Rajasthan Zonal Plan: राजस्थान में शहरों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन शहर के अलग-अलग इलाकों में सड़क, पार्क, स्कूल, अस्पताल, बाजार और दूसरी सुविधाएं आखिर कहां विकसित होंगी, इसकी विस्तृत योजना कई जगह अब भी अधूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 309 शहरी निकायों में करीब 33 शहरों में ही जोनल डेवलपमेंट प्लान लागू हो पाए हैं। बाकी बड़ी संख्या में शहर बिना विस्तृत जोनल प्लान के आगे बढ़ रहे हैं।
राजस्थान सरकार की 2025-26 की Economic Review भी प्रदेश में 309 municipal towns का उल्लेख करती है। इसमें बताया गया है कि इनमें से 194 शहरों के master plans तैयार होकर सरकार से मंजूर हो चुके हैं। यानी master planning का दायरा बढ़ा है, लेकिन master plan को जमीन पर बारीकी से लागू करने वाली zonal planning अभी सभी शहरों तक नहीं पहुंची है।
Rajasthan Zonal Plan आखिर क्यों है जरूरी?
किसी शहर के लिए Master Development Plan बड़े स्तर पर यह तय करता है कि अगले 20 से 25 वर्षों में शहर किस दिशा में बढ़ेगा और आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक तथा दूसरी गतिविधियों के लिए कौन से क्षेत्र होंगे।
लेकिन Rajasthan Zonal Plan जैसे zonal development plans इस बड़े खाके को छोटे इलाकों के स्तर पर विस्तार देते हैं।
इसमें यह तय किया जा सकता है कि किसी विशेष zone में:
- प्रमुख और अंदरूनी सड़कें कहां होंगी
- पार्क और खुले क्षेत्र के लिए जमीन कहां आरक्षित होगी
- स्कूल और अस्पताल कहां विकसित होंगे
- आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र कैसे व्यवस्थित होंगे
- बाजार और commercial centres कहां होंगे
- पानी, बिजली और sewerage जैसी सुविधाओं की planning कैसे होगी
- सार्वजनिक और सामुदायिक सुविधाओं के लिए कितनी जमीन रखी जाएगी
जयपुर विकास प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर अलग-अलग planning zones के approved Zonal Development Plans उपलब्ध हैं, जो दिखाते हैं कि master plan को zone level पर किस तरह विस्तार दिया जाता है।
Rajasthan Zonal Plan: 309 निकाय, लेकिन करीब 33 में ही जोनल प्लान
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में नवगठित निकायों सहित कुल 309 शहरी निकाय हैं, लेकिन इनमें करीब 33 शहरों में ही Zonal Development Plan लागू हो पाए हैं।
Rajasthan Zonal Plan इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी शहरों में कोई planning नहीं है। कई शहरों में master plans मौजूद हैं और नए शहरों के master plans तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
समस्या यह है कि master plan और individual colony/layout plan के बीच जरूरी मानी जाने वाली zonal planning का स्तर कई जगह पूरा नहीं हो पाया है।
सरकार के Town Planning Department की वेबसाइट पर भी राजस्थान के बड़ी संख्या में शहरों के master plans उपलब्ध हैं।
Rajasthan Zonal Plan में 1 लाख आबादी का क्या नियम?
इस स्थिति की एक प्रमुख वजह कानून में किया गया बदलाव भी है।
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 159 में 2020 के संशोधन के बाद एक लाख से अधिक आबादी वाली नगरपालिका के Master Development Plan में अलग-अलग zones तय कर उनके लिए Zonal Development Plans तैयार करने का framework दिया गया।
वहीं एक लाख से कम आबादी वाले निकायों के मामले में राज्य सरकार को यह अधिकार दिया गया कि वह स्वयं या संबंधित नगरपालिका के प्रस्ताव पर Zonal Development Plan और Sector Plan तैयार करने का फैसला कर सकती है। यानी ऐसे छोटे निकायों में इसे स्वतः अनिवार्य नहीं रखा गया।
इसी कानूनी व्यवस्था के कारण कम आबादी वाले कई शहरों में zonal planning स्थानीय निकाय या राज्य सरकार की पहल पर निर्भर हो जाती है।
राजस्थान Urban Improvement Act में भी 2020 में किए गए संशोधन में एक लाख से कम आबादी वाले urban areas के लिए zonal development plan को mandatory नहीं रखा गया था।
2021 में बनाए गए Zonal Development Plan Rules
राज्य सरकार ने सितंबर 2021 में Rajasthan Municipalities (Zonal Development Plan) Rules, 2021 भी लागू किए।
इन नियमों में draft zonal development plan तैयार करने, उसे प्रकाशित करने और approval process से जुड़ी व्यवस्था तय की गई।
इसके बावजूद सभी urban bodies में ऐसे plans तैयार नहीं हो पाए हैं।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि तेजी से फैल रहे छोटे और मध्यम शहरों में population threshold के कारण detailed planning को लंबे समय तक टालना भविष्य में urban infrastructure पर अतिरिक्त दबाव तो नहीं बनाएगा।
Rajasthan Zonal Plan: जोनल प्लान नहीं होने पर क्या परेशानी हो सकती है?
