चित्तौड़गढ़ में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की ओर से अफीम किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष जनसुनवाई शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में Opium Farmers अपनी समस्याओं, शिकायतों और मांगों को लेकर पहुंचे। किसानों ने अफीम लाइसेंस, औसत, नामांतरण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखे।
जनसुनवाई में अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनसे संबंधित नियमों, प्रक्रियाओं तथा संभावित समाधान की जानकारी दी। विभाग की ओर से किसानों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी लिखित शिकायतों को दर्ज कर नियमों के अनुसार समाधान की कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य Opium Farmers को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कोटा स्थित विभागीय मुख्य कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत देना है।
Opium Farmers की समस्याएं सुनने के लिए लगाया गया शिविर
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार विभाग लगातार किसानों के साथ सीधा संवाद बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है। इसी उद्देश्य से चित्तौड़गढ़ में विशेष जनसुनवाई का आयोजन किया गया।
उप नारकोटिक्स आयुक्त नरेश मुंदेल ने बताया कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो का मुख्य कार्यालय कोटा में स्थित है। चित्तौड़गढ़ जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए हर समस्या को लेकर कोटा पहुंचना आसान नहीं होता।
ऐसे में विभाग ने निर्णय लिया कि अधिकारी स्वयं किसानों के बीच जाकर उनकी शिकायतें सुनें। इससे Opium Farmers को समय और खर्च दोनों की बचत होगी और विभाग तक उनकी समस्याएं भी सीधे पहुंच सकेंगी।
लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर सबसे अधिक सवाल
जनसुनवाई शिविर में बड़ी संख्या में किसान अफीम लाइसेंस से जुड़ी समस्याओं को लेकर पहुंचे। कई किसानों ने नए लाइसेंस, पुराने लाइसेंस की स्थिति और पात्रता से जुड़े सवाल अधिकारियों के सामने रखे।
विभागीय अधिकारियों ने किसानों को लाइसेंस प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी। इसके साथ ही उन मामलों के बारे में भी बताया गया, जिनमें नियमों के कारण लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता।
अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए Opium Farmers को यह स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है कि उनका मामला किस स्थिति में है और यदि लाइसेंस जारी नहीं हो सकता तो उसका कारण क्या है।
इससे किसानों के बीच प्रक्रिया को लेकर भ्रम और अनिश्चितता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
औसत और नामांतरण से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं
अफीम की खेती से जुड़े किसानों के लिए औसत का निर्धारण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। जनसुनवाई में कई किसानों ने औसत से जुड़ी अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं।
इसके साथ ही नामांतरण से जुड़े मामलों को लेकर भी किसानों ने आवेदन और शिकायतें दीं। कई परिस्थितियों में परिवार में लाइसेंस धारक की मृत्यु या अन्य कारणों से नामांतरण की प्रक्रिया आवश्यक हो जाती है।
इन मामलों में सही प्रक्रिया और दस्तावेजों की जानकारी नहीं होने के कारण कई Opium Farmers को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों ने किसानों को बताया कि नामांतरण से जुड़े मामलों में किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है और किस प्रक्रिया के तहत आवेदन पर कार्रवाई की जाती है।
लिखित रूप में दर्ज की जा रही किसानों की शिकायतें
जनसुनवाई में केवल मौखिक रूप से समस्याएं सुनने तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रही। किसानों की शिकायतों और मांगों को लिखित रूप में दर्ज करने की व्यवस्था भी की गई।
विभाग का कहना है कि Opium Farmers की ओर से प्राप्त शिकायतों का नियमानुसार परीक्षण किया जाएगा। जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव है, उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, जबकि अन्य मामलों को संबंधित विभागीय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को यह भरोसा देना है कि उनकी शिकायत केवल सुनकर छोड़ नहीं दी जाएगी, बल्कि उसका रिकॉर्ड तैयार कर कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे अधिकारियों से कर सकेंगे किसान
जनसुनवाई के दौरान विभाग ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी स्पष्ट संदेश दिया। उप नारकोटिक्स आयुक्त ने कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से किसान से रिश्वत मांगी जाती है या किसी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है तो किसान सीधे वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शिकायत जनसुनवाई के दौरान भी दी जा सकती है। इसके अलावा विभाग के उच्च अधिकारियों तक भी मामला पहुंचाया जा सकता है।
विभाग ने साफ किया कि Opium Farmers से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रहा है और किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
हर 15 से 20 दिन में जनसुनवाई कराने का प्रयास
किसानों की समस्याओं का नियमित समाधान सुनिश्चित करने के लिए विभाग भविष्य में भी इसी प्रकार के जनसुनवाई शिविर आयोजित करने की योजना बना रहा है।
उप नारकोटिक्स आयुक्त ने बताया कि विभाग का प्रयास रहेगा कि हर 15 से 20 दिन में किसानों के लिए जनसुनवाई आयोजित की जाए।
अगर यह व्यवस्था नियमित रूप से लागू होती है तो Opium Farmers को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए बार-बार कोटा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अधिकारी स्थानीय स्तर पर किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुन सकेंगे और संबंधित मामलों में जरूरी मार्गदर्शन भी दिया जा सकेगा।
किसानों और विभाग के बीच सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर
अफीम की खेती से जुड़े नियम और लाइसेंस प्रक्रिया सामान्य कृषि व्यवस्था से काफी अलग होती है। यही वजह है कि किसानों को कई बार विभागीय प्रक्रियाओं को समझने में परेशानी होती है।
ऐसे में सीधे जनसुनवाई के माध्यम से Opium Farmers और अधिकारियों के बीच संवाद बढ़ने से कई समस्याओं का समाधान शुरुआती स्तर पर ही हो सकता है।
विभाग का मानना है कि यदि किसानों को नियमों और प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी समय पर मिल जाए तो कई विवाद और शिकायतें पैदा होने से पहले ही समाप्त हो सकती हैं।
इसी कारण किसानों को लाइसेंस प्रक्रिया, पात्रता, औसत, नामांतरण और अन्य मामलों में विस्तृत जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है।
कोटा के चक्कर से किसानों को मिल सकती है राहत
चित्तौड़गढ़ जिले के कई अफीम उत्पादक गांव कोटा से काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में विभागीय कार्य के लिए किसान को यात्रा, समय और आर्थिक खर्च का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय स्तर पर जनसुनवाई की व्यवस्था होने से Opium Farmers को इस परेशानी से राहत मिल सकती है।
किसानों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब उन्हें अपनी समस्या सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखने का अवसर मिल रहा है। इससे शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होने की उम्मीद है।
जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचे अफीम किसान
चित्तौड़गढ़ में आयोजित इस विशेष शिविर में किसानों की मौजूदगी ने यह भी स्पष्ट किया कि अफीम खेती से जुड़े लाइसेंस और प्रशासनिक मामलों में किसानों को नियमित मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
किसानों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी अधिकारियों के सामने रखे।
विभाग की ओर से कहा गया कि भविष्य में भी Opium Farmers के साथ संवाद जारी रखा जाएगा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जनसुनवाई जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
चित्तौड़गढ़ में आयोजित यह शिविर किसानों और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नियमित जनसुनवाई शुरू होने से किसानों को न केवल अपनी शिकायत दर्ज कराने का आसान माध्यम मिलेगा, बल्कि विभागीय प्रक्रिया को समझने और समय पर समाधान पाने में भी मदद मिल सकेगी।
चित्तौड़गढ़ से गोपाल चतुर्वेदी की रिपोर्ट




