मानसून ने पकड़ी रफ्तार, मुंबई पर छाए घने बादल; देश में अब भी 46% बारिश की कमी बरकरार

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करीब दो सप्ताह की सुस्ती के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ी है। महाराष्ट्र, मुंबई समेत कई राज्यों में अच्छी बारिश के संकेत मिले हैं, लेकिन जून में अब तक देशभर में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज होने से कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

मुंबई समेत पश्चिमी भारत में मानसून हुआ सक्रिय

करीब दो सप्ताह तक धीमी गति से आगे बढ़ने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर मजबूत वापसी के संकेत दिए हैं। भारत के मौसम उपग्रह INSAT-3DS से प्राप्त ताजा तस्वीरों में महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर घने वर्षा वाले बादलों का विशाल समूह दिखाई दिया है, जिससे आने वाले दिनों में व्यापक बारिश की संभावना बढ़ गई है।

उपग्रह चित्रों में अरब सागर से लेकर महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और मध्य भारत तक गहरे बादलों का फैलाव देखा गया है। यह क्षेत्र में सक्रिय मानसूनी परिसंचरण का संकेत है, जिसके प्रभाव से महाराष्ट्र और विशेष रूप से मुंबई में मध्यम से भारी बारिश के कई दौर देखने को मिल सकते हैं।

अरब सागर से बढ़ी नमी, बारिश की उम्मीद मजबूत

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अरब सागर से पश्चिमी भारत की ओर नमी का प्रवाह लगातार मजबूत हो रहा है। यही कारण है कि पश्चिमी तट पर मानसूनी गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। लंबे इंतजार के बाद मुंबई में भी लगातार बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

जून में अब तक सामान्य से काफी कम बारिश

हालांकि मानसून की वापसी राहत लेकर आई है, लेकिन जून महीने के दौरान हुई बारिश की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 4 जून से 23 जून के बीच देशभर में केवल 56.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य रूप से इस अवधि में 104.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जाती है।

इस प्रकार देश में लगभग 46 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। वहीं IMD के 1 जून से 22 जून तक के आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा घाटा 43 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

महाराष्ट्र और गुजरात सबसे अधिक प्रभावित

बारिश की कमी का असर कई प्रमुख कृषि राज्यों में साफ दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र में इस अवधि के दौरान सामान्य से 84 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि गुजरात में वर्षा घाटा 85 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

इसके अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड और गोवा में भी सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। खरीफ सीजन की बुवाई पर निर्भर किसान अब मानसून की अगली चाल पर नजर बनाए हुए हैं।

मध्य भारत में किसानों की चिंता बरकरार

मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी जून की शुरुआत से अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेती-किसानी से जुड़े क्षेत्रों में चिंता बढ़ी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई कार्यों को गति मिल सकती है और कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकती है।

आने वाले दिनों में और आगे बढ़ सकता है मानसून

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अरब सागर के ऊपर बना ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण, बढ़ता नमी प्रवाह और ट्रॉपिकल ईस्टरली जेट की सक्रियता मानसून को और मजबूत बना सकती है। इसके चलते मध्य, पूर्वी और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों के दौरान मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या जून का घाटा भर पाएगा मानसून?

मानसून की वापसी ने राहत की उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महीने के बचे हुए दिनों में होने वाली बारिश क्या देश में बने भारी वर्षा घाटे को कम कर पाएगी या नहीं। आने वाले कुछ दिन मानसून की दिशा और देश की कृषि अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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