Nepal Tunnel Rescue: विनाशकारी बाढ़ के करीब एक सप्ताह बाद भी नेपाल के त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की भूमिगत सुरंग और पावरहाउस में फंसे करीब 40 कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। परिवारों का इंतजार अब नाराजगी में बदल रहा है। अपने इंजीनियर पति के सुरंग में फंसे होने की बात कहने वाली नारायणी जोशी ने नेपाल सरकार से सवाल किया कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद बचाव अभियान को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
जोशी के मुताबिक उनके पति समेत नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) के करीब 40 कर्मचारी त्रिशूली-3A में थे। परिवार इस उम्मीद पर टिके हैं कि underground powerhouse का मजबूत ढांचा कर्मचारियों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।
Nepal Tunnel Rescue पर पत्नी ने उठाए सवाल
छह दिन तक पति का कोई पता नहीं चलने पर नारायणी जोशी ने सरकारी व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि परिवार लगातार Army Headquarters से लेकर सरकारी एजेंसियों तक जानकारी मांग रहे हैं।
उनका आरोप था कि परिवारों को बार-बार भारतीय और चीनी विशेषज्ञ टीमों के पहुंचने की जानकारी मिलती रही, लेकिन शुरुआती दिनों में मौके पर पर्याप्त heavy machinery नहीं पहुंची। उन्होंने पूछा कि 40 परिवारों से जुड़े इस मामले में रेस्क्यू इतनी धीमी गति से क्यों आगे बढ़ा।
हालांकि बाद की रिपोर्टों से साफ है कि बचाव अभियान आगे बढ़ा है और मौके पर excavators, drilling equipment तथा विशेषज्ञ टीमें काम कर रही हैं। इसलिए परिवार की “JCB तक नहीं पहुंची” वाली टिप्पणी को बचाव अभियान के शुरुआती चरण की स्थिति और उनका आरोप माना जाना चाहिए।

Nepal Tunnel Rescue: ‘देश के काम के लिए गए थे’
Nepal Tunnel Rescue, इंजीनियर की पत्नी ने कहा कि उनके पति निजी काम से वहां नहीं गए थे, बल्कि राष्ट्रीय परियोजना में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
उनका सवाल था कि ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को सुरक्षित निकालना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में क्यों नहीं होना चाहिए। परिवारों का कहना है कि लगातार छह-सात दिनों की अनिश्चितता ने उनकी मानसिक स्थिति पर भी गंभीर असर डाला है। कुछ परिजनों के अस्पताल पहुंचने की बात भी सामने आई है।
सुरंग तक पहुंचने में क्या आ रही मुश्किल?
Nepal Tunnel Rescue की सबसे बड़ी चुनौती भारी मात्रा में जमा मिट्टी, पानी और विशाल चट्टानें हैं।
त्रिशूली-3A का underground powerhouse उस हिस्से से करीब 183 मीटर अंदर बताया गया है जहां से rescuers रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 31 अगस्त तक cable access tunnel का पता लगाया जा चुका था, लेकिन उसमें पानी और कीचड़ भरा होने की वजह से टीम अंदर नहीं जा सकी।
बचाव दल ने अलग-अलग जगह drilling कर openings बनाई हैं ताकि अंदर हवा पहुंचाई जा सके और cameras के जरिए स्थिति का पता लगाया जा सके। Nepal Army, NEA और tunnel experts इस अभियान में शामिल हैं।
40-42 इंजीनियर अंदर होने की आशंका
जब 26 अगस्त को बाढ़ आई, उस समय 60 MW के Trishuli-3A project का underground powerhouse overhaul के लिए बंद था।
अधिकारियों के मुताबिक उस समय करीब 40 से 42 skilled engineers और technical personnel अंदर काम कर रहे थे। बाढ़ के बाद ऊपर और नीचे के tunnel access मलबे से दब गए।
यही वजह है कि rescue teams cable tunnel के रास्ते underground powerhouse तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
Nepal Tunnel Rescue: उम्मीद अभी क्यों बाकी?
परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद powerhouse का design है। Rescue operation से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि अगर underground powerhouse में बड़ी मात्रा में कीचड़ नहीं घुसा है तो अंदर पर्याप्त space और oxygen होने की संभावना है।
सुरंग से पानी का रिसाव बाहर आते रहने को भी एक सीमित सकारात्मक संकेत माना गया था, क्योंकि यदि कर्मचारी सुरक्षित chamber तक पहुंच पाए हों तो उन्हें पानी उपलब्ध हो सकता है। हालांकि rescuers ने उस समय तक अंदर से किसी व्यक्ति के जीवित होने का प्रत्यक्ष संकेत नहीं पाया था।
हाइड्रोपावर सुरंगों में सैकड़ों की तलाश
Nepal Tunnel Rescue केवल Trishuli-3A तक सीमित नहीं है। नेपाल की कई hydropower projects बाढ़ और मलबे की चपेट में आई हैं।
AP के मुताबिक करीब 900 hydropower workers लापता बताए गए हैं और लगभग 500 के tunnels में फंसे होने की आशंका है। Thermal drones को भी tunnels में भेजा जा रहा है, लेकिन mud और debris के कारण search बेहद मुश्किल है।
Nepal Tunnel Rescue, Reuters की 2 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार hydropower project sites से अब तक 279 लोगों को बचाया गया है, जबकि कम से कम 639 कर्मचारी अभी लापता हैं।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1,000 पार
26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में glacier और rock collapse के बाद आई flash flood ने नेपाल में भारी तबाही मचाई।
2 सितंबर तक Reuters ने नेपाल में कम से कम 1,050 लोगों की मौत और करीब 4,000 लोगों के लापता होने की जानकारी दी। सीमा पार तिब्बत में भी 16 मौतें और 546 लोग लापता बताए गए हैं।
सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और बस्तियां मलबे में दब गई हैं, जिससे कई प्रभावित इलाकों में rescue teams के लिए भारी मशीनें पहुंचाना भी मुश्किल हुआ है।
Nepal Tunnel Rescue की बड़ी बातें
- Trishuli-3A में करीब 40-42 कर्मचारी फंसे होने की आशंका है।
- इनमें अनुभवी इंजीनियर और technical staff शामिल हैं।
- इंजीनियर की पत्नी नारायणी जोशी ने rescue में देरी पर सरकार से सवाल किए।
- परिवार छह दिनों से अपने लोगों के सुरक्षित होने की उम्मीद लगाए हैं।
- Underground powerhouse तक पहुंचने के रास्ते में पानी, कीचड़ और बड़ी चट्टानें बाधा हैं।
- Powerhouse करीब 183 मीटर अंदर बताया गया है।
- Nepal Army, NEA और विदेशी विशेषज्ञ rescue operation में शामिल हैं।
- कई जगह drilling और cameras की मदद ली जा रही है।
- नेपाल में कम से कम 1,050 लोगों की मौत और करीब 4,000 के लापता होने की ताजा रिपोर्ट है।
हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ रही चिंता
Nepal Tunnel Rescue अब समय के खिलाफ लड़ाई बन चुका है। Trishuli-3A में मौजूद कर्मचारियों के परिवार इस उम्मीद में हैं कि मजबूत underground powerhouse ने उन्हें बाढ़ और मलबे से बचाया होगा। दूसरी ओर tunnel में भरे पानी और mud के कारण rescuers का आगे बढ़ना बेहद मुश्किल है।
परिवारों की नाराजगी का मुख्य सवाल यही है—इतनी बड़ी आपदा के बाद सुरंगों में फंसे कर्मचारियों तक specialized machinery और rescue expertise पहुंचाने में इतना वक्त क्यों लगा? फिलहाल अभियान जारी है और trapped workers की स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
Nepal Tunnel Rescue जारी, rescue की ताजा जानकारी के लिए Reuters की Nepal Flood रिपोर्ट और Associated Press की Tunnel Rescue रिपोर्ट देख सकते हैं।
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