ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 28 जुलाई दोपहर तक भारत ने दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य सहित कुल 10 पदक जीत लिए। छह पदक अकेले वेटलिफ्टिंग से आए हैं, जबकि पैरा खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भारतीय अभियान को नई मजबूती दी है।
ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का पदक अभियान लगातार रफ्तार पकड़ रहा है। 28 जुलाई को दोपहर करीब तीन बजे तक भारत के खाते में दो गोल्ड, पांच सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज सहित कुल 10 पदक दर्ज हो चुके थे। भारत इस प्रदर्शन के साथ पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया। आधिकारिक पदक तालिका में देशों की रैंकिंग कुल पदकों के बजाय पहले स्वर्ण, फिर रजत और उसके बाद कांस्य पदकों की संख्या के आधार पर तय होती है।
भारत के इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता वेटलिफ्टिंग का दबदबा है। अब तक मिले 10 में से छह पदक इसी खेल से आए हैं। यानी भारत के कुल पदकों में वेटलिफ्टिंग की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। दूसरी ओर, पैरा एथलेटिक्स ने दो पदक दिए हैं, जबकि एथलेटिक्स और पैरा पावरलिफ्टिंग से एक-एक पदक आया है।
भारत की अब तक की मेडल टैली
| पदक | खिलाड़ी | स्पर्धा |
|---|---|---|
| गोल्ड | मीराबाई चानू | वेटलिफ्टिंग, महिला 48 किग्रा |
| गोल्ड | शर्मिला ढांकर | पैरा एथलेटिक्स, महिला शॉट पुट F57 |
| सिल्वर | ऋषिकांत सिंह | वेटलिफ्टिंग, पुरुष 60 किग्रा |
| सिल्वर | मुथुपांडी राजा | वेटलिफ्टिंग, पुरुष 65 किग्रा |
| सिल्वर | ज्ञानेश्वरी यादव | वेटलिफ्टिंग, महिला 53 किग्रा |
| सिल्वर | सर्वेश कुशारे | एथलेटिक्स, पुरुष हाई जंप |
| सिल्वर | वल्लुरी अजय बाबू | वेटलिफ्टिंग, पुरुष 79 किग्रा |
| ब्रॉन्ज | झंडू कुमार | पैरा पावरलिफ्टिंग, पुरुष हेवीवेट |
| ब्रॉन्ज | बिंदियारानी देवी | वेटलिफ्टिंग, महिला 58 किग्रा |
| ब्रॉन्ज | शिल्पा के. शायला | पैरा एथलेटिक्स, महिला शॉट पुट F57 |
भारत के सभी 10 पदक विजेताओं की यह सूची ग्लासगो 2026 की आधिकारिक टीम प्रोफाइल और ओलंपिक्स डॉट कॉम की पदक तालिका से मेल खाती है।
मीराबाई चानू ने फिर साबित किया अपना दबदबा
भारत का पहला स्वर्ण पदक स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिला 48 किग्रा वर्ग में जीता। उन्होंने स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 105 किग्रा सहित कुल 190 किग्रा वजन उठाया। मीराबाई ने स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वजन—तीनों में नए गेम्स रिकॉर्ड बनाए।
यह मीराबाई का लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड है। उन्होंने इससे पहले गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में भी स्वर्ण पदक जीता था। वर्ष 2014 में ग्लासगो में रजत जीतने वाली मीराबाई के नाम अब चार कॉमनवेल्थ गेम्स पदक हो गए हैं। ग्लासगो में वह दूसरे स्थान पर रहीं नाइजीरिया की खिलाड़ी से 22 किग्रा आगे थीं, जो उनके एकतरफा दबदबे को दिखाता है।
मीराबाई की जीत का महत्व केवल एक गोल्ड तक सीमित नहीं है। उन्होंने बड़े मंच पर भारतीय वेटलिफ्टिंग अभियान को वह शुरुआती आत्मविश्वास दिया, जिसके बाद अलग-अलग भार वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते।
शर्मिला ढांकर का स्वर्ण बना ऐतिहासिक
भारत का दूसरा स्वर्ण पैरा एथलेटिक्स से आया। शर्मिला ढांकर ने महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने कांस्य पदक जीता। इस तरह भारत ने महिला शॉट पुट F57 में दो खिलाड़ियों को पोडियम पर पहुंचाकर डबल मेडल हासिल किया। शिल्पा को एक प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी के अयोग्य घोषित होने के बाद चौथे से तीसरे स्थान पर अपग्रेड किया गया।
