INDIA Bloc Protest: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष का विरोध मंगलवार को दिल्ली की सड़कों तक पहुंच गया। INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इसी बीच कांग्रेस नेता और लुधियाना सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं की जांच, मामला दर्ज करने और जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग की।
वड़िंग ने हाल में सामने आई उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर बार-बार लिखित आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। वड़िंग का तर्क है कि जब आयोग के भीतर ही फैसलों पर सवाल उठे हैं तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
INDIA Bloc Protest में चुनाव आयोग पर क्या बोले राजा वड़िंग?
INDIA Bloc Protest के दौरान अमरिंदर राजा वड़िंग ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर जो जानकारियां सामने आई हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उनका आरोप है कि अगर चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने आयोग के भीतर लिए जा रहे फैसलों पर कई बार आपत्ति दर्ज की, तो इस पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
वड़िंग पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग कर चुके हैं। सितंबर के अंत में पंजाब कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने यही मांग उठाई थी।
हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयोग के खिलाफ किसी आपराधिक गड़बड़ी का दोष अभी किसी अदालत ने तय नहीं किया है।
INDIA Bloc Protest: 14 बार आपत्ति’ का मामला क्या है?
इस विवाद के केंद्र में Indian Express की एक जांच है।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लगभग 10 महीने में कम से कम 14 मौकों पर विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।
इनमें प्रमुख रूप से:
- नए मतदाताओं को जोड़ने से संबंधित Form 6 में बदलाव
- Electoral roll database के access को केंद्रीकृत करने का मुद्दा
- मतदाता नाम हटाने से जुड़ी प्रक्रियाएं
- कुछ फैसलों का पूर्ण आयोग की जानकारी के बिना जारी होना
- IT और voter database की निगरानी
जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
यही रिपोर्ट विपक्ष के चुनाव आयोग पर नए हमलों की बड़ी वजह बनी है।
INDIA Bloc Protest: क्या चुनाव आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार किया?
नहीं। INDIA Bloc Protest में विपक्ष इन आपत्तियों को बड़े संस्थागत विवाद के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन चुनाव आयोग का पक्ष अलग है।
चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और सुझाव सामान्य decision-making process का हिस्सा हैं। आयोग का कहना है कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए।
आयोग ने यह जरूर स्वीकार किया कि संबंधित notes और communications मौजूद थे, लेकिन उन्हें अंतिम फैसलों पर असहमति का प्रमाण मानने से इनकार किया।
इसलिए “14 आपत्तियां” सामने आना और “चुनावी गड़बड़ी साबित होना” दो अलग बातें हैं।
INDIA Bloc Protest: राहुल गांधी भी चुनाव आयोग पर हमलावर
मंगलवार के INDIA Bloc Protest में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए।
विपक्षी सांसद संसद परिसर से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़े, लेकिन भारी पुलिस बंदोबस्त और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग दोहराई है।
INDIA गठबंधन का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में ऐसे बदलाव किए गए हैं जिनसे विपक्ष समर्थक मतदाताओं पर असर पड़ा। BJP और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
INDIA Bloc Protest: ‘चुनाव आयोग के खिलाफ केस दर्ज हो’
राजा वड़िंग की मांग केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक सीमित नहीं है।
वड़िंग का कहना है कि अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या जानबूझकर लिए गए गैरकानूनी फैसलों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
इससे पहले उन्होंने खुले तौर पर मांग की थी कि ज्ञानेश कुमार और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।
यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है। किसी भी गिरफ्तारी या आपराधिक जिम्मेदारी के लिए कानून के तहत जांच और न्यायिक प्रक्रिया जरूरी होगी।
INDIA Bloc Protest: सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद
चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित असहमति का मामला अब अदालत तक भी पहुंच चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में ऐसी याचिकाएं दाखिल की गई हैं जिनमें SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती दी गई है। एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले आयोग की collegial decision-making प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर CEC को निलंबित करने जैसा कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है।
इसलिए आगे की कानूनी कार्यवाही इस विवाद में अहम होगी।
मनिकम टैगोर ने भी लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर भी पिछले कुछ दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगातार हमलावर हैं।
टैगोर ने आरोप लगाया है कि ज्ञानेश कुमार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के “एजेंट” की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने Form 6 विवाद और SIR को लेकर भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं, जिन्हें चुनाव आयोग स्वीकार नहीं करता।
टैगोर ने चुनाव आयोग के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज करने की बात भी कही है।
भारी सुरक्षा के बीच निकला INDIA ब्लॉक का मार्च
मंगलवार को दिल्ली में आयोजित INDIA Bloc Protest के लिए संसद और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “Save Democracy” और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से जुड़े नारे लगाए।
विरोध प्रदर्शन बाद में धरने में बदल गया और कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
INDIA Bloc Protest की बड़ी बातें
- INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में मार्च निकाला।
- राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता प्रदर्शन में शामिल हुए।
- मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR पर कार्रवाई है।
- अमरिंदर राजा वड़िंग ने FIR और गिरफ्तारी की मांग की है।
- दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
- आपत्तियां Form 6, voter database और electoral roll process समेत कई मुद्दों से जुड़ी थीं।
- चुनाव आयोग ने कहा कि ये notes decision-making process का हिस्सा थे।
- आयोग का दावा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
- मामले से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी हैं।
- BJP और चुनाव आयोग विपक्ष के चुनावी manipulation के आरोपों को खारिज करते हैं।
अब आगे क्या?
कुल मिलाकर INDIA Bloc Protest ने चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद को और तेज कर दिया है। राजा वड़िंग और कांग्रेस इसे केवल राजनीतिक असहमति नहीं बल्कि जांच और जवाबदेही का मामला बता रहे हैं।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि उसके भीतर दर्ज विभिन्न सुझावों और notes को संस्थागत गड़बड़ी के प्रमाण के रूप में पेश करना सही नहीं है और अंतिम फैसले सामूहिक रूप से लिए गए।
अब इस पूरे विवाद में सबसे अहम नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले रिकॉर्ड पर रहेगी। तभी यह ज्यादा स्पष्ट हो सकेगा कि आंतरिक आपत्तियों का वास्तविक कानूनी और प्रशासनिक महत्व क्या था।
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