जरूरी स्पष्टता: 56 प्रतिशत गिरावट का आंकड़ा 20 जुलाई और रविवार के एक-दिवसीय यातायात की तुलना पर आधारित है। साथ ही हूती समूह ने पूरे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को औपचारिक रूप से बंद नहीं किया, बल्कि सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ “समुद्री नाकाबंदी” की घोषणा की है।
हूती समूह की सऊदी जहाजों के खिलाफ नाकाबंदी की घोषणा के बाद रविवार को केवल 15 मालवाहक जहाज गुजरे; 20 जुलाई को इसी मार्ग से 34 जहाजों की आवाजाही हुई थी
नई दिल्ली। लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों की आवाजाही में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जहाजों की निगरानी और कमोडिटी विश्लेषण करने वाली कंपनी Kpler के आंकड़ों के अनुसार रविवार को इस मार्ग से केवल 15 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि 20 जुलाई को 34 जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया था।
इस प्रकार दोनों दिनों के आंकड़ों की तुलना करने पर यातायात में करीब 56 प्रतिशत की कमी सामने आती है। यह जानकारी संयुक्त अरब अमीरात के समाचार संस्थान ‘द नेशनल’ ने Kpler के आंकड़ों के आधार पर दी है। यह संख्या सभी प्रकार के समुद्री जहाजों की नहीं, बल्कि तेल, अनाज, उर्वरक और अन्य वस्तुओं की ढुलाई करने वाले कमोडिटी जहाजों की है।
15 जहाजों में नौ लाल सागर से निकले
रिपोर्ट के अनुसार रविवार को बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले 15 जहाजों में से नौ लाल सागर से बाहर निकल रहे थे, जबकि छह जहाज लाल सागर की ओर जा रहे थे। इन जहाजों में कच्चे तेल, अनाज और उर्वरक जैसी वस्तुओं की ढुलाई की जा रही थी।
जहाजों के गंतव्यों में भारत, चीन, पाकिस्तान और नीदरलैंड जैसे देश शामिल थे। यातायात में आई गिरावट यह संकेत देती है कि जहाज संचालक सुरक्षा जोखिम का आकलन करते हुए इस मार्ग का इस्तेमाल सीमित कर रहे हैं या वैकल्पिक मार्ग चुन रहे हैं।
हूतियों ने 20 जुलाई को की थी नाकाबंदी की घोषणा
यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ “समुद्री नाकाबंदी” लागू करने की घोषणा की थी। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने यमन के बंदरगाहों और हवाईअड्डों पर अनुचित प्रतिबंध लगा रखे हैं।
हालांकि घोषणा के समय हूती समूह ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि नाकाबंदी किन समुद्री इलाकों में लागू होगी और किन जहाजों को निशाना माना जाएगा। इसलिए इसे पूरे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
हूतियों ने सना हवाईअड्डे पर हुए हमले के लिए भी सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया था। दूसरी ओर यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हमले की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी। ऐसे में सना हवाईअड्डे से जुड़े आरोप अभी भी परस्पर विरोधी दावों का हिस्सा हैं।
सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हमले का दावा
यातायात में गिरावट हूती समूह द्वारा सऊदी अरब के जिजान और यानबू में सरकारी तेल कंपनी अरामको के प्रतिष्ठानों पर हमले का दावा किए जाने के बाद दर्ज हुई। समूह ने सऊदी जहाजों और सऊदी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री यातायात को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है।
‘द नेशनल’ के अनुसार हूतियों ने लाल सागर में सऊदी जहाज NCC Masa पर हमला करने का भी दावा किया था, जिससे जहाज को मामूली नुकसान पहुंचा। दक्षिणी लाल सागर में एक अन्य टैंकर के पास अज्ञात प्रक्षेपास्त्र गिरने की सूचना भी ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा संस्था UKMTO को दी गई थी।
सऊदी अरब ने हूती सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं और कहा है कि वह कारोबारी जहाजों की सुरक्षा करेगा। यमन की विदेश मंत्री नामित अफराह अल-जौबा ने चेतावनी दी कि हूती समूह ईरान की होर्मुज रणनीति की तरह बाब अल-मंदेब में समुद्री यातायात नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है बाब अल-मंदेब?
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य अफ्रीका के हॉर्न और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। एशिया से यूरोप जाने वाले वे जहाज, जो स्वेज नहर का इस्तेमाल करते हैं, सामान्य रूप से इसी रास्ते से गुजरते हैं।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार वर्ष 2023 में प्रतिदिन लगभग 93 लाख बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बाब अल-मंदेब से गुजरे थे। लाल सागर में सुरक्षा संकट बढ़ने के बाद यह मात्रा वर्ष 2024 में घटकर करीब 41 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। वर्ष 2025 की पहली छमाही में यह करीब 42 लाख बैरल प्रतिदिन थी।
इस मार्ग से बचने वाले जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे ईंधन खर्च, चालक दल की लागत, बीमा प्रीमियम और माल पहुंचने का समय बढ़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान होने पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर भी दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
जहाज कंपनियां बदल रही हैं मार्ग
जर्मनी की प्रमुख शिपिंग कंपनी Hapag-Lloyd ने कहा है कि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका फिलहाल उसके नेटवर्क में सीमित है, क्योंकि उसकी अधिकांश सेवाएं केप ऑफ गुड होप के रास्ते संचालित की जा रही हैं।
कंपनी ने यह भी कहा कि परिस्थितियों में बदलाव होने पर वह कम समय में अपने मार्ग और समय-सारणी में बदलाव करने के लिए तैयार है। इससे पता चलता है कि बड़ी जहाज कंपनियां अभी बाब अल-मंदेब से गुजरने के जोखिम को लेकर सतर्क हैं।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
रविवार को बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले कुछ जहाजों का गंतव्य भारत भी था। इसलिए इस मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान जारी रहने की स्थिति में भारत और यूरोप के बीच माल ढुलाई, पश्चिम एशिया से आने वाले कुछ ऊर्जा उत्पादों तथा आयात-निर्यात की लागत प्रभावित हो सकती है।
यह तत्काल आपूर्ति बंद होने का प्रमाण नहीं है, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों से निकलने वाली संभावित आर्थिक आशंका है। जहाज यदि केप ऑफ गुड होप का रास्ता चुनते हैं तो यात्रा लंबी होने के कारण माल ढुलाई की लागत और डिलीवरी समय बढ़ सकता है।
आंकड़ों को सावधानी से समझना जरूरी
Bab Al Mandeb Shipping Traffic में 56 प्रतिशत गिरावट महत्वपूर्ण है, लेकिन यह आंकड़ा केवल दो अलग-अलग दिनों—20 जुलाई और रविवार—के यातायात की तुलना करता है। इसे पूरे महीने के औसत में 56 प्रतिशत गिरावट या जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मार्ग से जहाजों की आवाजाही जारी है, लेकिन सुरक्षा खतरे, हूती चेतावनियों और क्षेत्रीय सैन्य तनाव के कारण कई जहाज कंपनियां सतर्कता बरत रही हैं। आने वाले दिनों के आंकड़े ही बताएंगे कि यह गिरावट अस्थायी है या लाल सागर व्यापार मार्ग में लंबे समय का बदलाव शुरू हो गया है।




