El Nino 2026 को लेकर अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन यानी NOAA ने बेहद महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया है। प्रशांत महासागर में पहले से मौजूद El Niño लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले महीनों में इसके बेहद शक्तिशाली रूप लेने की आशंका बढ़ गई है। NOAA के Climate Prediction Center के मुताबिक उत्तरी गोलार्ध की पतझड़ और सर्दियों 2026-27 के दौरान इसके ‘Very Strong El Niño’ बनने की संभावना 90 प्रतिशत से ज्यादा है।
सबसे चौंकाने वाला अनुमान अक्टूबर से दिसंबर 2026 की अवधि को लेकर है। NOAA ने कहा है कि इस दौरान 69 प्रतिशत संभावना है कि El Niño की तीव्रता 1950 से उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड में दर्ज सभी घटनाओं से अधिक हो सकती है। इसके लिए तीन महीने के Relative Oceanic Niño Index यानी RONI के +2.5°C या उससे ऊपर पहुंचने की स्थिति को आधार बनाया गया है।
हालांकि इसे अभी “1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली El Niño आ ही गया” कहना सही नहीं होगा। NOAA ने इसे एक संभाव्यता आधारित पूर्वानुमान बताया है। वास्तविक तीव्रता आने वाले महीनों के समुद्री तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
El Nino 2026 को लेकर NOAA ने क्या कहा?
NOAA की 13 अगस्त की ENSO Diagnostic Discussion के अनुसार जुलाई के दौरान El Niño और मजबूत हुआ। Niño-3.4 क्षेत्र का इंडेक्स जुलाई में +1.4°C रहा, जबकि पूर्वी प्रशांत के Niño-1+2 क्षेत्र में तापमान विसंगति +2.9°C दर्ज की गई। NOAA के मुताबिक महासागर और वायुमंडल दोनों के संकेत एक मजबूत होते El Niño की पुष्टि कर रहे हैं।
NOAA के आधिकारिक probabilistic forecast में सितंबर-नवंबर 2026 के दौरान ‘very strong’ श्रेणी की संभावना 93 प्रतिशत और अक्टूबर-दिसंबर अवधि में 95 प्रतिशत तक दिखाई गई है। इसके बावजूद एजेंसी ने साफ किया है कि El Niño जितना मजबूत हो, उसके मौसम पर प्रभाव उतने ही निश्चित हों, यह जरूरी नहीं है।
यानी El Nino 2026 की तीव्रता और भारत सहित अलग-अलग देशों पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव को एक ही चीज नहीं माना जा सकता।
भारत के मानसून पर कितना पड़ेगा El Nino 2026 का असर?
भारत के लिए स्थिति थोड़ी जटिल है। दक्षिण-पश्चिम मानसून का मुख्य सीजन जून से सितंबर तक रहता है, जबकि NOAA के मुताबिक El Nino 2026 के बेहद मजबूत चरण में पहुंचने की सबसे ज्यादा संभावना अक्टूबर-दिसंबर के दौरान है।
इस लिहाज से संभावित चरम तीव्रता तब आएगी जब भारत का मुख्य दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन समाप्त होने के करीब होगा या खत्म हो चुका होगा।
लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि El Niño का मौजूदा मानसून पर कोई प्रभाव ही नहीं है। IMD की 13 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल Moderate El Niño conditions मौजूद हैं और इनके दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाकी हिस्से में और मजबूत होने का अनुमान है।
इसलिए “El Niño मानसून खत्म होने के बाद ही भारत में आएगा” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है। El Niño पहले से मौजूद है; बात उसकी अधिकतम संभावित तीव्रता के समय की है।
IMD ने मानसून को लेकर पहले ही जताई है कम बारिश की आशंका
El Nino 2026 के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग ने जुलाई के आखिर में जारी अपने Long Range Forecast में अगस्त-सितंबर 2026 के दौरान देशभर की बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई थी।
IMD के मुताबिक अगस्त से सितंबर के दौरान पूरे देश की औसत बारिश Long Period Average यानी LPA के 94 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है। अगस्त 2026 के लिए भी देशभर में औसत बारिश सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान जारी किया गया था।
IMD ने यह भी कहा था कि Equatorial Pacific में Moderate El Niño पहले से सक्रिय है और Southwest Monsoon के शेष हिस्से के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है।
मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी India Meteorological Department की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
1 जून से अब तक कितनी हुई बारिश?
