Chittorgarh Nikay Election 2026: चित्तौड़गढ़ नगर परिषद चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी वार-पलटवार तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के आरोपों के बाद चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के शासनकाल, विकास कार्यों और कथित भ्रष्टाचार को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आक्या ने दावा किया कि चित्तौड़गढ़ में बड़े विकास कार्य भाजपा सरकारों के कार्यकाल में हुए हैं, जबकि कांग्रेस के समय जनता को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।
रविवार को जाड़ावत ने नगर परिषद चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति बताते हुए आक्या के विकास विजन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूर्व भाजपा विधायक नरपत सिंह राजवी की तारीफ करते हुए कहा था कि राजवी के पास क्षेत्र के विकास को लेकर स्पष्ट सोच रही है। इसके बाद अब आक्या ने विकास से लेकर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों तक कई मुद्दों पर जाड़ावत को जवाब दिया है।
Chittorgarh Nikay Election 2026: ‘विकास भाजपा के दौर में हुआ’

विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा कि चित्तौड़गढ़ में जो भी बड़े विकास कार्य हुए हैं, उनमें भाजपा सरकारों और जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच वसुंधरा राजे सरकार हो या 2023 के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार, क्षेत्र में विकास के लिए लगातार काम किया गया है।
आक्या ने सांसद सीपी जोशी और भाजपा की स्थानीय टीम का जिक्र करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य मिलकर चित्तौड़गढ़ का विकास करना है।
उन्होंने जाड़ावत पर तंज कसते हुए कहा कि “हमारे और उनके विजन में जमीन-आसमान का अंतर है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस आगामी नगर परिषद चुनाव में विकास और स्थानीय समस्याओं को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। जाड़ावत ने भी इससे पहले आरोप लगाया था कि शहर की जनता मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं से परेशान है।
कांग्रेस शासन पर लगाए लूटखसोट के आरोप
आक्या ने अपने बयान में कांग्रेस के पिछले शासनकाल पर भी तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय चित्तौड़गढ़ में “गुंडागर्दी और लूटखसोट” का माहौल था और अब कानून-व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है।
उन्होंने कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया के साथ पूर्व में हुई मारपीट की घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ की जनता जानती है कि उनके साथ क्या हुआ था।
ये सभी आरोप विधायक आक्या की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों को कांग्रेस की प्रतिक्रिया या किसी जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
UIT और नगर परिषद को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
Chittorgarh Nikay Election 2026 की चुनावी बयानबाजी में स्थानीय निकायों का पुराना कामकाज भी मुद्दा बनता जा रहा है।
आक्या ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान लंबे समय तक UIT में अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया और वहां बिचौलियों के जरिए कथित तौर पर लूटखसोट हुई।
उन्होंने नगर परिषद के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में जनता के हितों से ज्यादा भ्रष्टाचार हावी रहा।
विधायक ने कहा कि आगामी चुनाव में जनता भाजपा और कांग्रेस दोनों के पिछले कामकाज का आकलन करेगी।
Chittorgarh Nikay Election 2026: जाड़ावत पर सीधा हमला- ‘पहले अपना कार्यकाल देखें’
पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत पर आक्या के हमले का अंदाज काफी तीखा रहा।
आक्या ने कहा कि जाड़ावत भाजपा पर आरोप लगाने से पहले अपने और अपनी पार्टी के कार्यकाल का हिसाब देखें।
उन्होंने सवाल उठाया कि जाड़ावत अपने कार्यकाल में चित्तौड़गढ़ के लिए कौन से बड़े विकास कार्य लेकर आए।
विधायक ने लक्ष्मीनाथ मंदिर की जमीन के पट्टों और टॉकीज के पास बंदरवाड़ क्षेत्र से गरीब परिवारों को हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पूर्व विधायक को इन मामलों पर जनता को जवाब देना चाहिए।
Chittorgarh Nikay Election 2026: ‘तीन बार जनता ने दिया जवाब’
आक्या ने चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता पहले भी अपना फैसला दे चुकी है।
चंद्रभान सिंह आक्या ने 2013 और 2018 में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को हराया था। 2023 में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर आक्या निर्दलीय मैदान में उतरे और एक बार फिर जाड़ावत को हराकर विधानसभा पहुंचे।
यही कारण है कि नगर परिषद चुनाव से पहले दोनों नेताओं के बीच जारी यह जुबानी जंग स्थानीय राजनीति में खास महत्व रखती है।
जाड़ावत की उम्र पर भी किया व्यक्तिगत कटाक्ष
आक्या ने अपने बयान में जाड़ावत की उम्र को लेकर भी व्यक्तिगत टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि जाड़ावत पर अब उम्र हावी होती दिखाई दे रही है और इसी कारण वे कभी कांग्रेस के नेताओं तो कभी भाजपा नेताओं पर टिप्पणी कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जाड़ावत अपनी पार्टी के नेताओं की आलोचना करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की प्रशंसा कर रहे हैं, इसलिए वह उनका “धन्यवाद” भी करना चाहते हैं।
यह टिप्पणी आक्या का राजनीतिक कटाक्ष है।
मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल का भी किया जिक्र
आक्या ने विकास कार्यों की चर्चा करते हुए चित्तौड़गढ़ में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज परिसर में निर्माणाधीन अस्पताल का काम जल्द पूरा होने की उम्मीद है और इसके बाद जिला अस्पताल को वहां शिफ्ट किया जाएगा।
आक्या का दावा है कि भाजपा सरकार के दौरान चिकित्सा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कई काम किए गए हैं।
उन्होंने इसे भाजपा के विकास मॉडल का उदाहरण बताया।
CP Joshi को बताया बड़ा भाई
Chittorgarh Nikay Election 2026 से पहले भाजपा के अंदरूनी समीकरण भी चर्चा में हैं।
आक्या ने चित्तौड़गढ़ सांसद और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में सभी लोग मिलकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने साफ किया कि उनके और सीपी जोशी के बीच किसी तरह का राजनीतिक विरोध नहीं है।
यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि 2023 विधानसभा चुनाव में आक्या का भाजपा से टिकट कटने के बाद स्थानीय स्तर पर संगठन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए थे। आक्या तब निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत गए थे।
नरपत सिंह राजवी पर बोले- ‘वे मेरे गार्जियन हैं’
नरपत सिंह राजवी को लेकर आक्या ने और भी स्पष्ट संदेश दिया।
उन्होंने राजवी को अपना गार्जियन, बड़ा भाई और वरिष्ठ नेता बताया और कहा कि स्थानीय निकाय तथा आगामी पंचायती राज चुनाव सभी लोग मिलकर लड़ेंगे।
एक दिन पहले ही आक्या और नरपत सिंह राजवी की मुलाकात की तस्वीर सामने आई थी। बैठक के बाद आक्या ने कहा था कि राजवी, सीपी जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष और संगठन के दूसरे नेताओं के साथ मिलकर निकाय और पंचायती राज चुनाव लड़ा जाएगा। उन्होंने प्रत्याशी चयन का अंतिम फैसला पार्टी संगठन द्वारा किए जाने की बात भी कही थी।
‘BJP परिवार है, छोटी-मोटी बात बैठकर सुलझा लेंगे’
आक्या ने भाजपा के अंदरूनी मतभेदों की चर्चाओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी।
उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई हमेशा के लिए किसी का विरोधी या दुश्मन नहीं होता।
नरपत सिंह राजवी के साथ पूर्व में रहे राजनीतिक मतभेदों पर उन्होंने कहा कि अगर कोई छोटी-मोटी बात रही भी है तो भाजपा एक परिवार है और “परिवार के सदस्य बैठकर हर बात को सुलझा लेंगे।”
राजवी और आक्या के बीच 2023 विधानसभा चुनाव के समय मुकाबला काफी तीखा रहा था। BJP ने उस चुनाव में आक्या का टिकट काटकर नरपत सिंह राजवी को उम्मीदवार बनाया था, जिसके बाद आक्या निर्दलीय लड़े और चुनाव जीत गए थे।
अब नगर निकाय चुनाव से पहले दोनों नेताओं का साथ दिखना स्थानीय BJP के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
9 सितंबर को चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में मतदान
Chittorgarh Nikay Election 2026 में चित्तौड़गढ़ नगर परिषद का मतदान पहले चरण में 9 सितंबर 2026 को होना है। राजस्थान में निकाय चुनाव दो चरणों—9 और 11 सितंबर—में कराए जाएंगे और मतगणना 14 सितंबर को होगी। चित्तौड़गढ़, बेगूं और रावतभाटा को पहले चरण की सूची में रखा गया है।
प्रदेशभर के 309 शहरी निकायों में चुनाव प्रक्रिया चल रही है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद आदर्श आचार संहिता भी लागू है।
ऐसे में आने वाले दिनों में टिकट वितरण के साथ चित्तौड़गढ़ में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
Chittorgarh Nikay Election 2026 की बड़ी बातें
- सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के आरोपों पर चंद्रभान सिंह आक्या ने पलटवार किया।
- आक्या ने दावा किया कि चित्तौड़गढ़ का बड़ा विकास भाजपा सरकारों के दौरान हुआ।
- कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार और लूटखसोट होने के आरोप लगाए।
- UIT और नगर परिषद के पुराने कामकाज को लेकर सवाल उठाए।
- मेडिकल कॉलेज परिसर के नए अस्पताल का जिक्र किया।
- CP Joshi को अपना बड़ा भाई बताया।
- नरपत सिंह राजवी को गार्जियन और वरिष्ठ नेता बताया।
- BJP को परिवार बताते हुए पुराने मतभेद मिलकर सुलझाने की बात कही।
- आक्या और राजवी निकाय चुनाव से पहले हाल में साथ दिखाई दिए हैं।
- चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में 9 सितंबर को मतदान होगा।
- मतगणना 14 सितंबर को होगी।
चुनाव से पहले चित्तौड़गढ़ में बढ़ी जुबानी जंग
कुल मिलाकर Chittorgarh Nikay Election 2026 से पहले मुकाबला अब केवल वार्ड और प्रत्याशी चयन तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के नेतृत्व में भाजपा और मौजूदा विधायक के विकास रिकॉर्ड पर सवाल उठा रही है, जबकि आक्या कांग्रेस के पुराने शासनकाल को भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोपों से घेर रहे हैं।
साथ ही CP Joshi, Narpat Singh Rajvi और Chandrabhan Singh Akya के बीच बढ़ती राजनीतिक नजदीकी BJP खेमे के लिए बड़ा संकेत है। 2023 के चुनाव में अलग-अलग रास्तों पर खड़े नजर आए नेता अब निकाय चुनाव से पहले साथ आने की बात कर रहे हैं।
9 सितंबर को मतदान से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि विकास और स्थानीय मुद्दों पर जारी यह सियासी लड़ाई मतदाताओं के फैसले को कितना प्रभावित करती है।
आधिकारिक निकाय चुनाव अपडेट के लिए Rajasthan State Election Commission देख सकते हैं। राजस्थान की अन्य खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।
चित्तौड़गढ़ से गोपाल चतुर्वेदी की रिपोर्ट




