BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन की बढ़ती वैश्विक भूमिका और सदस्य देशों के बीच सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि BRICS की ताकत, स्वीकार्यता और उसके प्रति भरोसा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा है। अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं वाले देशों के बीच साझा सोच अब आपसी फायदे वाले सहयोग में बदल रही है।
प्रधानमंत्री ने रविवार को वैश्विक तनाव, महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और supply-chain disruptions का जिक्र करते हुए कहा कि आज कोई संकट केवल एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसी वजह से BRICS के तहत crisis preparedness को मजबूत करने, संक्रामक बीमारियों के लिए early-warning mechanism विकसित करने और supply chains को ज्यादा resilient बनाने पर काम किया गया है।
BRICS Summit 2026 में PM मोदी ने क्या कहा?
BRICS Summit 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच सहयोग पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। दुनिया के एक हिस्से में पैदा होने वाला स्वास्थ्य, आर्थिक या प्राकृतिक संकट तेजी से दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि BRICS केवल चर्चा का मंच बनकर न रहे, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएं तैयार करे जो सदस्य देशों को किसी संकट के आने से पहले तैयार होने और उसके प्रभाव को कम करने में मदद करें।
भारत की 2026 BRICS Presidency का theme “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है। 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
संक्रामक बीमारियों के लिए Early Warning System
BRICS Summit 2026 में health security एक अहम विषय रहा।
New Delhi Declaration में सदस्य देशों ने BRICS Integrated Early Warning System for Prevention and Response to Mass Infectious Diseases को आगे बढ़ाने के लिए dedicated sub-working group स्थापित करने और उसके Terms of Reference का स्वागत किया है। इसका मकसद disease surveillance, timely information sharing, preparedness और coordinated response को मजबूत करना है।
BRICS Summit 2026, यानी किसी infectious disease outbreak के बड़े संकट में बदलने से पहले सदस्य देश उसके संकेतों को पहचानने और जरूरी जानकारी साझा करने की दिशा में ज्यादा व्यवस्थित रूप से सहयोग कर सकेंगे।
यह व्यवस्था केवल भविष्य की महामारी तक सीमित नहीं है। BRICS declaration में zoonotic threats, antimicrobial resistance और दूसरी public-health emergencies को भी ऐसी चुनौतियां बताया गया है जो राष्ट्रीय सीमाओं से बंधी नहीं रहतीं।
BRICS Summit 2026: आपदा से पहले तैयारी पर जोर
भारत की BRICS Presidency में disaster risk reduction को भी प्राथमिकता दी गई है।
BRICS Disaster Risk Reduction Group ने multi-hazard early warning systems, resilient infrastructure, science and technology, nature-based solutions और community resilience पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम किया है। जुलाई में BRICS देशों ने Disaster Risk Reduction पर Joint Statement भी अपनाया था।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश भी इसी दिशा में था कि किसी आपदा के बाद केवल राहत पहुंचाने की जगह पहले से warning, data sharing और preparedness को मजबूत किया जाए।
इससे बाढ़, चक्रवात, extreme weather जैसी घटनाओं से पहले member countries के बीच बेहतर coordination की संभावना बढ़ सकती है।
BRICS Summit 2026: Supply Chain संकट से निपटने के लिए नया Framework
महामारी और हाल के geopolitical crises ने global supply chains की कमजोरियों को उजागर किया है। इसी वजह से BRICS Logistics Supply-Chain Cooperation Framework को संगठन की अहम उपलब्धियों में शामिल किया गया है।
यह voluntary और consensus-based framework है। इसका उद्देश्य transport logistics और supply chains को ज्यादा resilient और sustainable बनाना है। इसमें technical exchange, cargo और shipping services से जुड़ी knowledge sharing, localized manufacturing ecosystems और capacity building जैसे क्षेत्रों पर सहयोग की बात है।
New Delhi Declaration में भी इस framework की स्थापना का स्वागत किया गया है।
Startups और innovation पर भी बड़ा फोकस
BRICS Summit 2026 में केवल crisis management ही नहीं, बल्कि startups और innovation को भी प्रमुख जगह दी गई।
