Cyclone Naming Explained: बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में जब भी कोई शक्तिशाली चक्रवात बनता है तो उसके साथ Arnab, Gulab, Biparjoy, Amphan या Remal जैसा कोई नाम चर्चा में आ जाता है। लेकिन ये नाम तूफान बनने के बाद अचानक तय नहीं किए जाते। इसके लिए वर्षों पहले सदस्य देशों की ओर से तैयार की गई सूची मौजूद होती है और उसी निश्चित क्रम में नाम इस्तेमाल किए जाते हैं।
सितंबर 2026 में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने एक सिस्टम के दौरान ‘Arnab’ नाम काफी चर्चा में रहा। हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने उस सिस्टम को Deep Depression के रूप में वर्गीकृत किया और उसके Cyclonic Storm बनने का पूर्वानुमान नहीं दिया था। इसलिए उसका आधिकारिक नाम Arnab नहीं रखा गया।
Cyclone Naming Explained: आखिर नाम तय कौन करता है?
उत्तरी हिंद महासागर यानी Bay of Bengal और Arabian Sea में बनने वाले चक्रवातों के नाम WMO/ESCAP Panel on Tropical Cyclones की व्यवस्था के तहत तय होते हैं।
इस पैनल में वर्तमान में 13 देश शामिल हैं—बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।
हर देश ने पहले से नाम सुझाए हुए हैं। इन नामों को सूची में निश्चित क्रम से लगाया गया है। जब कोई समुद्री सिस्टम Cyclonic Storm की निर्धारित तीव्रता तक पहुंचता है, तब नई दिल्ली स्थित RSMC उस सूची में अगला उपलब्ध नाम जारी करता है।
169 नाम पहले से हैं तैयार
Cyclone Naming Explained में सबसे दिलचस्प बात यह है कि आने वाले कई वर्षों के तूफानों के नाम पहले से तय हैं।
वर्ष 2020 में 13 सदस्य देशों ने 13-13 नाम सुझाए थे। इस तरह कुल 169 नामों की नई सूची बनाई गई। इससे पहले केवल आठ सदस्य देश इस व्यवस्था में शामिल थे। बाद में ईरान, कतर, सऊदी अरब, UAE और यमन जुड़े।
नामों को column-wise क्रम में इस्तेमाल किया जाता है। यानी किसी देश के सभी नाम एक साथ इस्तेमाल नहीं होते, बल्कि पहले अलग-अलग देशों का एक-एक नाम क्रम से आता है और फिर अगला column शुरू होता है।
एक बार इस्तेमाल हो चुका नाम North Indian Ocean की मौजूदा व्यवस्था में दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता।
Arnab नाम किस देश ने दिया?
मौजूदा आधिकारिक सूची में Arnab नाम बांग्लादेश ने सुझाया है। यह तीसरे column में बांग्लादेश का नाम है।
इससे पहले Bangladesh ने इसी सूची में Nisarga और Biparjoy दिए थे। Arnab के बाद सूची में अगला नाम Murasu है, जिसे भारत ने सुझाया है। इसके बाद क्रमशः Iran का Akvan, Maldives का Kaani और Myanmar का Ngamann आता है।
साल 2025 में Shakhti, Montha, Senyar और Ditwah नाम इस्तेमाल हो चुके थे। IMD की वार्षिक रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। इसी वजह से सितंबर 2026 तक अगला उपलब्ध नाम Arnab था।
फिर सितंबर वाला सिस्टम Cyclone Arnab क्यों नहीं बना?
किसी Depression या Deep Depression को केवल इसलिए नाम नहीं दिया जाता क्योंकि अगला नाम तैयार है।
IMD के वर्गीकरण में Tropical Cyclone या Cyclonic Storm की श्रेणी के लिए sustained wind speed कम से कम 34 knots, यानी लगभग 62 kmph, तक पहुंचनी चाहिए।
सितंबर 2026 में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना सिस्टम Deep Depression तक पहुंचा, लेकिन IMD ने उसे Cyclonic Storm में बदलने का पूर्वानुमान नहीं दिया। इसलिए सोशल मीडिया और मीडिया में ‘Arnab’ की चर्चा होने के बावजूद IMD ने आधिकारिक तौर पर यह नाम जारी नहीं किया।
अगला सिस्टम अगर आवश्यक Cyclonic Storm intensity तक पहुंचता है तो मौजूदा क्रम के अनुसार उसे Arnab नाम मिल सकता है।
Gulab, Biparjoy और Amphan नाम किसने दिए?
