डिजिटल अरेस्ट घोटाले पर सीबीआई का शिकंजा, 16 राज्यों में 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

The News Canvas
7 Min Read
Image: TNC

देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों और डिजिटल अरेस्ट घोटालों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा अभियान चलाया है। एजेंसी ने एक समन्वित कार्रवाई के तहत 16 राज्यों में 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े व्यापक नेटवर्क को ध्वस्त करने और इसके पीछे सक्रिय अपराधियों तक पहुंचने के उद्देश्य से की गई है।

सीबीआई की यह कार्रवाई “ऑपरेशन चक्र” के तहत की गई, जिसे साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। जांच एजेंसी का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले गिरोहों ने देशभर में सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया है और अब इन नेटवर्क्स पर निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।

60 विशेष टीमों ने संभाला मोर्चा

इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सीबीआई ने लगभग 60 विशेष जांच और तलाशी टीमों का गठन किया। इन टीमों ने अलग-अलग राज्यों में एक साथ कार्रवाई करते हुए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की।

जिन राज्यों में यह अभियान चलाया गया उनमें पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में राज्यों में एक साथ की गई कार्रवाई को हाल के वर्षों में साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़े अभियानों में से एक माना जा रहा है।

200 से अधिक मामलों से जुड़े नेटवर्क पर फोकस

जांच एजेंसी के अनुसार यह अभियान डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 200 से अधिक मामलों की जांच का हिस्सा है। इन मामलों में अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मचारी या अन्य सरकारी प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे।

इसके बाद पीड़ितों को कथित कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी या जांच का डर दिखाकर उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल या ऑनलाइन संपर्क में रखा जाता था। इसी प्रक्रिया को डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। भय और मानसिक दबाव में आकर कई लोग अपनी जीवनभर की बचत तक ठगों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे।

दो संदिग्ध गिरफ्तार, शेल कंपनियों का खुलासा

सीबीआई की कार्रवाई के दौरान दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग कथित तौर पर शेल कंपनियां बनाकर और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाकर ठगी के पैसों को इधर-उधर भेजने में मदद कर रहे थे।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध रूप से प्राप्त धन को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए किया जा रहा था। वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम आखिर किन-किन लोगों तक पहुंची।

फर्जी वेबसाइट के जरिए रची गई थी ठगी की साजिश

जांच के दौरान सीबीआई ने हाल ही में एक ऐसी फर्जी वेबसाइट का भी पता लगाया था, जिसका इंटरनेट पता देश की शीर्ष न्यायिक संस्था की आधिकारिक वेबसाइट से काफी मिलता-जुलता था। आरोप है कि इसी समानता का फायदा उठाकर लोगों को भ्रमित किया जाता था और उन्हें कानूनी कार्रवाई के नाम पर डराया जाता था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की शिकायत पर जांच शुरू की गई थी। शुरुआती पड़ताल में ही साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले, जिसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया गया।

विदेशी नागरिक भी बने ठगी का शिकार

सीबीआई की जांच में यह बात भी सामने आई है कि इस साइबर अपराध का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं था। उपलब्ध सबूतों से संकेत मिले हैं कि ठगी करने वाले गिरोहों ने विदेशी नागरिकों को भी अपना निशाना बनाया।

जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े संभावित लिंक और डिजिटल ट्रेल की भी पड़ताल कर रही हैं। इसके लिए विभिन्न एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से बेनकाब किया जा सके।

डिजिटल अरेस्ट बनता जा रहा है बड़ी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं। अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को मानसिक रूप से डराते हैं और सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को घंटों तक वीडियो कॉल पर रखा जाता है और उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई होने वाली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अपराधों से बचने के लिए लोगों को जागरूक होना बेहद जरूरी है। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल रूप से गिरफ्तार नहीं करती और न ही बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देती है।

जांच अभी जारी, और गिरफ्तारियां संभव

सीबीआई का कहना है कि ऑपरेशन चक्र के तहत जुटाए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

फिलहाल यह कार्रवाई देशभर में फैले डिजिटल अरेस्ट गिरोहों के खिलाफ एक बड़ा कदम मानी जा रही है। जांच एजेंसियों का उद्देश्य केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना ही नहीं, बल्कि उन पूरे नेटवर्क्स को खत्म करना है जो साइबर ठगी को संगठित तरीके से संचालित कर रहे हैं।

Share This Article
Leave a Comment