क्या एक गृहिणी सिर्फ घर संभालती है या फिर वह पूरे राष्ट्र की नींव तैयार करती है? सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक टिप्पणी में कहा है कि गृहिणियों को सिर्फ “हाउसवाइफ” नहीं बल्कि “नेशन बिल्डर” के रूप में देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने घरेलू कामकाज के आर्थिक मूल्य को स्वीकार करते हुए मुआवजा मामलों में 30 हजार रुपये प्रतिमाह का न्यूनतम मूल्य मानने की बात कही। जानिए इस फैसले का पूरा मतलब और क्यों यह करोड़ों महिलाओं के सम्मान से जुड़ा बड़ा संदेश माना जा रहा है।