ग्लासगो में नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के Season Best के साथ रजत पदक जीता। चोट के बाद वापसी कर रहे भारतीय स्टार ने माना कि उनकी फिटनेस और लय में सुधार हुआ है, लेकिन Peak Form हासिल करने में अभी समय लगेगा।
ग्लासगो। भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने Commonwealth Games 2026 में रजत पदक जीतने के बाद कहा कि वह अभी अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस और पुराने प्रतिस्पर्धी स्तर से कुछ दूर हैं। शुक्रवार को Scotstoun Stadium में आयोजित पुरुष Javelin Throw Final में नीरज ने 85.83 मीटर का Season Best दर्ज किया और दूसरे स्थान पर रहे।
श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के शानदार प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। भारत के यशवीर सिंह ने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का Personal Best निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह भारत के दो खिलाड़ी पुरुष जैवलिन थ्रो के पोडियम पर पहुंचे।
चोट से वापसी के बाद बढ़ रही नीरज की लय
मुकाबले के बाद नीरज ने कहा कि उनकी फिटनेस अभी पहले जैसी नहीं हुई है, लेकिन वह प्रत्येक प्रतियोगिता के साथ धीरे-धीरे पुरानी लय हासिल कर रहे हैं। उन्होंने जून में Doha Diamond League से करीब नौ महीने बाद प्रतिस्पर्धी वापसी की थी। पीठ की चोट के कारण उनके 2026 सीजन की शुरुआत में देरी हुई थी।
दोहा में नीरज ने 85.69 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया था और चौथे स्थान पर रहे थे। ग्लासगो में उनका प्रदर्शन 14 सेंटीमीटर बेहतर रहा और वह दोबारा किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के पोडियम पर लौटे। यह अंतर दूरी के लिहाज से छोटा है, लेकिन चोट से वापसी के संदर्भ में उनके प्रदर्शन में निरंतर सुधार का संकेत देता है।
नीरज ने कहा कि पूर्ण फिटनेस में खिलाड़ी अधिक आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। चोट के बाद वापसी के दौरान शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालने और हर प्रयास में सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। ग्लासगो में भी उन्होंने कुछ प्रयासों में पूरी ताकत लगाने और कुछ में नियंत्रण बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।
दूसरे प्रयास में आया Season Best
नीरज ने फाइनल की शुरुआत 80.97 मीटर के थ्रो से की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर दूरी हासिल करते हुए कुछ समय के लिए बढ़त बना ली, लेकिन उसी राउंड में पथिरागे ने 89.75 मीटर का थ्रो कर पहला स्थान अपने नाम कर लिया।
नीरज का तीसरा प्रयास 81.29 मीटर और चौथा 80.73 मीटर रहा। अंतिम दो प्रयासों में वह वैध दूरी दर्ज नहीं कर सके। उनका प्रतियोगिता क्रम इस प्रकार रहा:
| प्रयास | दूरी |
|---|---|
| पहला | 80.97 मीटर |
| दूसरा | 85.83 मीटर |
| तीसरा | 81.29 मीटर |
| चौथा | 80.73 मीटर |
| पांचवां | फाउल |
| छठा | फाउल |
दूसरी ओर पथिरागे का 89.75 मीटर वाला प्रयास उनके छह प्रयासों में एकमात्र वैध थ्रो था, लेकिन वही उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। नीरज विजेता से 3.92 मीटर पीछे रहे।
ठंड और तेज हवा बनी चुनौती
ग्लासगो का ठंडा मौसम और तेज Headwind जैवलिन खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती रहा। नीरज ने क्वालिफिकेशन राउंड के बाद भी कहा था कि परिस्थितियां भाला फेंक खिलाड़ियों के अनुकूल नहीं हैं। फाइनल में कई शीर्ष खिलाड़ियों को अपने सामान्य स्तर के अनुरूप लगातार अच्छे प्रयास दर्ज करने में मुश्किल हुई।
नीरज के अनुसार उनका 85.83 मीटर का थ्रो ही तकनीकी रूप से संतोषजनक रहा। अन्य प्रयासों में भाला अपेक्षित दिशा और उड़ान हासिल नहीं कर सका। उन्होंने यह भी माना कि वह गर्म मौसम में अधिक सहज प्रदर्शन करते हैं और ठंड में शरीर को पूरी क्षमता से सक्रिय रखना अपेक्षाकृत मुश्किल होता है।
