Operation Bhagwan Vishnu: जयपुर में प्राचीन सोने की मूर्ति के नाम पर कथित ठगी की कोशिश का राजस्थान पुलिस की CID-CB ने भंडाफोड़ किया है। गलतागेट थाना क्षेत्र में बोगस ग्राहक बनाकर बिछाए गए जाल में पुलिस ने अब्दुल कादिर निवासी सलेमपुर, करौली को पकड़ा। आरोपी के पास से करीब 21 इंच लंबा विग्रह बरामद हुआ है, जिसे कथित तौर पर सोने की प्राचीन मूर्ति बताकर बेचा जा रहा था। पुलिस का कहना है कि शुरुआती तौर पर यह अष्टधातु का प्रतीत हुआ है।
मामले में शुरुआत में मूर्ति की कीमत 10 लाख रुपये बताई गई थी। पुलिसकर्मियों ने ग्राहक बनकर बातचीत आगे बढ़ाई और मोलभाव के बाद सौदा 3 लाख 10 हजार रुपये में तय हुआ। जैसे ही मूर्ति की डिलीवरी हुई, CID-CB और गलतागेट थाना पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया।
Operation Bhagwan Vishnu में कैसे बिछाया गया जाल?
Operation Bhagwan Vishnu की शुरुआत CID-CB को मिली एक सूचना के बाद हुई। पुलिस को जानकारी मिली थी कि शहजाद नाम के व्यक्ति के पास कथित तौर पर पुरानी सोने की मूर्ति है और वह उसे बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है।
इसके बाद CID-CB की विशेष टीम ने सूचना की पुष्टि करने के लिए गतिविधियों पर नजर रखी। सहायक उपनिरीक्षक दुष्यंत सिंह और हेड कांस्टेबल शाहिद अली ने बोगस ग्राहक बनकर संपर्क किया।
बातचीत के दौरान पहले मूर्ति के बदले 10 लाख रुपये मांगे जाने की बात सामने आई। मोलभाव के बाद कीमत घटकर 3.10 लाख रुपये हो गई।
3.10 लाख की डील, बीच में मनोरंजन बैंक के नोट
पुलिस ने सौदा पूरा करने के लिए 3.10 लाख रुपये की रकम तैयार की। रिपोर्ट के मुताबिक रकम की गड्डी में ऊपर और नीचे वास्तविक भारतीय मुद्रा के नोट रखे गए, जबकि बीच में ‘भारतीय मनोरंजन बैंक’ वाले नोट लगाए गए थे।
गलतागेट थाना क्षेत्र में मूर्ति की डिलीवरी के दौरान यह रकम आरोपी को सौंप दी गई। पुलिस को विग्रह के सोने का नहीं होने का संदेह हुआ और इसके बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। बाद में गलतागेट थाना पुलिस की मदद से सूरजपोल अनाज मंडी के सामने गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
आरोपी को डिलीवरी के बदले मिलने थे 10 हजार
Operation Bhagwan Vishnu में गिरफ्तार अब्दुल कादिर से पुलिस ने पूछताछ भी की है।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उसने बताया कि सौदा तय होने के बाद उसे मूर्ति लेकर जयपुर भेजा गया था। पुलिस का दावा है कि अब्दुल समद के कहने पर वह 8 सितंबर की रात मूर्ति की डिलीवरी देने के लिए आया था और इस काम के बदले उसे 10 हजार रुपये मिलने थे।
पुलिस अब शहजाद, अब्दुल समद और इस सौदे से कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि मूर्ति कहां से आई और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है या नहीं।
मूर्ति कितनी पुरानी? अब विशेषज्ञ करेंगे जांच
बरामद विग्रह की वास्तविक उम्र और धातु अभी जांच का विषय है।
पुलिस इसे पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों के पास परीक्षण के लिए भेजेगी। इसके बाद पता चलेगा कि:
- मूर्ति वास्तव में किस धातु की बनी है
- इसकी अनुमानित उम्र कितनी है
- क्या इसका कोई ऐतिहासिक महत्व है
- क्या यह किसी पुरातात्विक श्रेणी में आती है
- मूर्ति की वास्तविक उत्पत्ति कहां की है
इसलिए फिलहाल इसे निश्चित तौर पर प्राचीन सोने की मूर्ति नहीं कहा जा सकता। कार्रवाई का मूल आरोप यही है कि इसे सोने की प्राचीन मूर्ति बताकर बेचने की कोशिश की जा रही थी।
सामाजिक सौहार्द को लेकर पुलिस का दावा
राजस्थान पुलिस ने Operation Bhagwan Vishnu की जानकारी देते हुए यह भी दावा किया है कि समय रहते कार्रवाई होने से दो समुदायों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका को टाला गया।
हालांकि इस पहलू को फिलहाल पुलिस के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ठगी के पीछे केवल आर्थिक उद्देश्य था या कोई अन्य मकसद भी था।
CID-CB और गलतागेट पुलिस ने की संयुक्त कार्रवाई
इस ऑपरेशन को CID-CB और जयपुर कमिश्नरेट की गलतागेट थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार कार्रवाई अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस अपराध बिपिन कुमार पाण्डेय के निर्देशन में हुई। इसमें IG के.बी. वंदना, DIG राशि डोगरा डूडी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अदिति कांवट के स्तर पर निगरानी की गई, जबकि मौके की कार्रवाई में CID-CB और स्थानीय थाना पुलिस की टीम शामिल रही।
Operation Bhagwan Vishnu की बड़ी बातें
- जयपुर में CID-CB ने बोगस ग्राहक बनकर जाल बिछाया।
- कथित तौर पर अष्टधातु के विग्रह को सोने की मूर्ति बताया जा रहा था।
- शुरुआती कीमत 10 लाख रुपये मांगी गई।
- मोलभाव के बाद सौदा 3.10 लाख रुपये में तय हुआ।
- करीब 21 इंच लंबा विग्रह बरामद किया गया।
- आरोपी अब्दुल कादिर को गिरफ्तार किया गया।
- पुलिस के मुताबिक उसे डिलीवरी के बदले 10 हजार रुपये मिलने थे।
- शहजाद और अब्दुल समद समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
- मूर्ति की उम्र और धातु की जांच विशेषज्ञों से कराई जाएगी।
अब नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
कुल मिलाकर Operation Bhagwan Vishnu में पुलिस ने मूर्ति की कथित फर्जी पहचान के जरिए 3.10 लाख रुपये की डील पूरी होने से पहले आरोपी को पकड़ लिया। अब जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि मूर्ति कहां से आई, इसे सोने का बताने की योजना किसने बनाई और इस मामले में कितने लोग शामिल हैं।
आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
राजस्थान पुलिस की आधिकारिक जानकारी के लिए Rajasthan Police देखें। राजस्थान की दूसरी खबरों के लिए The News Canvas पढ़ें।

