Abhijeet Dipke: Cockroach Janta Party यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपके ने दावा किया है कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ ऐसे लोगों को भी हिरासत में लिया गया, जिनका CJP से कोई संबंध नहीं था और बाद में उन्हें संगठन से जोड़ने की कोशिश की गई।
दीपके ने यह आरोप CJP से जुड़ी रत्ना सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लगाया। उनका दावा है कि इस कथित कार्रवाई का उद्देश्य CJP और उसके आंदोलन से जुड़े “foreign funding” के एंगल को स्थापित करना था। हालांकि इस विशेष दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दिल्ली पुलिस की ओर से भी इस आरोप पर कोई सार्वजनिक विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में CJP और दूसरे संगठनों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। 3 अक्टूबर को भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। Reuters के मुताबिक पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को detained किया, हालांकि उनकी पूरी संख्या और पहचान सार्वजनिक नहीं की थी।
Abhijeet Dipke ने पुलिस हिरासत को लेकर क्या आरोप लगाया?
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों का CJP से कोई औपचारिक या प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
उनका आरोप है कि पुलिस ने ऐसे लोगों को CJP से जोड़ने की कोशिश की और कथित foreign funding से संबंधित narrative तैयार करने का प्रयास किया।
यहां महत्वपूर्ण है कि CJP से विदेशी फंडिंग जुड़े होने का दावा पहले भी सार्वजनिक चर्चा में आया था। जुलाई में इस मुद्दे पर NIA जांच की मांग वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची थी, लेकिन अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी उस समय पूछे जाने पर कहा था कि उनके पास साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है।
दीपके खुद पहले foreign funding के आरोपों से इनकार कर चुके हैं और CJP को नागरिकों के सहयोग से चलने वाला pressure group बताते रहे हैं।
इसलिए किसी कथित foreign funding link को जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
Abhijeet Dipke: ‘हिरासत में लिए व्यक्ति के साथ मारपीट हुई’
दीपके ने एक और गंभीर दावा किया है।
उनके मुताबिक एक परिचित व्यक्ति ने उन्हें बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में से एक शख्स के साथ कथित तौर पर पुलिस ने मारपीट की। दीपके ने यह भी दावा किया कि हिरासत और उससे जुड़े घटनाक्रम के कारण उस व्यक्ति की नौकरी चली गई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में इन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा की गई सिद्ध ज्यादती के रूप में नहीं, बल्कि अभिजीत दीपके के आरोप के तौर पर ही लिखा जाना चाहिए।
Abhijeet Dipke: तीन महिला पत्रकारों ने भी लगाए आरोप
इस बीच दिल्ली पुलिस के खिलाफ एक अलग लेकिन गंभीर विवाद सामने आया है।
दिल्ली पुलिस ने 4 अक्टूबर को पुष्टि की कि 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ sexual harassment की शिकायतें दी हैं।
पुलिस ने कहा कि New Delhi District को शिकायतें मिलीं और उन्हें आगे की जांच के लिए Crime Branch, Kamla Market भेज दिया गया है।
इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी पुलिस अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है।
Abhijeet Dipke: ACP Vivek Bhagat के खिलाफ FIR की मांग
CJP नेताओं ने खास तौर पर ACP Vivek Bhagat के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
CJP प्रवक्ता सौरव दास का आरोप है कि एक independent woman journalist के साथ प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई।
CJP की ओर से यह भी मांग की गई है कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अधिकारी के खिलाफ FIR और suspension की कार्रवाई हो।
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने अभी केवल इतना सार्वजनिक रूप से कहा है कि तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें Crime Branch को स्थानांतरित की गई हैं।
4 अक्टूबर की सुबह प्रकाशित ताजा रिपोर्टों में ACP Vivek Bhagat के खिलाफ FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी।
Abhijeet Dipke: शिकायत Crime Branch को भेजने का क्या मतलब?
किसी शिकायत को Crime Branch को transfer किया जाना अपने-आप FIR दर्ज होना नहीं है।
Delhi Police के मुताबिक Crime Branch शिकायतों और आरोपों की जांच करेगी और आगे की कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी।
CJP नेताओं का सवाल यही है कि जब महिला पत्रकार ने किसी specific police officer के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं तो पहले FIR क्यों दर्ज नहीं की गई।
वहीं कानूनी रूप से आगे कौन-सी कार्रवाई बनती है, यह शिकायत की सामग्री, उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों और जांच में सामने आने वाले अन्य साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
Abhijeet Dipke: दिल्ली प्रदर्शन में कई लोग हुए थे डिटेन
CJP और दूसरे संगठनों ने चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ राजधानी में लगातार प्रदर्शन किए हैं।
3 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने Jantar Mantar की ओर बढ़ने का प्रयास किया था। Reuters के मुताबिक पुलिस ने कई लोगों को detained किया, जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता भी शामिल थे।
Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन के प्रदर्शन के दौरान करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसके अलावा पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज की हैं। ये FIR prohibitory orders के कथित उल्लंघन से जुड़ी हैं।
Abhijeet Dipke: CJP ने फिर आंदोलन का किया ऐलान
Abhijeet Dipke ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए 10 अक्टूबर को दिल्ली में एक और बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है।
उन्होंने कहा है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP और उसके समर्थक दोबारा दिल्ली में जुटेंगे। दीपके ने इसे peaceful protest बताया है।
CJP पिछले कुछ महीनों से voter-roll revision, चुनाव आयोग और विभिन्न छात्र मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करता रहा है।
Abhijeet Dipke: फिलहाल किन बातों की पुष्टि है?
पूरे विवाद में अलग-अलग आरोपों को तथ्य से अलग रखना जरूरी है।
दिल्ली में CJP से जुड़े और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाना पुष्ट है। तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ sexual harassment की शिकायतें दी हैं और दिल्ली पुलिस ने इन शिकायतों को Crime Branch को भेज दिया है।
वहीं अभिजीत दीपके का यह आरोप कि CJP से असंबंधित लोगों को जानबूझकर संगठन से जोड़ने और foreign funding का एंगल बनाने के लिए उठाया गया, अभी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है।
इसी तरह हिरासत में एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट और उसकी नौकरी जाने का दावा भी दीपके की ओर से किया गया आरोप है।
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