Rajasthan Congress में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने भरतपुर और डीग में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर स्थानीय संगठन के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में विश्वेन्द्र सिंह ने दोनों जिलों में टिकट वितरण और संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने डोटासरा को लेकर यहां तक लिखा कि “प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बना बैठा है।”
विश्वेन्द्र सिंह ने अपने बयान को ‘भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार-जिम्मेदार कौन?’ शीर्षक दिया। उनका आरोप है कि स्थानीय जिलाध्यक्षों ने पुराने और सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर अपने करीबी लोगों को टिकट दिलाए, जिसका नुकसान पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा। ये आरोप विश्वेन्द्र सिंह की ओर से लगाए गए हैं; संबंधित जिलाध्यक्षों या प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की विस्तृत प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है।
Rajasthan Congress में निकाय नतीजों के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
Rajasthan Congress के भीतर उठ रहे सवालों की बड़ी वजह भरतपुर और डीग के शहरी निकाय चुनाव के परिणाम हैं। दोनों जिलों की कुल 415 वार्ड सीटों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 262 सीटें जीतकर सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। BJP को 131 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 19 वार्ड जीत सकी। BSP को दो और RLP को एक सीट मिली।
अकेले भरतपुर नगर निगम की 65 सीटों में 36 पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते। BJP ने 20 और कांग्रेस ने सात वार्ड जीते, जबकि BSP और RLP को एक-एक सीट मिली।
इन्हीं नतीजों के बाद विश्वेन्द्र सिंह ने जिला संगठन की भूमिका और उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाए हैं।
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Rajasthan Congress: चहेतों को टिकट देने का लगाया आरोप
विश्वेन्द्र सिंह का आरोप है कि भरतपुर और डीग के दोनों जिला कांग्रेस अध्यक्षों ने टिकट वितरण में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
उन्होंने दावा किया कि स्थानीय संगठन ने अपने पसंदीदा लोगों को आगे बढ़ाया और इसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ा। उन्होंने चुनाव परिणाम को स्थानीय संगठन के फैसलों के प्रति जनता की प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया।
हालांकि टिकट वितरण में कथित पक्षपात को लेकर उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक फैसलों को लेकर एक वरिष्ठ नेता की सार्वजनिक आलोचना है।
डोटासरा को लेकर क्या बोले विश्वेन्द्र सिंह?
Rajasthan Congress में विवाद तब और बढ़ गया जब विश्वेन्द्र सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी सीधे निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा कि इतने कमजोर नतीजों के बावजूद प्रदेश नेतृत्व स्थानीय संगठन को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहा। इसी दौरान उन्होंने डोटासरा के लिए “मूक-बधिर बना बैठा है” जैसी तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और प्रदेश नेतृत्व से स्थिति पर संज्ञान लेने की मांग की।
विश्वेन्द्र सिंह ने यह भी कहा कि जब तक जिन स्थानीय पदाधिकारियों पर वे सवाल उठा रहे हैं, वे अपने पदों पर बने रहेंगे, उनके मुताबिक क्षेत्र में कांग्रेस के लिए संगठन को दोबारा मजबूत करना मुश्किल होगा।
यह विश्वेन्द्र सिंह का राजनीतिक और संगठनात्मक आकलन है, न कि पार्टी का आधिकारिक निष्कर्ष।
Rajasthan Congress: CM के गृह क्षेत्र में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल
भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह क्षेत्र है। इसी वजह से यहां के नगर निकाय नतीजों को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना गया।
हालांकि परिणामों में BJP से भी ज्यादा बड़ी भूमिका निर्दलीय उम्मीदवारों की रही। भरतपुर और डीग की संयुक्त 415 सीटों में करीब 63 प्रतिशत वार्ड निर्दलीयों ने जीते, जबकि BJP को करीब 32 प्रतिशत और कांग्रेस को लगभग 5 प्रतिशत सीटें मिलीं।
विश्वेन्द्र सिंह का तर्क है कि ऐसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में कांग्रेस संगठन को अधिक मजबूत स्थिति में होना चाहिए था।
Rajasthan Congress: प्रदेश स्तर पर क्या रहे निकाय चुनाव के नतीजे?
भरतपुर-डीग के खराब प्रदर्शन के बावजूद पूरे राजस्थान के निकाय चुनाव का परिणाम केवल इन्हीं दो जिलों जैसा नहीं रहा।
राज्य स्तर पर BJP कांग्रेस से आगे रही, लेकिन कई स्थानों पर निर्दलीय और छोटे दलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दस नगर निगमों के पार्षद चुनाव में BJP ने जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में बहुमत पाया। भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय सबसे बड़ा समूह बनकर सामने आए।
इसके बाद मेयर चुनावों में राजनीतिक समीकरण बदले और BJP ने दस में से नौ नगर निगमों में मेयर पद हासिल किया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस का मेयर बना।

Rajasthan Congress: डोटासरा खुद भी उठा रहे निकाय चुनाव पर सवाल
दिलचस्प बात यह है कि विश्वेन्द्र सिंह जहां कांग्रेस संगठन और डोटासरा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने निकाय चुनाव की प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
डोटासरा ने 29 सितंबर को आयोग से Returning Officers, पुलिस और प्रशासन के कथित पक्षपात की जांच कराने की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कुछ जगह उसके और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं और किसी आधिकारिक जांच में अभी सिद्ध नहीं हुए हैं।
इस तरह पार्टी के भीतर निकाय चुनाव के परिणामों की दो अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। प्रदेश नेतृत्व चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन पर सवाल उठा रहा है, जबकि विश्वेन्द्र सिंह पार्टी के स्थानीय संगठन और टिकट वितरण को भी हार के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं।
Rajasthan Congress में आगे क्या?
Rajasthan Congress के लिए यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में पंचायती राज चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में भरतपुर और डीग में संगठन को लेकर विश्वेन्द्र सिंह की सार्वजनिक नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकती है।
फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गोविंद सिंह डोटासरा या भरतपुर-डीग के जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वेन्द्र सिंह के आरोपों पर क्या जवाब देते हैं। इसके साथ ही पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस इन जिलों में संगठन या टिकट चयन प्रक्रिया में किसी तरह का बदलाव करती है या मौजूदा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ती है, इस पर भी नजर रहेगी।
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