Swara Bhasker on Modi: बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। स्वरा ने कहा कि इस तरह के राजनीतिक लेबल उल्टा प्रतिक्रिया पैदा कर रहे हैं और इसी का उदाहरण सोशल मीडिया पर सामने आया व्यंग्यात्मक ‘Dimagi Naxal Party’ अकाउंट है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और बच्चों के प्रदर्शन में उतरने को चिंताजनक बताया।
स्वरा की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन उनके शब्दों में ‘दिमागी नक्सल’ अब भी अवसर की तलाश में हैं और हिंसा व अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं।
Swara Bhasker on Modi: ‘दिमागी नक्सल’ पर क्या कहा?
Swara Bhasker on Modi विवाद में अभिनेत्री ने सीधे प्रधानमंत्री की टिप्पणी को निशाने पर लिया।
स्वरा ने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ जैसा शब्द खुद सत्ता पक्ष की भाषा से पैदा हुआ और इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया पर इसी नाम से एक व्यंग्यात्मक पार्टी सामने आ गई। उन्होंने इसी संदर्भ में तंज कसते हुए कहा कि ऐसा करके वे लोग “अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं” और आगे चलकर उस कब्र पर क्या लिखा जाएगा, यह भी शायद खुद ही तय कर देंगे।
यह स्वरा भास्कर की राजनीतिक टिप्पणी है। इसे किसी तथ्यात्मक निष्कर्ष के बजाय केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की राजनीतिक भाषा पर उनकी आलोचना के रूप में देखा जाना चाहिए।
PM मोदी ने वास्तव में क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से नक्सलवाद का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया कि देश में सशस्त्र माओवादी हिंसा बहुत कमजोर हो चुकी है और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास आगे बढ़ रहा है।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसे तत्व हिंसा और अराजकता के अवसर तलाशते हैं और समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें isolate करने और युवाओं को विकसित भारत की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही।
इस टिप्पणी के बाद विपक्षी नेताओं और कई सार्वजनिक हस्तियों ने शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम समेत कई नेताओं ने भी इस बयान पर प्रतिक्रिया दी।
‘Dimagi Naxal Party’ कैसे हुई वायरल?
Swara Bhasker on Modi की प्रतिक्रिया में जिस ‘Dimagi Naxal Party’ का उल्लेख हुआ, वह कोई Election Commission में पंजीकृत राजनीतिक दल होने की पुष्टि वाला संगठन नहीं है।
यह नाम स्वतंत्रता दिवस के बाद एक satirical social-media handle के तौर पर सामने आया। Economic Times ने इसकी पहचान एक व्यंग्यात्मक online initiative के रूप में की और बताया कि इसे चलाने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं थी।
इस Instagram account के follower count में अलग-अलग समय पर तेजी से बदलाव आया। Times of India ने इसके 1.7 लाख से अधिक followers होने की रिपोर्ट की, जबकि NDTV ने बाद में यह संख्या 2.6 लाख से ज्यादा बताई। इससे इतना स्पष्ट है कि account ने बेहद कम समय में बड़ी online reach हासिल की।
कुछ बाद की रिपोर्टों में चार लाख से अधिक followers का दावा भी किया गया, लेकिन follower count लगातार बदलने वाला आंकड़ा है। इसलिए किसी एक निश्चित संख्या को स्थायी तथ्य मानना ठीक नहीं होगा।
स्वरा बोलीं- सरकार के बनाए लेबल उल्टा पड़ रहे
Swara Bhasker on Modi मामले में अभिनेत्री का तर्क था कि सरकार जिस भाषा का इस्तेमाल आलोचकों या असहमति से जुड़े राजनीतिक विमर्श में करती है, वही शब्द बाद में व्यंग्य और विरोध का जरिया बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के बाद इतनी तेजी से satirical account सामने आना और लोगों का उससे जुड़ना इसी प्रतिक्रिया का उदाहरण है।
Maharashtra Times की रिपोर्ट के मुताबिक स्वरा ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से सरकार विरोध या असहमति रखने वाले लोगों को अलग-अलग labels के जरिए पेश करती रही है। यह स्वरा का राजनीतिक आरोप और दृष्टिकोण है, स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं।
Swara Bhasker on Modi: शिक्षा व्यवस्था पर भी स्वरा भास्कर ने उठाए सवाल
प्रधानमंत्री की टिप्पणी के साथ-साथ स्वरा ने देश की education system को लेकर भी आलोचना की।
