रमुख दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं।
राजनीतिक दलों की ओर से एक-दूसरे पर दबाव, प्रलोभन और जोड़तोड़ के आरोप इसी पृष्ठभूमि में सामने आ रहे हैं।
Rajasthan Horse Trading विवाद की बड़ी बातें
अशोक गहलोत ने पार्षदों को ₹1.5 करोड़ से ₹2.5 करोड़ तक का कथित प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया।
उन्होंने पुलिस और प्रशासन के दुरुपयोग का भी दावा किया।
BJP और राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
जवाहर सिंह बेढम ने आरोपों को “गलत और बेबुनियाद” बताया।
बेढम ने 2020 में कांग्रेस विधायकों की होटल में बाड़ाबंदी का मुद्दा उठाया।
2020 में गहलोत समर्थक विधायक Fairmont Jaipur और बाद में Suryagarh Jaisalmer में रहे थे।
उस समय गहलोत ने भी भाजपा पर horse trading के आरोप लगाए थे, जिन्हें भाजपा ने नकारा था।
मदन राठौड़ का कहना है कि राज्य में कानून के अनुसार कार्रवाई हो रही है।
मौजूदा ₹2 करोड़ या अन्य रकम वाले आरोपों पर अभी कोई स्वतंत्र जांच निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है।
अब मेयर-चेयरमैन चुनाव पर नजर
कुल मिलाकर Rajasthan Horse Trading का मुद्दा स्थानीय निकायों में बोर्ड गठन से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया केंद्र बन गया है।
अशोक गहलोत पार्षदों को करोड़ों रुपये के कथित ऑफर, पुलिस दबाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर जवाहर सिंह बेढम और भाजपा नेतृत्व इन आरोपों को नकारते हुए कांग्रेस के 2020 के राजनीतिक संकट और होटल में विधायकों को रखने की घटना का हवाला दे रहे हैं।
इन परस्पर विरोधी दावों में कौन-सा आरोप तथ्यात्मक रूप से साबित होता है, यह किसी आधिकारिक जांच, शिकायत या दस्तावेजी साक्ष्य से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इन्हें संबंधित नेताओं और दलों के दावे के रूप में ही देखना उचित है।
राजस्थान निकाय चुनाव से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए Rajasthan State Election Commission देखा जा सकता है। राजस्थान की दूसरी खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।