यह प्रदर्शन भारतीय पैरा खेलों के लिए विशेष संकेत देता है। भारत का पैरा अभियान अब केवल भागीदारी या चुनिंदा सफलताओं तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि खिलाड़ी एक ही स्पर्धा में एक से अधिक पदक जीतने की क्षमता प्रदर्शित कर रहे हैं।
ऋषिकांत और मुथुपांडी ने मजबूत रखी शुरुआत
पुरुषों के 60 किग्रा वेटलिफ्टिंग वर्ग में ऋषिकांत सिंह ने कुल 264 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 121 किग्रा का भार उठाते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया, जबकि क्लीन एंड जर्क में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 143 किग्रा रहा।
मुथुपांडी राजा ने पुरुष 65 किग्रा वर्ग में 126 किग्रा स्नैच और 160 किग्रा क्लीन एंड जर्क सहित कुल 286 किग्रा वजन उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। इन दोनों पदकों ने मीराबाई के गोल्ड के साथ शुरुआती दिन में ही भारत को वेटलिफ्टिंग में तीन पदक दिला दिए थे।
ज्ञानेश्वरी और बिंदियारानी ने बढ़ाई महिला शक्ति
ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला 53 किग्रा वर्ग का सिल्वर जीता। उन्होंने सभी छह प्रयास सफल करते हुए स्नैच में 88 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा सहित व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ कुल 199 किग्रा वजन उठाया।
महिला 58 किग्रा वर्ग में बिंदियारानी देवी ने 87 किग्रा स्नैच और 112 किग्रा क्लीन एंड जर्क सहित कुल 199 किग्रा के साथ कांस्य पदक जीता। यह उनका लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है। उन्होंने बर्मिंघम 2022 में रजत पदक हासिल किया था।
एक किलोग्राम से गोल्ड चूके अजय बाबू
वल्लुरी अजय बाबू पुरुष 79 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंचे। उन्होंने स्नैच में 149 किग्रा का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 181 किग्रा उठाकर कुल 330 किग्रा का भार दर्ज किया। मलेशिया के मुहम्मद एरी हिदायत ने 331 किग्रा के साथ गोल्ड जीता, जिससे भारतीय खिलाड़ी केवल एक किग्रा पीछे रह गए।
अजय बाबू का रजत पदक बताता है कि भारत केवल हल्के भार वर्गों में ही नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत भारी वर्गों में भी मजबूत चुनौती पेश कर रहा है। स्नैच में रिकॉर्ड बनाने के बाद क्लीन एंड जर्क में मामूली अंतर से स्वर्ण गंवाना निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उनका प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग की बढ़ती गहराई को दिखाता है।
सर्वेश कुशारे ने हाई जंप में रचा इतिहास
एथलेटिक्स में भारत का पहला पदक सर्वेश कुशारे ने पुरुष हाई जंप में दिलाया। उन्होंने 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर सिल्वर मेडल जीता। गोल्ड जीतने वाले जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने भी 2.25 मीटर की छलांग लगाई, लेकिन कम असफल प्रयासों के कारण काउंटबैक में उन्हें पहला स्थान मिला।
सर्वेश पुरुष हाई जंप में कॉमनवेल्थ गेम्स का सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय बने। यह नतीजा महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की पदक सफलता अब वेटलिफ्टिंग से आगे ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भी दिखाई देने लगी है।
झंडू कुमार ने खोला था भारत का खाता
पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ग्लासगो 2026 में भारत के पहले पदक विजेता बने थे। उन्होंने पुरुष हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का खाता खोला। इसके बाद वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स के खिलाड़ियों ने भारतीय अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया।
झंडू का पदक इस मायने में भी अहम है कि ग्लासगो के एकीकृत खेल कार्यक्रम में पैरा खिलाड़ियों का प्रदर्शन भारत की कुल मेडल टैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। भारत के 10 में से तीन पदक पैरा स्पर्धाओं से आए हैं।
भारत की ताकत, लेकिन निर्भरता भी
छह पदकों के साथ वेटलिफ्टिंग अभी भारत का सबसे सफल खेल है। मीराबाई का गोल्ड, चार सिल्वर और बिंदियारानी का ब्रॉन्ज भारतीय वेटलिफ्टिंग व्यवस्था की निरंतरता को दिखाते हैं। भारत ने गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में भी वेटलिफ्टिंग की पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया था।
हालांकि विश्लेषण का दूसरा पक्ष यह है कि कुल पदकों के लिए एक खेल पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भी पैदा करती है। वेटलिफ्टिंग में अभी तक छह पदक आना शानदार है, लेकिन 20 से 25 पदकों की दिशा में बढ़ने के लिए बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, जूडो और अन्य स्पर्धाओं में भी लगातार पोडियम फिनिश जरूरी होंगे।
बर्मिंघम 2022 से सीधी तुलना उचित नहीं
भारत ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में 22 स्वर्ण सहित कुल 61 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया था। हालांकि ग्लासगो 2026 का कार्यक्रम काफी छोटा है। इसमें कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी सहित नौ ऐसे खेल शामिल नहीं हैं, जिनसे भारत को बर्मिंघम में कुल 25 पदक मिले थे।
ग्लासगो में केवल 10 खेलों की 215 स्पर्धाएं आयोजित हो रही हैं, जबकि भारत का दल 122 खिलाड़ियों का है। इसलिए वर्तमान 10 पदकों की तुलना पिछली प्रतियोगिता के अंतिम 61 पदकों से सीधे करना भ्रामक होगा। इस बार सीमित खेल कार्यक्रम में पदक जीतने के अवसर भी कम हैं।
इसी संदर्भ में भारत का शुरुआती प्रदर्शन सकारात्मक माना जा सकता है। देश आठवें स्थान पर है और प्रतियोगिता के कई अहम फाइनल अभी बाकी हैं।
क्या भारत 25 मेडल पार कर सकता है?
भारत के लिए 25 पदकों का आंकड़ा हासिल करना संभव तो है, लेकिन इसके लिए आगामी मुकाबलों में उच्च पदक रूपांतरण दर जरूरी होगी। बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों के कई क्वार्टर फाइनल निर्धारित थे, जहां एक जीत कम से कम कांस्य सुनिश्चित कर सकती है। लवलीना बोरगोहेन भी ड्रॉ के कारण पहले ही पदक की स्थिति में पहुंच चुकी थीं, हालांकि उनका पदक आधिकारिक टैली में मुकाबला पूरा होने के बाद ही जुड़ेगा।
एथलेटिक्स में भी भारत के पास नीरज चोपड़ा, पारुल चौधरी, मुरली श्रीशंकर, गुलवीर सिंह और अन्य खिलाड़ियों के रूप में पदक की उम्मीदें हैं। पूर्व भारतीय एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने छोटे खेल कार्यक्रम के बावजूद करीब 30 पदकों को यथार्थवादी लक्ष्य बताया था।
अभी सफर बाकी है
भारत के पहले 10 पदकों की कहानी में अनुभव और नई प्रतिभा दोनों शामिल हैं। मीराबाई चानू ने लगातार तीसरा स्वर्ण जीतकर अपनी विरासत मजबूत की, शर्मिला ढांकर ने पैरा एथलेटिक्स में नया इतिहास बनाया और सर्वेश कुशारे ने हाई जंप में भारत के लिए नई उपलब्धि दर्ज की।
वेटलिफ्टिंग का प्रदर्शन इस अभियान की रीढ़ है, लेकिन अंतिम मेडल टैली इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत दूसरे खेलों में कितनी तेजी से पदक जोड़ता है। शुरुआत शानदार है, मगर 25 या उससे अधिक पदकों तक पहुंचने के लिए आने वाले दिन अधिक निर्णायक होंगे।




