Chittorgarh Nikay Election 2026: नगर निकाय चुनाव की आहट के साथ चित्तौड़गढ़ की राजनीति गरमा गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी चयन और चुनावी रणनीति को लेकर बैठकों में जुटे हैं। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने निजी रिसोर्ट में पत्रकार वार्ता कर भाजपा सरकार और स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।
जाड़ावत ने कहा कि चित्तौड़गढ़ की जनता “कुकर और भाजपा की खींचतान” के बीच फंसकर रह गई है। उनका आरोप है कि राजनीतिक टकराव की वजह से शहर के विकास की रफ्तार प्रभावित हुई है और पिछले करीब ढाई से तीन वर्षों में आम लोगों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया।
हालांकि ये सभी राजनीतिक आरोप जाड़ावत के हैं। स्थानीय विधायक और भाजपा का इस पत्रकार वार्ता में लगाए गए आरोपों पर पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
Chittorgarh Nikay Election 2026: विकास को मुद्दा बनाएगी कांग्रेस
जाड़ावत ने कहा कि Chittorgarh Nikay Election 2026 में कांग्रेस स्थानीय विकास को मुख्य मुद्दा बनाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा कार्यकाल में शहर के कई विकास कार्य या तो धीमी गति से चल रहे हैं या अपेक्षा के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पाए हैं। कांग्रेस निकाय चुनाव के दौरान भाजपा और मौजूदा स्थानीय नेतृत्व का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखेगी।
उनका कहना है कि सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस वार्ड स्तर तक अभियान चलाएगी।
इस बीच भाजपा ने भी चित्तौड़गढ़ नगर परिषद चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। हाल की एक संगठनात्मक बैठक में शहर के 60 वार्डों में संयोजकों की नियुक्ति और संभावित दावेदारों से आवेदन लेने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई है।
अपनी ही पार्टी की पुरानी गलती मानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने केवल भाजपा को निशाने पर नहीं लिया, बल्कि कांग्रेस के पिछले नगर परिषद कार्यकाल को लेकर अपनी पार्टी की एक गलती भी स्वीकार की।
उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में कांग्रेस की ओर से नेतृत्व चयन में बड़ी चूक हुई थी और पार्टी को उसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।
जाड़ावत के मुताबिक इस निर्णय का असर बाद में विधानसभा चुनाव तक दिखाई दिया और उन्हें भी राजनीतिक रूप से इसकी कीमत चुकानी पड़ी।
उन्होंने दावा किया कि इस बार पार्टी पुरानी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ रही है।
‘टिकट किसी नेता की पसंद से नहीं’
Chittorgarh Nikay Election 2026 में कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर भी जाड़ावत ने बड़ा संकेत दिया।
उन्होंने कहा कि इस बार टिकट किसी एक बड़े नेता की पसंद के आधार पर तय नहीं किए जाएंगे। प्रत्याशी चुनने में:
- संबंधित वार्ड के लोगों की राय
- स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पसंद
- उम्मीदवार की जमीनी पकड़
- क्षेत्र में सक्रियता
- जीतने की क्षमता
को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जाएगा।
जाड़ावत ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता निकाय चुनाव में एकजुट होकर मैदान में उतरेंगे।
चंद्रभान सिंह आक्या पर बिना नाम लिए निशाना
पूर्व विधायक ने चित्तौड़गढ़ के मौजूदा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या का नाम सीधे लिए बिना स्थानीय नेतृत्व पर भी हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक खींचतान ने चित्तौड़गढ़ को पीछे धकेला है और विकास के मुद्दों की जगह राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई ज्यादा दिखाई दी है।
2023 के विधानसभा चुनाव में चंद्रभान सिंह आक्या ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत दूसरे स्थान पर रहे थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी तीसरे स्थान पर रहे।
ऐसे में आगामी निकाय चुनाव में यह स्थानीय राजनीतिक समीकरण एक बार फिर अहम साबित हो सकता है।
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कांग्रेस शासन के विकास कार्य गिनाए
जाड़ावत ने दावा किया कि चित्तौड़गढ़ में बड़े विकास कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्व कांग्रेस सरकारों के दौरान हुआ।
उन्होंने चिकित्सा, शिक्षा, सड़क, बिजली और पेयजल योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चित्तौड़गढ़ के विकास में विशेष रुचि ली थी।
जाड़ावत ने दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान:
- करीब ₹100 करोड़ के अस्पताल से जुड़े कार्य
- करीब ₹250 करोड़ का मेडिकल कॉलेज
- सड़क और बिजली के विभिन्न प्रोजेक्ट
- पेयजल संबंधी बड़ी योजनाएं
चित्तौड़गढ़ को मिलीं।
उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में कांग्रेस इन उपलब्धियों को भी जनता के सामने रखेगी।
Chittorgarh Nikay Election 2026 में चंबल पानी भी बड़ा मुद्दा
Chittorgarh Nikay Election 2026 में चंबल पेयजल परियोजना भी चुनावी मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।
सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने पत्रकार वार्ता में दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समय चित्तौड़गढ़ के लिए करीब ₹650 करोड़ की पेयजल योजना को मंजूरी मिली थी।
उनका दावा है कि टेंडर और वर्क ऑर्डर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन वित्त विभाग से जुड़ी प्रक्रिया के कारण योजना जमीन पर अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी।
हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में परियोजना के अलग-अलग चरणों और लागत के अलग आंकड़े सामने आते हैं।
फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार चंबल परियोजना के फेज-2B में चित्तौड़गढ़ के 325 गांवों के लिए ₹646 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई थी और उस समय दस्तावेजी प्रक्रिया के बाद वर्क ऑर्डर जारी होने की बात कही गई थी।
वहीं अक्टूबर 2023 की एक रिपोर्ट में 648 गांवों वाली व्यापक चंबल परियोजना के पहले चरण की लागत करीब ₹1,000 करोड़ और L&T को कार्यादेश दिए जाने की जानकारी दी गई थी।
इसलिए निकाय चुनाव में इस परियोजना की मौजूदा वास्तविक स्थिति भी बड़ा राजनीतिक सवाल बन सकती है।

‘योजना आगे क्यों नहीं बढ़ रही?’
