खरगे और राहुल गांधी ने फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन को अपर्याप्त बताते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी, छात्रों से माफी और प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग की जांच की मांग दोहराई
नई दिल्ली। परीक्षा पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के कदम को नाकाफी बताते हुए कहा कि नई घोषणा करने से पहले परीक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को कहा कि पेपर लीक के मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि युवाओं का कल्याण और भविष्य सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है तथा विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
राहुल गांधी ने दोहराईं तीन मांगें
NEET Paper Leak Row पर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद राहुल गांधी ने सरकार पर परीक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और जिम्मेदार लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा से सरकार अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।
राहुल गांधी ने कांग्रेस और प्रदर्शनकारी छात्रों की तीन प्रमुख मांगें दोहराईं—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस का कहना है कि फास्ट-ट्रैक अदालतें आरोपियों के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई तेज कर सकती हैं, लेकिन इससे उस प्रशासनिक विफलता का उत्तर नहीं मिलता, जिसके कारण प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर पहुंचा। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि परीक्षा प्रणाली की निगरानी करने वाले अधिकारियों और संस्थाओं की जिम्मेदारी कब तय होगी।
खरगे ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि शिक्षा मंत्री के पद पर बने रहने तक मामले की निष्पक्ष जांच और संसद में स्वतंत्र चर्चा संभव नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पेपर लीक पर संसदीय चर्चा चाहती है, लेकिन उससे पहले धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
खरगे के अनुसार, यह मामला किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के घटते विश्वास से जुड़ा है। कांग्रेस ने पहले भी आरोप लगाया था कि बीते वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने शुरुआत में गड़बड़ी की गंभीरता स्वीकार करने के बजाय मामले को सीमित बताने का प्रयास किया और बाद में बढ़ते छात्र आंदोलन के दबाव में नई घोषणाएं कीं।
केसी वेणुगोपाल ने संसद में दिया स्थगन प्रस्ताव
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देते हुए नियमित कार्यवाही रोककर परीक्षा व्यवस्था के संकट और जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने की मांग की।
वेणुगोपाल ने अपने नोटिस में आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक होने के बावजूद व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर संसद में चर्चा तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग रखी।
उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल घोषणा नहीं, बल्कि यह भरोसा चाहिए कि भविष्य में प्रश्नपत्र लीक नहीं होगा और परीक्षा माफिया से जुड़े अधिकारियों, कोचिंग नेटवर्क तथा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई होगी।
जयराम रमेश ने संसद में बयान देने की मांग की
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर विषय पर सरकार को संसद के भीतर विस्तृत बयान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्ष और छात्रों के सवालों का सामना करने के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा कर रहे हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि फास्ट-ट्रैक अदालतों का कदम अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन यह पेपर लीक रोकने, जांच में पारदर्शिता लाने और जिम्मेदार पदाधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित करने की व्यापक योजना का विकल्प नहीं बन सकता।
सरकार बोली—दोषियों को जल्द मिलेगी सजा
सरकार का कहना है कि फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन से पेपर लीक मामलों की सुनवाई में होने वाली देरी कम होगी और आरोप सिद्ध होने पर दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी। केंद्र ने इसे परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक और कदम बताया है।
प्रधानमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देने की बात कही। सरकार का तर्क है कि जांच एजेंसियां पहले से सक्रिय हैं और विशेष अदालतें जांच पूरी होने के बाद मुकदमों को तेजी से निर्णायक स्थिति तक पहुंचाने में मदद करेंगी।
हालांकि प्रदर्शनकारी और विपक्ष अभी भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं। इसी मुद्दे को लेकर संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामा हो रहा है। सरकार ने चर्चा की सहमति जताई है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि मंत्री के पद पर रहते हुए निष्पक्ष जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो सकती।
फास्ट-ट्रैक अदालतों से आगे भी उठ रहे सवाल
NEET Paper Leak Row में फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा जांच के बाद न्यायिक प्रक्रिया तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि इससे परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की सुरक्षा, NTA की आंतरिक व्यवस्था, अधिकारियों की भूमिका और भविष्य में लीकेज रोकने के उपायों से जुड़े प्रश्नों का स्वतः समाधान नहीं होता।
पूरे विवाद में अब दो अलग-अलग मुद्दे सामने हैं। पहला, पेपर लीक में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें जल्द सजा देना। दूसरा, उन संस्थागत और प्रशासनिक कमजोरियों को दूर करना, जिनके कारण प्रश्नपत्र अपराधियों तक पहुंचा। सरकार पहले मुद्दे पर फास्ट-ट्रैक अदालतों की बात कर रही है, जबकि विपक्ष दूसरे मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
छात्रों का भरोसा लौटाने के लिए दोनों स्तरों पर कार्रवाई आवश्यक होगी। दोषियों को शीघ्र सजा मिलने के साथ परीक्षा सुरक्षा का स्वतंत्र ऑडिट, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य की परीक्षाओं के लिए पारदर्शी सुरक्षा प्रोटोकॉल भी सार्वजनिक करने होंगे।