Cyclone Naming Explained में पुराने चर्चित नामों की कहानी भी दिलचस्प है।
Gulab नाम पाकिस्तान की ओर से दिया गया था। यह 2020 में जारी मौजूदा सूची के पहले column में पाकिस्तान का नाम था।
Biparjoy नाम बांग्लादेश ने दिया था। इसका अर्थ ‘विपत्ति’ या ‘आपदा’ से जुड़ा बताया जाता है। जून 2023 में अरब सागर में बने चक्रवात को यही नाम दिया गया था।
वहीं Amphan मौजूदा 169 नामों वाली सूची का हिस्सा नहीं था। यह 2004 से इस्तेमाल की जा रही पुरानी सूची का आखिरी नाम था और इसे Thailand ने सुझाया था। मई 2020 में Super Cyclonic Storm Amphan के साथ पुरानी सूची समाप्त हो गई।
इसके बाद नई 169 नामों वाली सूची का पहला नाम Nisarga इस्तेमाल किया गया।
भारत की क्या भूमिका है?
चक्रवात का हर नाम भारत अकेले तय नहीं करता। नाम 13 सदस्य देशों की ओर से पहले ही सुझाए जा चुके होते हैं।
भारत की महत्वपूर्ण भूमिका इसलिए है क्योंकि RSMC New Delhi, जो IMD का हिस्सा है, Bay of Bengal और Arabian Sea के tropical cyclones की निगरानी करता है और निर्धारित intensity पर पहुंचने के बाद सूची से आधिकारिक नाम जारी करता है।
RSMC New Delhi इन सदस्य देशों को cyclone track, intensity, storm surge और संभावित खतरे से संबंधित advisories भी जारी करता है।
चक्रवात के नाम रखने के क्या नियम हैं?
Cyclone Naming Explained के तहत कोई भी नाम सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। WMO/ESCAP ने इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं।
नाम राजनीति या किसी राजनीतिक व्यक्ति, धर्म, संस्कृति और gender के प्रति पक्षपाती नहीं होना चाहिए। ऐसा नाम नहीं चुना जा सकता जो किसी समुदाय की भावनाओं को चोट पहुंचाए या अपमानजनक हो।
नाम छोटा और आसानी से बोला जाने वाला होना चाहिए। उसकी अधिकतम लंबाई आठ अक्षर रखी गई है और उसके साथ pronunciation भी देना होता है।
Cyclones को नाम देना जरूरी क्यों है?
चक्रवातों को नाम देने का मुख्य उद्देश्य communication को आसान और स्पष्ट बनाना है।
एक ही समय में अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में एक से ज्यादा सिस्टम सक्रिय हो सकते हैं। केवल “Cyclonic Storm” या “Severe Cyclonic Storm” कहने पर आम लोगों, प्रशासन और मीडिया के बीच भ्रम हो सकता है।
WMO के मुताबिक नाम से किसी cyclone की पहचान करना, उसके विकास पर नजर रखना, चेतावनी को याद रखना और disaster-management information को तेजी से लोगों तक पहुंचाना आसान होता है।
क्या खतरनाक चक्रवात का नाम दोबारा इस्तेमाल होता है?
North Indian Ocean में इसका जवाब सीधा है—नहीं।
दुनिया के कुछ दूसरे cyclone basins में बेहद विनाशकारी तूफानों के नाम formally retire किए जाते हैं। लेकिन Bay of Bengal और Arabian Sea के लिए बनाई गई मौजूदा WMO/ESCAP सूची को केवल एक बार इस्तेमाल करने का नियम है।
इसलिए Amphan, Gulab, Biparjoy, Remal, Shakhti या Montha जैसे इस्तेमाल हो चुके नाम भविष्य में इसी क्षेत्र के किसी नए cyclone को दोबारा नहीं दिए जाएंगे।
अगला चक्रवात किस नाम से जाना जाएगा?
सितंबर 2026 के Deep Depression को कोई नाम नहीं मिलने के कारण अगला उपलब्ध नाम Arnab है। अगर Bay of Bengal या Arabian Sea में बनने वाला अगला weather system Cyclonic Storm की निर्धारित तीव्रता तक पहुंचता है तो RSMC New Delhi मौजूदा क्रम के अनुसार Arnab नाम जारी कर सकता है।
Arnab के इस्तेमाल के बाद अगला नाम Murasu, फिर Akvan, Kaani, Ngamann, Sail, Sahab और Lulu जैसे नाम क्रम से आएंगे।
यानी अगली बार जब किसी समुद्री तूफान के संभावित नाम की चर्चा हो तो यह याद रखना जरूरी है कि नाम पहले से तैयार जरूर रहता है, लेकिन वह आधिकारिक तभी बनता है जब IMD/RSMC New Delhi सिस्टम को Cyclonic Storm घोषित कर दे।
Special Story by Richa Jangam
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