IMD के 13 अगस्त को जारी Extended Range Forecast में 1 जून से 12 अगस्त 2026 तक देशभर में 486.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इस अवधि की सामान्य बारिश 552.6 मिलीमीटर है। यानी देशभर की संचयी बारिश LPA से करीब 12 प्रतिशत कम रही।
क्षेत्रवार आंकड़ों में स्थिति अलग-अलग रही। Central India में इस अवधि की बारिश सामान्य के आसपास रही, जबकि East & Northeast India में 26 प्रतिशत, South Peninsula में 19 प्रतिशत और Northwest India में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
हालांकि किसी एक मानसून सीजन में बारिश की कमी को केवल El Nino 2026 के कारण मानना सही नहीं होगा। भारतीय मानसून पर Indian Ocean Dipole, Madden-Julian Oscillation, समुद्री सतह के तापमान, मानसून ट्रफ और बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों समेत कई मौसम प्रणालियों का प्रभाव पड़ता है। IMD की मौजूदा रिपोर्ट में Indian Ocean Dipole को फिलहाल neutral बताया गया है।
El Nino 2026 क्या है?
El Niño, El Niño-Southern Oscillation यानी ENSO नामक प्राकृतिक समुद्र-वायुमंडलीय चक्र का गर्म चरण है।
इस स्थिति में मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की समुद्री सतह सामान्य से अधिक गर्म हो जाती है। इसके साथ वायुमंडलीय परिसंचरण में भी बदलाव आता है, जिसका प्रभाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है।
El Niño का प्रभाव हर देश और हर घटना में समान नहीं होता। किसी स्थान पर बारिश घट सकती है तो दूसरे क्षेत्र में सामान्य से ज्यादा वर्षा या तापमान में असामान्य बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
NOAA का आधिकारिक ENSO outlook Climate Prediction Center पर उपलब्ध है।
क्या सच में 1950 के बाद का सबसे ताकतवर El Niño आएगा?
El Nino 2026 यहां खबर की सबसे महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।
NOAA ने यह नहीं कहा है कि El Nino 2026 निश्चित रूप से 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली El Niño बन चुका है। एजेंसी का कहना है कि अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान ऐसी ऐतिहासिक स्थिति बनने की 69 प्रतिशत संभावना है।
वहीं उत्तरी गोलार्ध की पतझड़ और सर्दियों के दौरान बेहद मजबूत El Niño बनने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक है।
इसलिए SEO या headline में “सबसे ताकतवर El Niño आ रहा है” की बजाय “सबसे ताकतवर बनने की आशंका” या “ऐतिहासिक El Niño की 69% संभावना” लिखना ज्यादा तथ्यात्मक होगा।
El Nino 2026: मानसून के आखिरी हिस्से में क्या रहेगा मौसम का रुख?
IMD के ताजा Extended Range Forecast के अनुसार 13 से 19 अगस्त के दौरान पूरे देश की बारिश करीब सामान्य रहने की संभावना है। 20 से 26 अगस्त के सप्ताह में देशभर की वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है।
वहीं पूरे अगस्त-सितंबर के लिए IMD का व्यापक पूर्वानुमान सामान्य से कम वर्षा की ओर इशारा करता है।
इस बीच El Nino 2026 लगातार मजबूत होने की दिशा में है। ऐसे में सितंबर के मानसून और उसके बाद सर्दियों के मौसम पर वैज्ञानिकों की नजर बनी रहेगी।
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El Nino 2026 की बड़ी बातें
- प्रशांत महासागर में El Niño पहले से सक्रिय है।
- NOAA के मुताबिक यह लगातार मजबूत हो रहा है।
- पतझड़ और सर्दियों 2026-27 में Very Strong El Niño की संभावना 90% से अधिक है।
- अक्टूबर-दिसंबर में ऐतिहासिक तीव्रता तक पहुंचने की संभावना 69% है।
- यह अभी पूर्वानुमान है, अंतिम रिकॉर्ड नहीं।
- IMD भी भारत के मानसून के बाकी हिस्से में El Niño के और मजबूत होने की संभावना जता चुका है।
- अगस्त-सितंबर में देशभर की बारिश सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान है।
- 1 जून से 12 अगस्त तक देश में बारिश LPA से 12% कम रही।
- El Niño अकेला भारतीय मानसून को नियंत्रित नहीं करता।
- सितंबर के बाद इसकी संभावित चरम तीव्रता पर वैज्ञानिकों की खास नजर रहेगी।




