Parliament Monsoon Session: मानसून सत्र में विपक्ष ने राम मंदिर दान मामले, FCRA संशोधन बिल, दिल्ली पुलिस कार्रवाई, दल-बदल कानून और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। विपक्षी दलों ने कई ऐसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की है, जिनमें राम मंदिर दान से जुड़े आरोप, विदेशी अंशदान नियमन कानून में संशोधन, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई, दल-बदल कानून और परिसीमन जैसे विषय शामिल हैं।
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार को संसद में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से विभिन्न विधेयकों और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा आगे बढ़ाने की तैयारी है।
राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर विपक्ष का हमला

संसद में सोमवार को सबसे ज्यादा चर्चा राम मंदिर दान मामले को लेकर होने की संभावना है। कांग्रेस के संगठन महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
उन्होंने मांग की है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दान के कथित अनियमितता मामले पर सदन में तत्काल चर्चा कराई जाए। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग रखी है।
विपक्ष की ओर से इस मामले में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब और जांच की स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।
Parliament Monsoon Session: वेणुगोपाल ने SIT जांच पर उठाए सवाल
केसी वेणुगोपाल ने अपने प्रस्ताव में आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दान में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। उन्होंने दावा किया कि श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए नकद और आभूषणों से संबंधित कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जांच में केवल छोटे स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई की गई, जबकि प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच पर्याप्त तरीके से नहीं हुई।
इन आरोपों को लेकर संसद में सरकार से जवाब मांगने की तैयारी विपक्ष कर रहा है।
Parliament Monsoon Session: खरगे ने पीएम मोदी से मांगा जवाब
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
खरगे का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री की भूमिका रही है। ऐसे में विपक्ष चाहता है कि इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री या सरकार की ओर से संसद में स्थिति स्पष्ट की जाए।
कांग्रेस इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक या वित्तीय मामला नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए संसद में उठाने की तैयारी में है।
Parliament Monsoon Session: दिल्ली पुलिस कार्रवाई पर भी विपक्ष आक्रामक
राम मंदिर मामले के साथ-साथ दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई भी संसद में बड़ा मुद्दा बन सकती है।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया है। विपक्ष इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहा है।
विपक्ष का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को संसद में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस मुद्दे पर सदन में हंगामा होने की संभावना जताई जा रही है।
Parliament Monsoon Session: FCRA संशोधन बिल पर विपक्ष की रणनीति
सोमवार को विदेशी अंशदान नियमन संशोधन विधेयक 2026 यानी FCRA Amendment Bill 2026 भी विपक्ष और सरकार के बीच टकराव का कारण बन सकता है।
इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के बीच विचार-विमर्श का दौर जारी है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक प्रस्तावित है। इसमें अलग-अलग दलों के फ्लोर लीडर शामिल होकर आगे की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं।
कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप भी जारी किया है। इससे संकेत मिल रहा है कि पार्टी विधेयक और अन्य मुद्दों पर सदन में पूरी ताकत के साथ मौजूद रहना चाहती है।
दल-बदल कानून में बदलाव की मांग
Parliament Monsoon Session, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी चर्चा की मांग की है। उन्होंने लोकसभा में इस विषय पर प्रस्ताव रखा है।
उनका तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे राजनीतिक दल-बदल को रोकने के लिए प्रभावी प्रावधान होने चाहिए, जो केवल राजनीतिक लाभ या अवसरवाद के आधार पर किए जाते हैं।
हालांकि, तिवारी ने यह भी कहा है कि किसी सांसद या विधायक को वैचारिक असहमति व्यक्त करने का लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
भारत में दल-बदल विरोधी प्रावधान 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किए गए थे। यह व्यवस्था संविधान की दसवीं अनुसूची से जुड़ी हुई है।
परिसीमन का मुद्दा भी उठाएगा विपक्ष
संसद सत्र में परिसीमन का मुद्दा भी विपक्ष की रणनीति का हिस्सा रहने की संभावना है। विपक्षी दलों की ओर से लंबे समय से इस विषय पर राज्यों के प्रतिनिधित्व और संभावित राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
विपक्ष चाहता है कि भविष्य में होने वाले परिसीमन से जुड़े विषयों पर राज्यों और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक चर्चा हो। संसद में यह मुद्दा उठने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
Parliament Monsoon Session: कावेरी जल विवाद पर भी चर्चा की मांग
तमिलनाडु से डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने राज्यसभा में कावेरी नदी जल विवाद पर चर्चा की मांग की है।
उनका आरोप है कि कावेरी जल नियमन समिति के निर्देशों को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मतभेद बने हुए हैं। उन्होंने मेकेदातु परियोजना से जुड़े मुद्दे को भी उठाया है।
डीएमके का कहना है कि कावेरी जल विवाद का सीधा असर तमिलनाडु के किसानों और कृषि गतिविधियों पर पड़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार को इस विषय पर स्पष्ट रुख रखना चाहिए।
लोकसभा में कई विधेयक पेश होने की तैयारी
राजनीतिक मुद्दों के अलावा सोमवार को लोकसभा में कई विधेयकों को पेश किए जाने का कार्यक्रम भी है।
इनमें ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, खान एवं खनिज से संबंधित संशोधन विधेयक और केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से जुड़ा विधेयक शामिल है।
इन विधेयकों पर आगे चर्चा और संसदीय प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा। विपक्ष इनमें से कई मुद्दों पर सरकार से स्पष्टीकरण और विस्तृत चर्चा की मांग कर सकता है।
Parliament Monsoon Session: संसद में टकराव के बीच कामकाज पर नजर
मानसून सत्र में एक तरफ विपक्ष सरकार को विभिन्न राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी ओर सरकार कई विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।
राम मंदिर दान मामले से लेकर FCRA संशोधन, दिल्ली पुलिस कार्रवाई, दल-बदल कानून, परिसीमन और कावेरी विवाद तक कई मुद्दे सोमवार को संसद की कार्यवाही का माहौल गर्म कर सकते हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे या सदन में हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित होगी। सोमवार की संसदीय कार्यवाही पर सभी की नजर रहेगी।




