BRICS Summit 2026: नई दिल्ली पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप को लेकर बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने पश्चिमी देशों की उस धारणा को खारिज किया कि रूस यूरोप के लिए खतरा है। उनका कहना है कि मॉस्को के पास यूरोपीय देशों के साथ संघर्ष करने की कोई वजह नहीं है और रूस से खतरे की बात को पश्चिमी देश बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। पुतिन ने यह टिप्पणी 11 सितंबर को भारत यात्रा के पहले दिन पत्रकारों से बातचीत में की।
पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली में 18वां BRICS Summit आयोजित हो रहा है। भारत इस वर्ष BRICS की मेजबानी कर रहा है और सम्मेलन में रूस के अलावा चीन, ईरान समेत विस्तारित समूह के कई देशों के नेता शामिल हैं।
BRICS Summit 2026 से पहले पुतिन का यूरोप पर बड़ा बयान
BRICS Summit 2026 के लिए भारत पहुंचे पुतिन से जर्मनी की राजनीति और यूरोप में बदलते राजनीतिक माहौल को लेकर सवाल किया गया था।
इस दौरान पुतिन ने कहा कि यूरोपीय लोगों को लंबे समय से रूस के कथित खतरे से डराया जा रहा है। उन्होंने इस खतरे को वास्तविक मानने से इनकार करते हुए कहा कि रूस यूरोप के लिए खतरा नहीं है। Reuters के मुताबिक पुतिन ने पश्चिमी देशों पर अपने नागरिकों को रूस के नाम पर डराने का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि रूस और यूरोपीय देशों के बीच सीधे संघर्ष का कोई कारण नहीं है।
हालांकि पुतिन का यह रूस का आधिकारिक राजनीतिक पक्ष है। यूरोपीय देशों और NATO के कई सदस्य रूस को सुरक्षा चुनौती के रूप में देखते हैं, खासकर फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किए जाने के बाद।
जर्मनी में AfD की जीत पर क्या बोले पुतिन?
जर्मनी के Saxony-Anhalt राज्य में हाल में हुए चुनाव में दक्षिणपंथी Alternative for Germany (AfD) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
इस परिणाम को लेकर पुतिन से सवाल किया गया तो उन्होंने शुरुआत में कहा कि वह जर्मनी की आंतरिक राजनीति पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। इसके बाद उन्होंने यूरोप में चल रहे राजनीतिक बदलावों को पश्चिमी नेतृत्व की नीतियों से जोड़ दिया।
पुतिन के मुताबिक यूरोप में मौजूदा घटनाक्रम पश्चिमी देशों की राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ी “system errors” का परिणाम है।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी देशों के राजनीतिक नेतृत्व ने लंबे समय तक ऐसी नीतियां अपनाईं जिनका असर अब यूरोप के मतदाताओं के फैसलों में दिखाई दे रहा है।
BRICS Summit 2026: ‘पश्चिम को लगा था कि वह सबसे ऊपर है’
पुतिन ने पश्चिमी नेतृत्व की सोच पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना था कि Cold War समाप्त होने और Soviet Union के विघटन के बाद पश्चिमी देशों के नेताओं को लगने लगा कि वैश्विक व्यवस्था में उनकी स्थिति सर्वोच्च हो गई है।
पुतिन ने आरोप लगाया कि इसी सोच की वजह से पश्चिमी देशों ने रूस की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया।
Reuters के मुताबिक पुतिन ने NATO के पूर्व की ओर विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम ने रूस की आपत्तियों को नजरअंदाज किया। उन्होंने एक बार फिर Ukraine conflict के लिए पश्चिम की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
यह रूस का पक्ष है। पश्चिमी देश और यूक्रेन इस दलील को खारिज करते रहे हैं और रूस को युद्ध शुरू करने के लिए जिम्मेदार मानते हैं।
Ukraine को NATO में लाने की कोशिश पर लगाया आरोप
BRICS Summit 2026 के दौरान वैश्विक संघर्ष भी बड़े मुद्दों में शामिल हैं और पुतिन ने Ukraine-NATO संबंधों को लेकर अपनी पुरानी दलील फिर दोहराई।
उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद पश्चिम ने Ukraine को NATO में शामिल करने की दिशा में तेजी से काम किया और यही मौजूदा संघर्ष की प्रमुख वजहों में से एक बना।
पुतिन ने पश्चिमी “globalist elites” पर स्थिति बिगाड़ने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर Ukraine और उसके पश्चिमी सहयोगियों का कहना है कि किसी संप्रभु देश को अपने सुरक्षा और विदेश नीति संबंधी विकल्प चुनने का अधिकार है।
