एक तरफ भारत को AI सुपरपावर बनाने का सपना और दूसरी तरफ पानी, बिजली तथा जमीन पर बढ़ता दबाव। विशाखापत्तनम में Google के विशाल AI Hub से अरबों डॉलर का निवेश और लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन डेटा सेंटर को ठंडा रखने के लिए पानी की संभावित मांग ने नई बहस छेड़ दी है। चार करोड़ लीटर प्रतिदिन का आंकड़ा Google के प्रोजेक्ट का आधिकारिक प्रमाणित आंकड़ा नहीं है, लेकिन पूरे प्रस्तावित डेटा सेंटर क्लस्टर की जरूरतों को लेकर विशेषज्ञों के अनुमान चिंता जरूर बढ़ाते हैं। सवाल है—पानी पर पहला अधिकार शहर के लोगों और किसानों का होगा या अरबों डॉलर के सर्वरों का?