यह केवल नीरज की व्यक्तिगत समस्या नहीं थी। प्रतियोगिता में पूर्व विश्व चैंपियन Anderson Peters 83.88 मीटर के साथ चौथे और मौजूदा विश्व चैंपियन Keshorn Walcott 82.55 मीटर के साथ छठे स्थान पर रहे। मजबूत अंतरराष्ट्रीय Field के बावजूद केवल पथिरागे ही 89 मीटर से आगे निकल सके।
स्वर्ण का दबाव नहीं, फिटनेस सबसे महत्वपूर्ण
नीरज ने स्पष्ट किया कि उन पर प्रत्येक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने का दबाव नहीं है। उनके लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरी फिटनेस हासिल करना और तकनीकी लय को दोबारा मजबूत करना है।
एक शीर्ष जैवलिन खिलाड़ी के प्रदर्शन में केवल ताकत ही नहीं, बल्कि Run-up की गति, शरीर का संतुलन, Release Angle, Blocking Leg और भाले की दिशा भी महत्वपूर्ण होती है। चोट से वापसी के दौरान इनमें से किसी एक हिस्से में संकोच या गति की कमी अंतिम दूरी को प्रभावित कर सकती है।
ग्लासगो में नीरज का प्रदर्शन बताता है कि उनके पास अब भी 85 मीटर से आगे फेंकने की क्षमता मौजूद है, लेकिन अंतिम चार प्रयासों में सुधार नहीं कर पाना उनकी तकनीकी और शारीरिक लय में बाकी काम की ओर संकेत करता है।
यशवीर सिंह ने अंतिम थ्रो में जीता कांस्य
भारत के लिए फाइनल की दूसरी बड़ी उपलब्धि यशवीर सिंह का कांस्य पदक रहा। यशवीर अपने अंतिम प्रयास से पहले पदक की स्थिति से बाहर थे, लेकिन उन्होंने दबाव में 85.41 मीटर का Personal Best निकालकर तीसरा स्थान हासिल कर लिया। उनका पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83.72 मीटर था।
तीसरे भारतीय खिलाड़ी रोहित यादव ने 81.56 मीटर के साथ सातवां स्थान हासिल किया। भारत के तीनों खिलाड़ी अंतिम आठ में पहुंचे और दो खिलाड़ियों ने पदक जीते, जो भारतीय जैवलिन की बढ़ती गहराई को दर्शाता है।
अरशद नदीम नौवें स्थान पर रहे
पाकिस्तान के अरशद नदीम प्रतियोगिता में अपने खिताब का बचाव नहीं कर सके। वह 77.41 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ नौवें स्थान पर रहे और शुरुआती तीन राउंड के बाद अंतिम आठ में जगह नहीं बना पाए।
नीरज, पथिरागे, Anderson Peters, Keshorn Walcott और अरशद जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण यह Commonwealth Games के सबसे मजबूत पुरुष जैवलिन फाइनल में से एक माना जा रहा था।
नीरज का दूसरा Commonwealth Games पदक
यह नीरज चोपड़ा का दूसरा Commonwealth Games पदक है। उन्होंने Gold Coast 2018 में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि चोट के कारण Birmingham 2022 में हिस्सा नहीं ले पाए थे। ग्लासगो का रजत उनके लंबे Injury Rehabilitation के बाद किसी बड़े Multi-Sport Event में पहला पदक है।
नीरज का भारतीय National Record 90.23 मीटर है, जो उन्होंने 2025 Doha Diamond League में बनाया था। ग्लासगो में उनका 85.83 मीटर का प्रदर्शन इस रिकॉर्ड से काफी पीछे रहा, लेकिन चोट के बाद सीमित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के कारण फिलहाल उनकी प्राथमिकता दूरी से अधिक निरंतरता और फिटनेस दिखाई देती है।
रजत पदक को विफलता मानना सही नहीं
नीरज ने अपने प्रदर्शन से भारत में ऐसी उम्मीदें पैदा की हैं कि स्वर्ण पदक से कम किसी भी नतीजे को निराशा के रूप में देखा जाने लगता है। हालांकि ग्लासगो का परिणाम अलग संदर्भ में समझना जरूरी है।
वह चोट के बाद अपने केवल दूसरे बड़े मुकाबले में उतरे, Season Best फेंका और मजबूत Field में रजत पदक जीता। इसके साथ भारत ने जैवलिन में दो पदक भी हासिल किए। ऐसे में यह नतीजा उनके करियर में गिरावट के बजाय वापसी की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा सकता है।
चिंता का विषय यह है कि नीरज छह में से केवल एक प्रयास में अपनी अपेक्षित सीमा तक पहुंच सके और अंतिम दो प्रयास फाउल रहे। सकारात्मक पक्ष यह है कि पूरी फिटनेस के बिना भी वह 85.83 मीटर तक पहुंचे और पोडियम पर स्थान बनाया।
नीरज ने भी संकेत दिया है कि आने वाली प्रतियोगिताओं में उनका लक्ष्य एक साथ बड़ा सुधार करने के बजाय धीरे-धीरे फिटनेस, तकनीक और आत्मविश्वास को बेहतर बनाना होगा।