जाड़ावत ने सवाल किया कि कांग्रेस शासन में शुरू की गई योजनाओं को वर्तमान सरकार तेजी से आगे क्यों नहीं बढ़ा रही।
उनका कहना है कि जिस पेयजल परियोजना से शहर और आसपास के क्षेत्रों को लंबे समय तक पानी की समस्या से राहत मिल सकती है, उसकी प्रगति पर सरकार को स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव के दौरान चंबल पानी परियोजना को भी जनता के बीच ले जाएगी।
कानून व्यवस्था और बजरी माफिया पर भी हमला
पूर्व विधायक ने कानून व्यवस्था को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब पौने तीन वर्षों में चित्तौड़गढ़ में कानून व्यवस्था कमजोर हुई है और अवैध बजरी कारोबार से जुड़ी गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।
जाड़ावत ने बजरी माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिलने का संकेत देते हुए सवाल किया कि इसके पीछे कौन है, यह जनता से छिपा नहीं है।
यह एक राजनीतिक आरोप है और जाड़ावत ने अपने बयान में इसके समर्थन में किसी न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं किया। संबंधित पक्ष का जवाब मिलने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
अशोक गहलोत को बताया ‘वटवृक्ष’
पत्रकार वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जिक्र करते हुए जाड़ावत ने उन्हें कांग्रेस का “वटवृक्ष” और “बेताज बादशाह” बताया।
उन्होंने कहा कि उन्हें लंबे समय से अशोक गहलोत का मार्गदर्शन मिलता रहा है और भविष्य में भी मिलता रहेगा।
जाड़ावत पहले भी गहलोत सरकार की योजनाओं और विकास मॉडल का सार्वजनिक रूप से समर्थन करते रहे हैं।
कांग्रेस ने किया बोर्ड बनाने का दावा
Chittorgarh Nikay Election 2026 को लेकर जाड़ावत ने दावा किया कि कांग्रेस इस बार पूरी ताकत से नगर परिषद चुनाव लड़ेगी।
उनके मुताबिक संगठन वार्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम जनता से feedback लेकर उम्मीदवार चयन करेगा।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी का लक्ष्य केवल अधिक पार्षद जिताना नहीं, बल्कि चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनाना है।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के कई पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
Chittorgarh Nikay Election 2026 की बड़ी बातें
- निकाय चुनाव से पहले चित्तौड़गढ़ की राजनीति तेज हुई।
- पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने BJP पर हमला बोला।
- उन्होंने कहा कि जनता राजनीतिक खींचतान का नुकसान उठा रही है।
- कांग्रेस ने विकास को चुनावी मुद्दा बनाने की बात कही।
- जाड़ावत ने कांग्रेस के पिछले नगर परिषद कार्यकाल में नेतृत्व चयन की गलती स्वीकार की।
- टिकट वार्डवासियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय से देने का दावा किया।
- स्थानीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या पर बिना नाम लिए निशाना साधा।
- चंबल पानी परियोजना को लेकर सरकार से सवाल किए।
- कानून व्यवस्था और बजरी माफिया को लेकर भी आरोप लगाए।
- कांग्रेस ने इस बार नगर परिषद में अपना बोर्ड बनाने का दावा किया।
- दूसरी ओर BJP भी 60 वार्डों में चुनावी संगठन तैयार करने में जुट चुकी है।
निकाय चुनाव में स्थानीय विकास बनेगा बड़ा मुद्दा
कुल मिलाकर Chittorgarh Nikay Election 2026 में मुकाबला केवल कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि शहर के विकास और पिछले वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम के इर्द-गिर्द भी बनता नजर आ रहा है।
सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने अपनी पत्रकार वार्ता में विकास, चंबल पानी, कानून व्यवस्था, टिकट वितरण और स्थानीय राजनीतिक खींचतान को चुनावी मुद्दा बनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
वहीं भाजपा पहले ही वार्ड स्तर की तैयारियों में उतर चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रत्याशी चयन के साथ चित्तौड़गढ़ की स्थानीय राजनीति और तेज होने की संभावना है।
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं के लिए राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन की जानकारी के लिए चित्तौड़गढ़ जिला प्रशासन देखा जा सकता है। The News Canvas पर दूसरी स्थानीय खबरों के लिए Rajasthan News पढ़ें।
चित्तौड़गढ़ से गोपाल चतुर्वेदी की रिपोर्ट




