रावण बनाकर घर चलाते हैं कारीगर | चंद मिनटों में राख हो जाती है कई दिनों की मेहनत! | Dussehra | TNC
दशहरा नजदीक आते ही जयपुर में सड़कों के किनारे रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार करने वाले कारीगरों की मेहनत दिखाई देने लगी है। बांस, कागज, कपड़े और रंगों से कई दिनों में तैयार होने वाले ये पुतले दशहरे की शाम चंद मिनटों में जलकर राख हो जाएंगे। लेकिन इन पुतलों के पीछे छिपी है कारीगरों के संघर्ष, मेहनत और रोजी-रोटी की कहानी।
The News Canvas की इस ग्राउंड रिपोर्ट में रावण बनाने वाले कारीगरों की जिंदगी, बढ़ती महंगाई, कच्चे माल की कीमतों और पुतलों की बिक्री से जुड़ी चुनौतियों को सामने लाया गया है। बांस, कागज, रंग और सजावट की बढ़ती लागत ने कारीगरों के लिए मुनाफा कमाना मुश्किल बना दिया है। कई परिवारों की आजीविका इसी काम पर निर्भर है। जिस रावण को जलाकर लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं, उसी रावण को बनाकर ये कारीगर अपने घर का चूल्हा जलाते हैं।