Rajasthan Zonal Plan नहीं होने का सबसे बड़ा असर किसी शहर के विस्तार के दौरान दिखाई दे सकता है।
अगर नई colonies और commercial areas पहले विकसित हो जाएं और detailed infrastructure planning बाद में की जाए तो भविष्य में सुविधाओं के लिए जमीन निकालना मुश्किल हो सकता है।
उदाहरण के लिए किसी इलाके में बड़ी आबादी बसने के बाद अगर 60 या 80 फीट की सड़क की जरूरत महसूस हो, तो सड़क चौड़ी करने के लिए निर्माण हटाने या जमीन acquisition जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
इसी तरह बाद में park, school, hospital, fire station, community centre या parking के लिए पर्याप्त जमीन तलाशना मुश्किल हो सकता है।
जोधपुर के आधिकारिक Zonal Development Plan में भी zonal planning को master plan और layout planning के बीच की कड़ी बताया गया है। इसमें road network, social infrastructure, health और educational facilities जैसी जरूरतों की zone-level planning शामिल है।
Rajasthan Zonal Plan: पहले कॉलोनियां, बाद में सुविधाएं की स्थिति
जिन शहरों में विस्तृत zonal planning नहीं है, वहां विकास केवल अलग-अलग layout approvals के आधार पर आगे बढ़ने का खतरा रहता है।
ऐसे में एक colony अपने स्तर पर ठीक दिख सकती है, लेकिन कई colonies के एक साथ विकसित होने के बाद पूरे इलाके के लिए जरूरी main road, drainage network, hospital, school या बड़े park के लिए जगह कम पड़ सकती है।
यही वजह है कि town planning experts master plan के साथ-साथ zonal development plan को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
Master Plan और Zonal Plan में क्या अंतर है?
Master Plan पूरे शहर या urban region की बड़ी तस्वीर बताता है।
मसलन शहर का residential development किस दिशा में बढ़ेगा, industrial area कहां होगा और प्रमुख transport corridors किस तरफ होंगे।
इसके मुकाबले Zonal Development Plan ज्यादा detailed होता है। शहर को अलग-अलग zones में बांटकर हर zone के लिए land use, roads, public facilities और infrastructure की जरूरत तय की जाती है।
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 159 भी Master Development Plan को public utilities, roads, housing, medical और educational facilities, commercial centres, open spaces और दूसरे land uses की planning से जोड़ती है।
Rajasthan Zonal Plan: नवगठित शहरों में भी चुनौती
नगरीय विकास और स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर कई नए और विस्तारित urban areas के master plans तैयार किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इनमें भी फिलहाल zonal plan को हर निकाय के लिए अनिवार्य रूप से साथ तैयार करने की व्यवस्था नहीं है। विभागीय स्तर पर तर्क दिया जा रहा है कि जरूरत के मुताबिक संबंधित local body या urban improvement authority आगे zonal plan तैयार कर सकती है।
लेकिन urban planning experts के नजरिए से समस्या यह है कि अगर detailed planning शहर बसने के बाद शुरू होगी, तो implementation ज्यादा मुश्किल और महंगा हो सकता है।
Rajasthan Zonal Plan की बड़ी बातें
- राजस्थान में कुल 309 urban local bodies हैं।
- रिपोर्ट के मुताबिक करीब 33 शहरों में ही zonal plans लागू हैं।
- इसका अर्थ है कि करीब 276 निकायों में ऐसी detailed zonal planning लागू नहीं है।
- राज्य की Economic Review के मुताबिक 309 municipal towns में से 194 के master plans तैयार और approved हैं।
- Zonal plan master plan और layout plan के बीच detailed planning layer का काम करता है।
- इसमें roads, parks, schools, hospitals, markets और public facilities के लिए land planning की जाती है।
- 2020 के संशोधन में एक लाख से अधिक आबादी वाली municipalities के लिए zonal framework जोड़ा गया।
- एक लाख से कम आबादी वाले निकायों के लिए राज्य सरकार जरूरत के अनुसार zonal और sector plan तैयार करने का फैसला कर सकती है।
- 2021 में Rajasthan Municipalities (Zonal Development Plan) Rules भी लागू किए गए।
भविष्य की planning के लिए क्यों अहम है मुद्दा?
Rajasthan Zonal Plan का मुद्दा केवल नक्शे तैयार करने तक सीमित नहीं है। तेजी से बढ़ती आबादी और expanding urban boundaries के बीच आज की planning ही तय करेगी कि आने वाले वर्षों में किसी शहर में traffic, parks, schools, hospitals और basic infrastructure के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी या नहीं।
Master Plan शहर को दिशा देता है, लेकिन उस दिशा को जमीन पर व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए zone-level planning महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे में राजस्थान के उन शहरों के लिए भी detailed zonal planning पर जोर बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा हो रही है, जहां फिलहाल इसे अनिवार्य नहीं किया गया है।
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