BRICS Summit 2026: पुतिन बोले- यूरोप के लोग स्थिति समझ रहे हैं
पुतिन ने जर्मनी के चुनाव नतीजों को यूरोप में बदल रहे राजनीतिक रुझान से भी जोड़ा।
उनका कहना था कि यूरोपीय देशों के लोग यह समझ रहे हैं कि महाद्वीप में क्या हो रहा है और इसी कारण चुनावों में स्थापित राजनीतिक दलों के खिलाफ असंतोष दिखाई दे रहा है। उन्होंने AfD के परिणाम को भी इसी व्यापक trend से जोड़ा।
Saxony-Anhalt में AfD पहले स्थान पर रही है। पार्टी migration पर कड़े नियंत्रण और रूस के साथ संबंध बेहतर करने की पक्षधर रही है। हालांकि सरकार बनाने के लिए उसे दूसरे दलों या विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।
BRICS Summit 2026 को लेकर भी पुतिन ने रखा रूस का पक्ष
BRICS Summit 2026 से पहले पुतिन ने BRICS Business Forum में भी अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि BRICS किसी एक देश या समूह के खिलाफ नहीं है बल्कि सदस्य देशों के अपने आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने का मंच है। AP के मुताबिक रूस और चीन BRICS के जरिए पश्चिमी प्रभुत्व पर निर्भरता कम करने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
पुतिन ने technology, infrastructure, payment systems और investment में BRICS देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन के बीच भी हुई बातचीत
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन ने अलग से द्विपक्षीय बातचीत भी की।
दोनों नेताओं ने defence, energy, trade, space, skill mobility और अन्य क्षेत्रों में India-Russia cooperation की समीक्षा की। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक दोनों पक्षों ने अपने strategic partnership को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
Ukraine conflict और West Asia के हालात भी दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल रहे। भारत लगातार विवादों के समाधान के लिए dialogue और diplomacy का समर्थन करता रहा है।
BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटे दुनिया के कई बड़े नेता
18वें BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेजबानी कर रहे हैं।
सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत विस्तारित BRICS के अन्य सदस्य देशों के नेता शामिल हैं। मुख्य एजेंडे में trade, investment, energy security, technology, supply chains और global institutions में reforms जैसे मुद्दे हैं।
BRICS अब 11 देशों का समूह है और दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

BRICS Summit 2026 में पुतिन के बयान की बड़ी बातें
- पुतिन ने कहा कि रूस से यूरोप को कोई खतरा नहीं है।
- उन्होंने पश्चिम पर रूस के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया।
- जर्मनी में AfD की बढ़त को पश्चिमी नीतियों की गलतियों से जोड़ा।
- पश्चिमी देशों की राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा नीतियों को निशाने पर लिया।
- NATO के पूर्व की ओर विस्तार पर रूस की पुरानी आपत्ति दोहराई।
- Ukraine conflict के लिए पश्चिमी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
- पुतिन BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए हैं।
- मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई।
- BRICS Summit में trade, investment और global conflicts प्रमुख मुद्दों में हैं।
रूस-यूरोप तनाव के बीच अहम बयान
कुल मिलाकर BRICS Summit 2026 के बीच व्लादिमीर पुतिन का यूरोप को लेकर यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पुतिन का कहना है कि रूस यूरोप के लिए खतरा नहीं है और महाद्वीप में मौजूदा राजनीतिक बदलाव पश्चिमी नेतृत्व की अपनी नीतियों का नतीजा हैं।
वहीं यूरोपीय देशों और रूस के बीच संबंध Ukraine war के बाद से गंभीर तनाव में हैं। ऐसे में पुतिन का यह बयान मॉस्को के उस narrative को दोहराता है जिसमें वह मौजूदा टकराव की जिम्मेदारी पश्चिम और NATO की नीतियों पर डालता है।
BRICS Summit और भारत से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए Prime Minister of India और रूस के राष्ट्रपति कार्यालय की जानकारी के लिए President of Russia देखी जा सकती है।
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