Jaipur Cyber Fraud का हैरान करने वाला मामला राजस्थान की राजधानी से सामने आया है। जयपुर के सांगानेर इलाके में एक युवती का मोबाइल चोरी होने के बाद उसने तुरंत अपनी सिम बंद करवा दी। अगले दिन उसी नंबर की डुप्लीकेट सिम भी जारी करवा ली, लेकिन इसके बावजूद कुछ दिन बाद बैंक खाते से UPI के जरिए 1.24 लाख रुपए निकल गए। पीड़िता की शिकायत पर मालपुरा गेट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राधा बल्लभ मार्ग निवासी दिव्या छीपा की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, पूरा घटनाक्रम मोबाइल चोरी होने के बाद शुरू हुआ। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सिम बंद होने और नया सिम जारी होने के बावजूद बैंक खाते तक पहुंच कैसे बनाई गई और रकम आखिर किस खाते में ट्रांसफर हुई।
Jaipur Cyber Fraud: सब्जी खरीदते समय चोरी हुआ मोबाइल
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 14 सितंबर को वह सेक्टर-35 इलाके में सब्जी खरीदने गई थीं। बाजार में भीड़ थी और इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से मोबाइल निकाल लिया।
मोबाइल गायब होने का पता चलते ही उन्होंने उसकी तलाश की, लेकिन फोन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बिना देरी किए संबंधित टेलीकॉम कंपनी की ग्राहक सेवा से संपर्क किया और चोरी हुए मोबाइल में लगी सिम को बंद करवा दिया।
आमतौर पर मोबाइल चोरी होने के बाद सबसे पहले सिम बंद कराना जरूरी कदम माना जाता है, ताकि मोबाइल नंबर का दुरुपयोग रोका जा सके। दिव्या ने भी यही किया, लेकिन इसके बावजूद बाद में बैंक खाते से बड़ी रकम निकलने की जानकारी सामने आई।
Jaipur Cyber Fraud: अगले दिन ली डुप्लीकेट सिम
Jaipur Cyber Fraud मामले में सबसे ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर है कि पीड़िता ने सिर्फ पुरानी सिम बंद ही नहीं करवाई थी, बल्कि अगले दिन यानी 15 सितंबर को उसी मोबाइल नंबर की नई डुप्लीकेट सिम भी हासिल कर ली थी।
इसके बाद उन्हें लगा कि चोरी हुए मोबाइल और उसमें लगी पुरानी सिम के जरिए अब किसी तरह का बैंकिंग लेन-देन नहीं किया जा सकेगा।
लेकिन 17 सितंबर को बैंक खाते से UPI के जरिए 1.24 लाख रुपए निकलने की जानकारी मिली। खाते से इतनी बड़ी रकम कटने का पता चलते ही पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
Jaipur Cyber Fraud में कैसे निकले 1.24 लाख?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुरानी सिम बंद होने के बाद भी खाते से रकम कैसे निकली। फिलहाल इसका तकनीकी कारण स्पष्ट नहीं हुआ है।
पुलिस यह जांच कर रही है कि चोरी हुए मोबाइल में मौजूद किसी बैंकिंग या UPI ऐप तक आरोपियों की पहुंच बनी थी या रकम निकालने के लिए किसी अन्य तकनीकी तरीके का इस्तेमाल किया गया। जांच पूरी होने से पहले किसी विशेष तरीके को ठगी की वजह मानना उचित नहीं होगा।
पुलिस बैंक खाते के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, UPI ट्रांजैक्शन से संबंधित जानकारियों और रकम प्राप्त करने वाले खाते की डिटेल खंगाल रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि 1.24 लाख रुपए कहां और किस माध्यम से भेजे गए।
Jaipur Cyber Fraud: सिर्फ सिम ब्लॉक करना क्यों पर्याप्त नहीं?
मोबाइल चोरी होने के बाद सिम ब्लॉक कराना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके साथ बैंक और डिजिटल पेमेंट खातों की सुरक्षा के लिए भी तुरंत कदम उठाने चाहिए।
अगर चोरी हुए फोन में UPI, मोबाइल बैंकिंग, ईमेल या अन्य वित्तीय ऐप मौजूद हैं तो संबंधित बैंक को भी फोन चोरी होने की जानकारी देना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर UPI और मोबाइल बैंकिंग सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराने का अनुरोध किया जा सकता है।
इसके साथ ही ईमेल, बैंकिंग ऐप और महत्वपूर्ण ऑनलाइन खातों के पासवर्ड बदलना भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
मोबाइल चोरी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
Jaipur Cyber Fraud जैसा मामला मोबाइल में मौजूद वित्तीय जानकारी की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताता है। फोन चोरी होने के बाद केवल नया सिम लेने तक सीमित रहने के बजाय कुछ अन्य कदम भी तुरंत उठाए जा सकते हैं।
सबसे पहले टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क कर सिम ब्लॉक करवाएं। इसके बाद बैंक और संबंधित डिजिटल पेमेंट सेवा को जानकारी दें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल शिकायत की जा सकती है। भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal पर भी साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है।
चोरी या गुम हुए फोन को CEIR के जरिए IMEI स्तर पर ब्लॉक करने की सुविधा भी उपलब्ध है। दूरसंचार विभाग के मुताबिक CEIR पर गुम या चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक करने के लिए पुलिस रिपोर्ट, दोबारा जारी हुई सिम और पहचान संबंधी दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है।
Jaipur Cyber Fraud: ट्रांजैक्शन की कड़ी तलाश रही पुलिस
मालपुरा गेट थाना पुलिस अब Jaipur Cyber Fraud मामले में पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी खंगाल रही है। खास तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि पीड़िता के खाते से निकले 1.24 लाख रुपए किस बैंक खाते या UPI ID में पहुंचे।
इसके साथ ही पुलिस चोरी हुए मोबाइल और बैंक खाते से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों ने सिम बंद होने के बावजूद खाते तक किस तरह पहुंच बनाई।
फिलहाल मामले में किसी आरोपी की पहचान या ठगी के सटीक तरीके को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच जारी है।
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