पश्चिम कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। यहां एक निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में अब तक नौ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। राहत और बचाव दलों ने मलबे से करीब 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि अब भी कई लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, जिसके चलते बचाव अभियान लगातार जारी है।
काम के दौरान अचानक ढह गया पूरा ढांचा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस समय यह हादसा हुआ उस दौरान गोदाम के निर्माण का कार्य चल रहा था और कई मजदूर वहां मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी अचानक इमारत का ढांचा असंतुलित होकर नीचे आ गिरा। किसी को संभलने या सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका तक नहीं मिला।
कुछ ही सेकंड में पूरी संरचना मलबे के ढेर में बदल गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और प्रशासन को घटना की सूचना दी। इसके बाद पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत टीमें मौके पर पहुंचीं।
मलबे के नीचे जिंदगी और मौत की जंग
हादसे के बाद शुरू हुए बचाव अभियान में कई मार्मिक दृश्य भी सामने आए। राहतकर्मियों के अनुसार मलबे में फंसे कुछ लोग घंटों तक मदद का इंतजार करते रहे। इसी दौरान एक व्यक्ति की दर्दभरी आवाज ने सभी को भावुक कर दिया। बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए अपना पैर काटने तक को तैयार था ताकि उसे बाहर निकाला जा सके।
हालांकि राहत दलों ने धैर्य और तकनीकी सहायता के जरिए उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाद में उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। इस घटना ने बचाव अभियान में जुटे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को भी भावुक कर दिया।
घायलों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था
हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक विशेष टीम गठित की है। इस टीम में न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और ट्रॉमा विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि घायलों को तुरंत और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। अस्पतालों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक, सहायता राशि का ऐलान
हादसे की खबर सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा हादसे में घायल हुए लोगों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आवश्यक कदम उठा रही हैं।
लापरवाही के आरोप में तीन गिरफ्तार
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही की आशंका के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में बिल्डिंग सुपरवाइजर सैयद मोहम्मद गुलजार के अलावा दो लेबर सप्लायर मोहम्मद अताउल और सुभाष चौधरी शामिल हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और क्या किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई थी।
हादसे की वजह तलाशने में जुटी जांच एजेंसियां
विशेषज्ञों की टीम अब इमारत के ढहने के कारणों की जांच कर रही है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन, तकनीकी मानकों और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। यदि किसी भी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब भी जारी है राहत और बचाव अभियान
रात होने के बावजूद राहत और बचाव कार्य नहीं रोका गया है। भारी मशीनों, क्रेन और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। बचाव दलों की प्राथमिकता उन लोगों तक पहुंचना है, जिनके अब भी मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है।
तारातला में हुआ यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गया है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत कार्यों पर केंद्रित है, जबकि प्रभावित परिवार अपने प्रियजनों की सलामती की खबर का इंतजार कर रहे हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ती जा रही हैं।
