Rajasthan Local Body Elections 2026: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव का माहौल गर्म होने के साथ ही पार्षद टिकट के अलावा महापौर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर भी राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज होने वाली है। इसकी सबसे दिलचस्प वजह राजस्थान के नगरपालिका निर्वाचन नियमों में मौजूद एक ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत किसी व्यक्ति के लिए पहले पार्षद का चुनाव जीतना महापौर या निकाय प्रमुख बनने की अनिवार्य शर्त नहीं है।
यानि कोई ऐसा व्यक्ति भी महापौर, सभापति या अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बन सकता है जिसने पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा हो, बशर्ते वह संबंधित नगरपालिका क्षेत्र में सदस्य बनने की कानूनी पात्रता रखता हो और किसी अयोग्यता के दायरे में न आता हो।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई राजनीतिक दल चुनाव परिणाम आने के बाद सीधे अपनी पसंद के नेता को मेयर घोषित कर सकता है। निकाय प्रमुख का चुनाव निर्वाचित पार्षद ही मतदान के जरिए करेंगे।
Rajasthan Local Body Elections 2026 में कैसे काम करेगा नियम?
Rajasthan Local Body Elections 2026 में सबसे पहले मतदाता अपने-अपने वार्ड से पार्षद चुनेंगे।
राजस्थान में 309 शहरी निकायों के 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं। मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में होगा और मतगणना 14 सितंबर को निर्धारित है।
इसके बाद नगर निगम के महापौर, नगर परिषद के सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
Rule 78 के मुताबिक Chairperson का पद उस व्यक्ति द्वारा भरा जाएगा जिसे नगरपालिका के elected members यानी निर्वाचित पार्षद चुनेंगे।
यही इस नियम की सबसे अहम बात है।
पार्षद नहीं तो भी कैसे बन सकते हैं महापौर?
2019 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने Rajasthan Municipalities (Election) Rules, 1994 में बदलाव करते हुए Fourth Amendment Rules, 2019 लागू किए।

संशोधित Rule 78 में कहा गया कि कोई व्यक्ति Chairperson बनने के योग्य है यदि वह नगरपालिका का सदस्य चुने जाने के लिए योग्य है और कानून के तहत अयोग्य नहीं है। इसके साथ ही निर्वाचित पार्षद को भी इस पद के लिए योग्य माना गया।
Rajasthan Local Body Elections 2026, यानी नियम ने दो तरह के उम्मीदवारों के लिए रास्ता खोला:
- निर्वाचित पार्षद
- ऐसा गैर-पार्षद व्यक्ति जो नगरपालिका सदस्य बनने की पात्रता रखता हो
दोनों ही महापौर, सभापति या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हो सकते हैं।
लेकिन अंतिम फैसला निर्वाचित पार्षदों के हाथ में रहेगा।
गैर-पार्षद उम्मीदवार को कौन प्रस्तावित करेगा?
यहां भी एक महत्वपूर्ण नियम है।
महापौर, सभापति या अध्यक्ष पद के candidate का nomination तभी valid होगा जब उसका nomination paper किसी निर्वाचित पार्षद द्वारा proposer के रूप में हस्ताक्षरित हो।
इसलिए कोई बाहरी व्यक्ति अकेले अपनी दावेदारी लेकर सीधे चुनाव मैदान में नहीं उतर सकता।
उसे निकाय के निर्वाचित सदस्यों में से कम से कम एक proposer की जरूरत होगी।
Rajasthan Local Body Elections 2026: वोट कौन देगा?
इस व्यवस्था में सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात को लेकर होता है।
गैर-पार्षद व्यक्ति उम्मीदवार बन सकता है, लेकिन वह अपने लिए वोट नहीं डाल सकता।
Rule 78 साफ करता है कि चुनावी बैठक में सभी contesting candidates मौजूद रह सकते हैं, भले ही वे elected member हों या नहीं, लेकिन vote केवल elected members यानी निर्वाचित पार्षद ही डाल सकते हैं।
इसीलिए इसे indirect election system कहा जाता है।
क्या कोई भी बाहरी नेता मेयर बन सकता है?
