Meta ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Facebook वीडियो गलती से हटाए जाने की बात स्वीकार की। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी के ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी प्रमुख को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेपर लीक और युवाओं से जुड़े वीडियो को भारत में कुछ समय के लिए प्रतिबंधित किए जाने के बाद Meta ने उसे बहाल कर दिया है। कंपनी ने स्वीकार किया कि सामग्री को गलती से हटाया गया था। इस घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta से जवाब मांगा है।
सरकारी सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने Meta के ग्लोबल हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी को तलब किया है। हालांकि मंत्रालय की ओर से बुलावे का कोई विस्तृत सार्वजनिक आदेश या आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति अभी सामने नहीं आई है।
Meta ने माना—वीडियो गलती से हटा
PM Modi Facebook Video को 28 जुलाई की शुरुआती घंटों में भारत में कुछ समय के लिए नहीं देखा जा सका। वीडियो बहाल करने के बाद Meta के प्रवक्ता ने कहा कि सामग्री गलती से हटा दी गई थी और अब उसे फिर से उपलब्ध करा दिया गया है।
कंपनी ने अपने संक्षिप्त बयान में इस बात का विस्तृत तकनीकी कारण नहीं बताया कि गलती कैसे हुई। इसलिए इसे सीधे तौर पर किसी सॉफ्टवेयर या तकनीकी खराबी का नतीजा कहना अभी पूरी तरह पुष्ट नहीं है। Meta ने सार्वजनिक रूप से केवल इसे एक “error” बताया है।
वीडियो पर दिख रहा था ‘कानूनी अनुरोध’ का संदेश
वीडियो प्रतिबंधित होने के दौरान भारत में Facebook उपयोगकर्ताओं को सूचना दिखाई दे रही थी कि कानूनी अनुरोध के जवाब में इस सामग्री की क्षेत्रीय उपलब्धता सीमित की गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो के “See Why” विकल्प में यह संदेश दिखाई दिया था, लेकिन उसमें न तो किसी कानूनी प्रावधान का उल्लेख था और न ही यह बताया गया था कि अनुरोध किस सरकारी संस्था, अदालत या अन्य प्राधिकरण की ओर से आया था।
बाद में Meta ने प्रतिबंध हटाते हुए वीडियो बहाल कर दिया। अब सरकार यह जानना चाहती है कि कानूनी अनुरोध वाला संदेश क्यों प्रदर्शित हुआ और सामग्री हटाने की प्रक्रिया में किस स्तर पर गलती हुई।
MeitY ने मांगा स्पष्टीकरण
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार MeitY केवल वीडियो की बहाली से संतुष्ट नहीं है। मंत्रालय Meta से यह समझना चाहता है कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक अकाउंट पर पोस्ट की गई सामग्री को किस आधार पर प्रतिबंधित किया गया।
जांच का प्रमुख विषय यह भी हो सकता है कि क्या सामग्री स्वचालित मॉडरेशन प्रणाली के कारण हटाई गई, किसी मानवीय समीक्षा में गलती हुई या प्लेटफॉर्म पर कानूनी अनुरोध को गलत तरीके से दर्ज किया गया।
किसी संवैधानिक पदाधिकारी के आधिकारिक संदेश पर गलत प्रतिबंध लगना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर प्रश्न माना जा रहा है।
23 जुलाई को पोस्ट किया गया था वीडियो
प्रधानमंत्री मोदी ने यह वीडियो 23 जुलाई को युवाओं और पेपर लीक विवाद के संदर्भ में जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि विद्यार्थियों का कल्याण और भविष्य सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, मोदी ने पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ शीघ्र और कठोर कार्रवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने की बात भी कही थी।
वीडियो में प्रधानमंत्री ने पेपर लीक रोकने के लिए और अधिक कड़े कदमों को केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखने की जानकारी भी दी थी। यह संदेश उस समय जारी किया गया था, जब परीक्षा अनियमितताओं को लेकर छात्र संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से सरकार पर दबाव बढ़ रहा था।
युवाओं से सीधे संवाद की थी कोशिश
यह वीडियो प्रधानमंत्री की ओर से परीक्षा विवाद पर युवाओं और Gen Z तक सीधे पहुंचने के प्रयास के रूप में देखा गया। वीडियो पहले Instagram और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से देखा जा चुका था।
Facebook पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसके स्क्रीनशॉट साझा किए। इसके बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से तूल पकड़ा तथा Meta को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।
कंटेंट मॉडरेशन पर उठे सवाल
इस घटना ने सोशल मीडिया कंपनियों की स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। बड़े प्लेटफॉर्म प्रतिदिन करोड़ों पोस्ट, तस्वीरों और वीडियो की जांच के लिए तकनीकी प्रणालियों के साथ मानवीय समीक्षा का भी इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन किसी सामग्री पर कार्रवाई किए जाने के बाद उपयोगकर्ता को स्पष्ट रूप से यह जानकारी मिलनी चाहिए कि पोस्ट किस नियम, कानून या सामुदायिक मानक के तहत हटाई गई है।
इस मामले में पहले कानूनी अनुरोध का संदेश दिखना और बाद में Meta द्वारा इसे केवल गलती बताना दो अलग स्थितियां प्रस्तुत करता है। इसी विरोधाभास पर मंत्रालय की ओर से विस्तृत जवाब मांगे जाने की संभावना है।
सरकारी सेंसरशिप का प्रमाण नहीं
उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि केंद्र सरकार ने स्वयं प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने का कानूनी अनुरोध भेजा था। प्रतिबंध के दौरान Facebook पर ऐसा संदेश जरूर दिखा, लेकिन अनुरोध करने वाले प्राधिकरण की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई।
Meta ने भी अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि कानूनी अनुरोध वाला नोटिस क्यों दिखाई दिया। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी सरकारी संस्था, कर्मचारी या तीसरे पक्ष को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल पुष्टि इतनी ही है कि PM Modi Facebook Video कुछ समय के लिए भारत में प्रतिबंधित हुआ, Meta ने उसे गलती बताते हुए बहाल किया और सरकारी सूत्रों के अनुसार MeitY ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है।




