DMK नेता वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई आर.वी. अशोक कुमार ने Triplicane पुलिस स्टेशन पहुंचकर जमानत की शर्तों के तहत रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। मामला TVK विधायक को कथित रूप से पाला बदलने के लिए ₹35 करोड़ देने की पेशकश से जुड़ा है।
चेन्नई। तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और DMK नेता वी. सेंथिल बालाजी शनिवार, 1 अगस्त 2026 को अपने भाई आर.वी. अशोक कुमार के साथ चेन्नई के Triplicane पुलिस स्टेशन पहुंचे। दोनों ने मद्रास हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत की शर्तों के तहत पुलिस के सामने उपस्थिति दर्ज कराई। जांच अधिकारी ने सेंथिल बालाजी से एक घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की।
यह मामला सत्तारूढ़ Tamilaga Vettri Kazhagam यानी TVK के विधायक डॉ. एन. इलायराजा को विधानसभा में पार्टी के निर्देश के खिलाफ मतदान करने के लिए कथित रूप से ₹35 करोड़ की पेशकश किए जाने से जुड़ा है। आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और किसी अदालत ने सेंथिल बालाजी, उनके भाई या अन्य आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया है।
दो दिन अनुपस्थित रहने के बाद थाने पहुंचे
सेंथिल बालाजी पिछले दो दिनों से पुलिस स्टेशन में निर्धारित उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए थे। उनके ठिकानों और कथित सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर Directorate of Vigilance and Anti-Corruption यानी DVAC की छापेमारी और TASMAC मामले में कानूनी कार्रवाई को इसका कारण बताया गया।
उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में आवेदन देकर 6 अगस्त तक व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मांगी थी। उनका कहना था कि TASMAC मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से परामर्श के लिए उन्हें समय चाहिए। आवेदन लंबित रहने के बीच वह शनिवार को पुलिस स्टेशन पहुंचे, रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए और पूछताछ में शामिल हुए।
दिन में दो बार पेश होने की जमानत शर्त
मद्रास हाईकोर्ट ने 8 जुलाई को सेंथिल बालाजी और उनके भाई को विधायक रिश्वत मामले में सशर्त अग्रिम जमानत दी थी। न्यायमूर्ति जी.के. इलन्थिरैयन ने दोनों को अगला आदेश आने तक प्रतिदिन सुबह और शाम जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने तथा जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।
इस कठोर शर्त का उद्देश्य जांच एजेंसी को दोनों से नियमित पूछताछ का अवसर देना और आरोपियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है; इससे केवल जांच के दौरान तत्काल गिरफ्तारी से सशर्त सुरक्षा मिलती है।
क्या है ₹35 करोड़ का कथित रिश्वत मामला?
TVK विधायक डॉ. एन. इलायराजा ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि 26 जून को थिरुनावुक्करासु नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया। फोन करने वाले ने कथित रूप से खुद को एक Political Strategy Organisation से जुड़ा बताया और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव आने की स्थिति में TVK के निर्देश के विरुद्ध वोट देने के लिए ₹35 करोड़ की पेशकश की। प्रस्ताव स्वीकार न करने पर विधायक और उनके परिवार को कथित धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया।
पुलिस का आरोप है कि यह संपर्क सेंथिल बालाजी और उनके भाई के निर्देश पर किया गया। बचाव पक्ष ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि दोनों का शिकायतकर्ता से सीधा संपर्क, रकम के लेन-देन या धमकी से संबंध दिखाने वाला स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है।
सरकार गिराने की साजिश का आरोप
जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट के सामने दावा किया था कि इलायराजा अकेले विधायक नहीं थे और करीब 10 TVK विधायकों को कथित रूप से पाला बदलवाने के लिए चिन्हित किया गया था। पुलिस ने ₹35 करोड़ की कथित पेशकश के अलावा ₹5 करोड़ Brokerage के लिए निर्धारित होने और Hawala Money के संभावित इस्तेमाल का भी आरोप लगाया था। इन दावों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
TVK ने इस कथित कोशिश को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार को अस्थिर करने की साजिश बताया है। सरकारी गजट के अनुसार विजय ने मई 2026 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला और Home तथा Police विभाग भी उनके पास हैं।