नहीं।
Rajasthan Local Body Elections 2026 में गैर-पार्षद को अवसर जरूर मिलता है, लेकिन कई कानूनी शर्तें लागू होती हैं।
सबसे पहले व्यक्ति को उसी Municipality में सदस्य बनने की पात्रता रखनी होगी। Rajasthan Municipalities Act के तहत सामान्य तौर पर उम्मीदवार का संबंधित नगरपालिका की किसी ward electoral roll में elector होना और कम से कम 21 वर्ष की आयु पूरी करना जरूरी है।
इसके अलावा वह कानून में निर्धारित disqualification के दायरे में नहीं होना चाहिए।
MP या MLA सीधे बन सकते हैं मेयर?
यहां नियम एक और स्पष्ट रोक लगाता है।
Rule 78 के मुताबिक कोई व्यक्ति महापौर/Chairperson पद के लिए eligible नहीं होगा यदि वह:
- संसद का सदस्य है
- राजस्थान विधानसभा का सदस्य है
- किसी Panchayati Raj Institution का member है
- Panchayati Raj Institution का Chairperson है
इसलिए विधानसभा या लोकसभा चुनाव हार चुका नेता पात्र हो सकता है, लेकिन कोई मौजूदा MLA या MP उसी स्थिति में सीधे इस पद पर नहीं बैठ सकता।
आरक्षित मेयर पद पर क्या होगा?
Rajasthan Local Body Elections 2026 में महापौर और दूसरे निकाय प्रमुखों के कई पद विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
ऐसी स्थिति में गैर-पार्षद उम्मीदवार को भी reservation requirement पूरी करनी होगी।
Rule 78 के अनुसार:
- SC पद पर SC candidate
- ST पद पर ST candidate
- OBC पद पर OBC candidate
- महिला पद पर महिला candidate
- SC/ST/OBC महिला पद पर संबंधित वर्ग की महिला
ही उम्मीदवार बन सकती है।
इस बार जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के महापौर पद open category में रखे गए हैं, जबकि अन्य नगर निगमों में महिला और OBC महिला reservation लागू किया गया है।
2019 में क्यों आया था यह नियम?
इस व्यवस्था की शुरुआत अक्टूबर 2019 में हुई थी।
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 16 अक्टूबर 2019 को Rajasthan Municipalities (Election) (Fourth Amendment) Rules जारी किए थे।
उस समय इस फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर भी विवाद हुआ था।
तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने गैर-पार्षद को नगर निकाय प्रमुख बनने का अवसर देने के फैसले पर सवाल उठाए थे। बाद में तत्कालीन UDH मंत्री शांति धारीवाल ने कहा था कि इसका इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में किया जाएगा, खासकर तब जब बहुमत वाली पार्टी के पास आरक्षित श्रेणी का निर्वाचित पार्षद उपलब्ध न हो।
हालांकि Gazette में लिखे Rule 78 की भाषा केवल ऐसी exceptional situation तक सीमित नहीं है; उसमें पात्र “person” और elected member दोनों के चुनाव लड़ने की व्यवस्था है।
क्या भजनलाल सरकार ने नियम बदल दिया?

मौजूदा BJP सरकार ने 2026 के चुनाव से पहले यह जरूर स्पष्ट किया है कि महापौर और चेयरमैन का चुनाव जनता द्वारा सीधे नहीं होगा।
UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि इस बार निकाय प्रमुखों को निर्वाचित पार्षदों के जरिए चुना जाएगा।
यानी direct mayor election की व्यवस्था नहीं है।
2019 के Rule 78 को निरस्त करने वाली कोई नई अधिसूचना उपलब्ध आधिकारिक नियमों में सामने नहीं आई है। इसलिए गैर-पार्षद की eligibility वाला प्रावधान वर्तमान नियमों में महत्वपूर्ण बना हुआ है।
शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं
मूल कॉपी में उम्मीदवार के लिए “शैक्षणिक योग्यता” पूरी करने की बात थी, लेकिन यहां correction जरूरी है।
राजस्थान में नगरपालिका चुनाव लड़ने के लिए पहले लागू Class 10 qualification की शर्त को Rajasthan Municipalities (Amendment) Act, 2019 के जरिए हटा दिया गया था। Section 21 की clause (f) delete कर दी गई।
2026 में भी राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया कि urban local body candidates के लिए कोई educational qualification requirement नहीं है।
इसलिए इसे eligibility में शामिल करना सही नहीं होगा।
बड़े नेताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नियम?
