India Bloc Meeting के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। बुधवार, 30 सितंबर को दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी से राहुल गांधी के संभावित PM चेहरे को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने इस सवाल पर कोई स्पष्ट रुख नहीं रखा।
हालांकि इसे राहुल गांधी की उम्मीदवारी के समर्थन या विरोध के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि INDIA गठबंधन ने अभी तक 2029 के लिए किसी आधिकारिक प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला नहीं किया है।
इससे पहले कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि राहुल गांधी 2029 के चुनाव में INDIA गठबंधन का चेहरा होंगे। इसके विपरीत CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने इस घोषणा को समय से पहले बताया था और कहा था कि गठबंधन में PM उम्मीदवार को लेकर कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है।
India Bloc Meeting में चुनाव आयोग रहा मुख्य मुद्दा
बुधवार को हुई India Bloc Meeting का मुख्य एजेंडा 2029 का नेतृत्व तय करना नहीं, बल्कि चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष की साझा रणनीति बनाना था।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी, CPI, CPI(M), NCP (SP), शिवसेना (UBT) समेत कई विपक्षी दलों के नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त विरोध कार्यक्रम की घोषणा की।
India Bloc Meeting: 2 से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के बाद बताया कि विपक्षी दल 2 से 8 अक्टूबर के बीच देश के जिलों में ‘Save Democracy March’ यानी ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ आयोजित करेंगे।
इसके बाद 6 अक्टूबर को लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। विपक्षी दल अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगने की भी योजना बना रहे हैं।
विपक्ष ने इसके अलावा अक्टूबर और नवंबर में कई बड़ी रैलियां आयोजित करने का फैसला किया है। इनमें 1 नवंबर को नई दिल्ली में बड़ी रैली भी प्रस्तावित है।
India Bloc Meeting: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर ममता का रुख
India Bloc Meeting के बाद ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।
ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन को लेकर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी की। ये ममता बनर्जी और विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप और मांगें हैं।
चुनाव आयोग का पक्ष इससे अलग है। आयोग ने 23 सितंबर को कहा था कि SIR समेत उसके सभी अंतिम निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों की आंतरिक टिप्पणियां तथा सुझाव संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
26 सितंबर की आयोग की बैठक के बाद जारी प्रेस नोट को भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी वाले पूरे आयोग की मंजूरी प्राप्त थी।
India Bloc Meeting: राहुल गांधी बोले- लोकतंत्र व्यक्ति से बड़ा
बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेता चुनावी संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी भी एक व्यक्ति से बड़ा है और विपक्ष उन लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग करेगा जिन्हें वह लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार मानता है। यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप है, जिसे चुनाव आयोग और BJP ने खारिज किया है।
BJP नेताओं ने विपक्ष पर चुनाव आयोग को बदनाम करने और चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है।
क्या राहुल गांधी 2029 में PM उम्मीदवार होंगे?
India Bloc Meeting के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है, लेकिन फिलहाल इसका आधिकारिक जवाब नहीं है।
6 सितंबर को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि राहुल गांधी 2029 में INDIA गठबंधन का नेतृत्व करेंगे और वही गठबंधन का चेहरा होंगे।
इसके दो दिन बाद CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने कहा कि INDIA गठबंधन ने अभी तक किसी नेता को 2029 का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर फैसला नहीं किया है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं की ओर से राहुल गांधी को PM face बताने को समय से पहले बताया।
इसलिए फिलहाल राहुल गांधी को कांग्रेस का प्रमुख राष्ट्रीय चेहरा कहा जा सकता है, लेकिन पूरे INDIA गठबंधन का आधिकारिक PM उम्मीदवार घोषित करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
India Bloc Meeting: ममता की चुप्पी से क्या संकेत?
ममता बनर्जी ने बुधवार की बैठक के बाद राहुल गांधी की संभावित 2029 उम्मीदवारी पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक रुख नहीं रखा। लेकिन उनकी चुप्पी से किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
ममता और राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों में चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर संपर्क में रहे हैं। 30 सितंबर की बैठक बुलाने से पहले भी ममता ने राहुल गांधी और CPI(M) महासचिव एमए बेबी से इस मुद्दे पर बातचीत की थी।
फिलहाल INDIA गठबंधन का तत्काल फोकस प्रधानमंत्री पद का चेहरा तय करने के बजाय SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर संयुक्त आंदोलन पर है।
आगे गठबंधन 2029 के नेतृत्व पर कोई साझा निर्णय करता है या अलग-अलग दल अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, यह भविष्य की राजनीतिक बातचीत से ही स्पष्ट होगा।
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