मामले में कई गिरफ्तारियां
पुलिस ने जुलाई की शुरुआत में थिरुनावुक्करासु, नरेश और त्यागराजन सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। अगले चरण में पांच अन्य लोगों की गिरफ्तारी के साथ संख्या आठ हुई और बाद में एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी से यह नौ तक पहुंच गई थी। ताजा वायर रिपोर्ट में अब तक 14 गिरफ्तारियों का दावा किया गया है, लेकिन पुलिस की अद्यतन आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं मिली है।
आरोपियों से कथित बैठकों, फोन कॉल, होटल मुलाकातों और धन के संभावित स्रोतों के बारे में जांच की जा रही है। पुलिस ने यह भी पता लगाने की कोशिश की है कि क्या अन्य विधायकों से इसी प्रकार संपर्क किया गया था।
सेंथिल बालाजी ने राजनीतिक बदले का लगाया आरोप
पूछताछ के बाद सेंथिल बालाजी ने पत्रकारों से कहा कि उनका नाम शुरुआती शिकायत या FIR में नहीं था और जांच के दौरान उन्हें मामले से जोड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होने के बावजूद उन्हें अग्रिम जमानत लेने और दिन में दो बार पुलिस स्टेशन पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने TVK सरकार पर DMK नेताओं को निशाना बनाते हुए मामले दर्ज करने का आरोप लगाया। बालाजी ने कहा कि वह अदालत के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताए जा रहे मामलों का कानूनी तरीके से सामना करेंगे।
सरकार और जांच एजेंसी ने कार्रवाई को राजनीतिक बदला मानने के उनके आरोप को स्वीकार नहीं किया है। FIR और जांच को वैध ठहराने के लिए पुलिस ने कथित कॉल रिकॉर्ड, गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी और दूसरे साक्ष्यों का हवाला दिया है। मामला अभी जांच और अदालत की निगरानी में है।
अलग TASMAC केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत
विधायक रिश्वत मामले से अलग, DVAC ने सेंथिल बालाजी और अन्य लोगों के खिलाफ TASMAC के संचालन में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर नया मामला दर्ज किया है। FIR में वर्ष 2021 से 2025 के दौरान शराब दुकानों, Bars, Tender और Distribution से जुड़ी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। DVAC ने तमिलनाडु में करीब 45 ठिकानों पर तलाशी भी ली।
मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए आरोपों की गंभीरता और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता का उल्लेख किया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को उन्हें गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में पूरी तरह सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित न करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने और अपना Passport जांच अधिकारी को सौंपने जैसी शर्तें लगाईं। अदालत ने तमिलनाडु सरकार से FIR रद्द करने की उनकी मांग पर जवाब भी मांगा है।
दो अलग मामलों को मिलाना ठीक नहीं
सेंथिल बालाजी के खिलाफ चल रहे दोनों मामलों की प्रकृति अलग है। ₹35 करोड़ वाला मामला TVK विधायक को कथित रिश्वत देकर पार्टी बदलवाने या पार्टी निर्देश के खिलाफ वोट कराने की कोशिश से जुड़ा है और इसकी जांच Triplicane पुलिस कर रही है।
दूसरा मामला TASMAC में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसकी जांच DVAC कर रहा है। दोनों में अलग FIR, अलग जांच एजेंसी और अलग जमानत आदेश हैं। इसलिए विधायक रिश्वत मामले में शनिवार की पेशी को TASMAC केस की पूछताछ नहीं माना जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
Triplicane पुलिस सेंथिल बालाजी और उनके भाई की भूमिका, कथित मध्यस्थों से संबंध, फोन रिकॉर्ड और संभावित धन व्यवस्था की जांच जारी रख सकती है। हाईकोर्ट उनकी प्रतिदिन दो बार उपस्थिति की शर्त में राहत देने की मांग पर भी विचार करेगा।
जांच एजेंसी को यह स्थापित करना होगा कि कथित ₹35 करोड़ की पेशकश केवल मध्यस्थों की कार्रवाई थी या उसके पीछे किसी राजनीतिक नेता का निर्देश और वित्तीय व्यवस्था मौजूद थी। दूसरी ओर बचाव पक्ष आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए प्रत्यक्ष तथा स्वीकार्य साक्ष्य की कमी का मुद्दा उठा रहा है।
फिलहाल सेंथिल बालाजी को दोनों मामलों में गिरफ्तारी से सशर्त सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन जांच जारी है। जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर अदालत राहत में बदलाव या उसे रद्द करने पर विचार कर सकती है।