Rajasthan Local Body Elections 2026 में यह नियम राजनीतिक पार्टियों को एक महत्वपूर्ण strategic option देता है।
मान लीजिए किसी बड़े शहर में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता है, लेकिन जिस नेता को पार्टी महापौर बनाना चाहती है उसने पार्षद चुनाव नहीं लड़ा।
अगर वह संबंधित निकाय की मतदाता सूची में है, जरूरी eligibility पूरी करता है, reservation के अनुरूप है और disqualified नहीं है, तो उसे निकाय प्रमुख के चुनाव में उतारा जा सकता है।
फिर पार्टी के निर्वाचित पार्षद उसके पक्ष में मतदान कर सकते हैं।
इससे विधानसभा या लोकसभा चुनाव हार चुके, लेकिन शहर में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले नेताओं के लिए भी local politics में वापसी का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि किसी व्यक्ति का नाम केवल राजनीतिक चर्चा में होने भर से उसकी उम्मीदवारी पक्की नहीं मानी जा सकती।
जनता मेयर को सीधे वोट नहीं देगी
इस बार राजस्थान में मेयर चुनाव को लेकर यह बात स्पष्ट रखना जरूरी है कि आम मतदाता सीधे महापौर के लिए वोट नहीं करेगा।
पहले voters पार्षद चुनेंगे।
उसके बाद उन्हीं निर्वाचित पार्षदों की meeting में mayor/chairperson election होगा। 2026 के चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक पार्षद चुनाव के बाद निकाय प्रमुखों की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसी व्यवस्था के कारण ward चुनाव के बाद पार्षदों की संख्या और दलों का बहुमत बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
Rajasthan Local Body Elections 2026 की बड़ी बातें
- राजस्थान में 309 शहरी निकायों में चुनाव हो रहे हैं।
- कुल 10,245 पार्षद चुने जाएंगे।
- मतदान 9 और 11 सितंबर को होगा।
- परिणाम 14 सितंबर को आएंगे।
- महापौर/सभापति/अध्यक्ष का चुनाव जनता सीधे नहीं करेगी।
- निर्वाचित पार्षद निकाय प्रमुख को चुनेंगे।
- उम्मीदवार का खुद पार्षद होना Rule 78 में अनिवार्य नहीं है।
- गैर-पार्षद को नगरपालिका सदस्य बनने की eligibility पूरी करनी होगी।
- nomination किसी elected member को propose करना होगा।
- वोट केवल elected councillors डालेंगे।
- reserved post होने पर candidate को संबंधित reservation category पूरी करनी होगी।
- MP, MLA या Panchayati Raj Institution के मौजूदा member/Chairperson पर Rule 78 के तहत रोक है।
- नगरपालिका चुनाव के लिए minimum educational qualification की बाध्यता नहीं है।
चुनाव नतीजों के बाद बढ़ेगा असली खेल
कुल मिलाकर Rajasthan Local Body Elections 2026 में पार्षदों का चुनाव खत्म होने के बाद महापौर, सभापति और अध्यक्ष के लिए राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदल सकते हैं।
किसी प्रभावशाली नेता का पार्षद चुनाव नहीं लड़ना अपने आप में उसकी मेयर की दावेदारी खत्म नहीं करता। मौजूदा नियम उसे चुनाव लड़ने का रास्ता देते हैं, बशर्ते वह आवश्यक eligibility और reservation conditions पूरी करता हो।
लेकिन अंतिम शक्ति निर्वाचित पार्षदों के पास होगी। इसलिए असली मुकाबला सिर्फ यह नहीं होगा कि किस पार्टी के कितने पार्षद जीतते हैं, बल्कि चुनाव परिणाम के बाद वे निकाय प्रमुख के लिए किस चेहरे के पीछे एकजुट होते हैं।
राजस्थान नगरपालिका नियमों की आधिकारिक जानकारी के लिए Rajasthan Local Self Government Department और चुनाव से संबंधित आधिकारिक अपडेट के लिए Rajasthan State Election Commission देख सकते हैं।
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