भारत की Presidency के दौरान BRICS Incubator Network को आगे बढ़ाया गया है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग सदस्य देशों के startup ecosystems और incubators को आपस में जोड़ना है।
इसके अलावा startup financing को बढ़ाने के लिए BRICS Startup Innovation Fund जैसी पहल पर भी चर्चा हुई।
PM मोदी ने BRICS MSME Cooperation Portal की पहल का भी स्वागत किया और entrepreneurship तथा innovation के लिए member countries के बीच ज्यादा मजबूत नेटवर्क बनाने पर जोर दिया।
Critical Minerals पर भी PM मोदी की चेतावनी
दूसरे दिन के संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने critical minerals और महत्वपूर्ण technologies के strategic इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने आगाह किया कि critical resources और technology का “weaponisation” सामूहिक विकास के रास्ते में बाधा बन सकता है। उन्होंने technology adoption को inclusive रखने और महत्वपूर्ण संसाधनों की supply chains में cooperation बढ़ाने की जरूरत बताई।
यह मुद्दा खास तौर पर electric vehicles, renewable energy, electronics और advanced manufacturing के लिए अहम है, जहां critical minerals की global supply बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है।
BRICS Summit 2026 का विस्तार और बढ़ती भूमिका
BRICS अब शुरुआती पांच देशों तक सीमित समूह नहीं रहा है। संगठन में Egypt, Ethiopia, Iran, UAE और Indonesia जैसे देश भी शामिल हो चुके हैं। 2026 New Delhi Summit में expanded BRICS की political, economic और people-to-people cooperation को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
New Delhi Declaration में ज्यादा representative और fair international order, reformed multilateral system, sustainable development और inclusive growth को BRICS cooperation के प्रमुख लक्ष्यों में रखा गया है।
BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन-शी समेत कई नेता एक मंच पर
नई दिल्ली में हुए summit में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन के दौरान PM मोदी ने कई नेताओं के साथ bilateral meetings भी कीं। भारत-चीन वार्ता में मोदी और शी ने रिश्तों को आगे बढ़ाने, व्यापारिक संपर्क मजबूत करने और सीमा पर शांति को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
BRICS Summit 2026 की बड़ी बातें
- PM मोदी ने BRICS की बढ़ती ताकत, स्वीकार्यता और वैश्विक भरोसे पर जोर दिया।
- 18वां BRICS Summit 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
- BRICS Integrated Early Warning System को आगे बढ़ाने के लिए dedicated mechanism बनाया गया।
- infectious diseases की monitoring, information sharing और rapid response पर सहयोग बढ़ेगा।
- disaster-risk reduction में multi-hazard early warning और preparedness पर जोर दिया गया।
- BRICS Logistics Supply-Chain Cooperation Framework स्थापित किया गया।
- startups के लिए incubator network और innovation financing पर सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
- PM मोदी ने critical minerals और technology के “weaponisation” के खिलाफ चेताया।
- भारत की 2026 Presidency का theme Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability है।
BRICS को practical cooperation का मंच बनाने पर जोर
कुल मिलाकर BRICS Summit 2026 के दूसरे दिन भारत का जोर संगठन को केवल geopolitical discussions तक सीमित रखने के बजाय practical cooperation की दिशा में आगे बढ़ाने पर रहा।
Pandemic preparedness के लिए early-warning mechanism, disaster resilience, logistics supply-chain framework, startup cooperation और innovation जैसी पहल इसी strategy का हिस्सा हैं।
BRICS Summit 2026, PM मोदी का संदेश साफ रहा कि आज एक देश की health emergency, natural disaster या supply-chain disruption तेजी से दूसरे देशों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए BRICS देशों को साझा चुनौतियों के लिए साझा और पहले से तैयार response system विकसित करना होगा।
BRICS की आधिकारिक घोषणाओं के लिए BRICS New Delhi Declaration – PM India और भारत सरकार की summit updates के लिए Press Information Bureau देखा जा सकता है।
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