उन्होंने छोटे स्कूली बच्चों के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन बच्चों को classroom में होना चाहिए, उनका सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करना चिंताजनक है।
स्वरा ने इसे शिक्षा व्यवस्था की स्थिति से जोड़ते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि बच्चों को पर्याप्त school infrastructure, classrooms और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलने पर असंतोष पैदा होता है।
यहां भी यह साफ रखना जरूरी है कि शिक्षा व्यवस्था की कथित विफलता और बच्चों के प्रदर्शन के बीच सीधा कारण बताना स्वरा भास्कर का राजनीतिक आकलन है।
छात्र आंदोलनों में पहले भी दिखाई दी हैं स्वरा
Swara Bhasker on Modi की ताजा टिप्पणी कोई पहली बार नहीं है जब अभिनेत्री हाल के छात्र आंदोलनों पर सामने आई हैं।
जुलाई 2026 में दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सरकार की तरफ से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की कथित तैनाती को लेकर सवाल उठाए थे। Hindustan Times ने उस समय उनकी प्रतिक्रिया रिपोर्ट की थी।
इसी वजह से शिक्षा, छात्र आंदोलन और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर उनकी टिप्पणियां लगातार राजनीतिक चर्चा में रही हैं।
Swara Bhasker on Modi: ‘दिमागी नक्सल’ पर विपक्ष भी हमलावर
प्रधानमंत्री का ‘दिमागी नक्सल’ बयान केवल स्वरा भास्कर तक सीमित विवाद नहीं रहा।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने प्रतिक्रिया देते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व होने की बात कही थी। इसके बाद भाजपा नेताओं ने उन पर पलटवार किया और राजनीतिक बहस तेज हो गई।
CJP से जुड़े सौरव दास ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा था कि सरकार से सवाल पूछने वाले युवाओं को नक्सल जैसे labels से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
वहीं प्रधानमंत्री और सरकार का पक्ष यह है कि ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी सामान्य आलोचना या dissent नहीं, बल्कि हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली विचारधारा के संदर्भ में थी। आधिकारिक PIB transcript इसी संदर्भ को दर्ज करता है।
Swara Bhasker on Modi की बड़ी बातें
- स्वरा भास्कर ने PM मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी की आलोचना की।
- उन्होंने व्यंग्यात्मक ‘Dimagi Naxal Party’ की तेजी से बढ़ी online popularity का उदाहरण दिया।
- स्वरा ने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता पक्ष “अपनी कब्र खुद खोद रहा है।”
- PM मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
- उनका संदर्भ हिंसा और अराजकता के रास्ते तलाशने वाले वैचारिक तत्वों से था।
- ‘Dimagi Naxal Party’ social media पर satirical handle के रूप में सामने आई।
- इसे चलाने वालों की पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
- अलग-अलग समय पर इसके follower count 1.7 लाख से 2.6 लाख से अधिक तक रिपोर्ट किए गए।
- स्वरा ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के protests को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
- ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर कांग्रेस समेत अन्य विरोधी आवाजों ने भी PM पर निशाना साधा है।
बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस
कुल मिलाकर Swara Bhasker on Modi विवाद अब मनोरंजन जगत की प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आधिकारिक पक्ष यह है कि ‘दिमागी नक्सल’ से उनका आशय उन तत्वों से है जो हिंसा और अराजकता को वैचारिक रूप से बढ़ावा देते हैं। दूसरी ओर स्वरा भास्कर और कई विपक्षी आवाजें इस तरह की terminology को dissent और सवाल पूछने वाली आवाजों के लिए खतरनाक राजनीतिक labeling मान रही हैं।
वहीं सोशल मीडिया पर ‘Dimagi Naxal Party’ जैसे व्यंग्यात्मक account की तेजी से बढ़ी लोकप्रियता ने इस राजनीतिक शब्द को अलग online life दे दी है। हालांकि यह कोई आधिकारिक राजनीतिक पार्टी है, ऐसा सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण का आधिकारिक विवरण Press Information Bureau पर देखा जा सकता है।
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