Pakistan BRICS Membership: दिल्ली तैयार है, भारत मंडपम तैयार है और दुनिया के बड़े नेताओं के स्वागत की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा तय है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
लेकिन इस पूरी तस्वीर में एक देश अब भी बाहर खड़ा है—पाकिस्तान। चीन उसकी सदस्यता का समर्थन कर चुका है, रूस भी खुलकर उसके पक्ष में बोल चुका है, फिर भी Islamabad की BRICS entry आगे नहीं बढ़ पाई। आखिर ऐसा क्यों?
Pakistan BRICS Membership की कोशिश कब शुरू हुई?
पाकिस्तान ने 23 नवंबर 2023 को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की थी कि उसने BRICS की सदस्यता के लिए formal request दी है। Islamabad का तर्क था कि BRICS विकासशील देशों का महत्वपूर्ण मंच है और पाकिस्तान इसमें शामिल होकर multilateral cooperation को मजबूत कर सकता है।
इसके बाद चीन ने पाकिस्तान की दावेदारी का समर्थन किया। सितंबर 2024 में रूसी उपप्रधानमंत्री Alexei Overchuk ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि रूस पाकिस्तान को BRICS में शामिल किए जाने का समर्थन करेगा।
फिर भी पाकिस्तान आज तक सदस्य नहीं बन पाया।
चीन चाहे तो भी अकेले नहीं दिला सकता एंट्री
Pakistan BRICS Membership की सबसे बड़ी पहेली BRICS के decision-making system में छिपी है—Consensus यानी सर्वसम्मति।
BRICS में भारत के पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसा कोई अलग formal veto नहीं है। लेकिन समूह के फैसले consensus से होते हैं। BRICS की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सदस्यता विस्तार के लिए मौजूदा सदस्य देशों के बीच सहमति जरूरी है।
इसका सीधा मतलब है—चीन पाकिस्तान का समर्थन कर सकता है, रूस उसकी पैरवी कर सकता है, लेकिन बाकी सदस्यों की सहमति के बिना Beijing अकेले Islamabad को BRICS में नहीं ला सकता।
2024 में भी पाकिस्तान की membership application पर समूह के भीतर consensus नहीं बन पाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
Pakistan BRICS Membership: भारत-पाकिस्तान रिश्ते क्यों बन सकते हैं बड़ी बाधा?
BRICS में नए देश के प्रवेश के लिए जिन criteria का उल्लेख किया गया है, उनमें सभी पूर्ण सदस्यों के साथ अच्छे diplomatic relations बनाए रखना भी शामिल है।
यहीं पाकिस्तान के लिए स्थिति मुश्किल हो जाती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में सर्वसम्मति आधारित संगठन में पाकिस्तान की सदस्यता का रास्ता आसान नहीं है।
हालांकि एक बात स्पष्ट रखना जरूरी है—BRICS ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा है कि केवल भारत ने पाकिस्तान की सदस्यता रोक रखी है। उपलब्ध आधिकारिक तथ्य इतना बताते हैं कि पाकिस्तान की दावेदारी पर आवश्यक consensus नहीं बन पाया। इसलिए इसे “भारत का औपचारिक veto” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।
Partner Country की सूची में भी नहीं पाकिस्तान
पाकिस्तान को सिर्फ full membership में ही सफलता नहीं मिली, वह BRICS का Partner Country भी नहीं बन सका।
2024 के Kazan Summit में BRICS ने partner-country category बनाई। आज 10 partner countries हैं—Belarus, Bolivia, Cuba, Kazakhstan, Malaysia, Nigeria, Thailand, Uganda, Uzbekistan और Vietnam। Vietnam जून 2025 में दसवां partner बना था।
पाकिस्तान ने partner status में भी रुचि दिखाई थी, लेकिन अंतिम स्वीकृत सूची में उसे जगह नहीं मिली। BRICS की प्रक्रिया में यहां भी diplomatic relations, geographic balance और consensus जैसे factors महत्वपूर्ण हैं।
Pakistan BRICS Membership: BRICS में अभी कितने देश?
आज BRICS में 11 पूर्ण सदस्य हैं:
Brazil, Russia, India, China, South Africa, Egypt, Ethiopia, Iran, UAE, Saudi Arabia और Indonesia.
इसके अलावा 10 partner countries हैं।
इससे एक बात साफ होती है—पाकिस्तान का मुस्लिम-बहुल देश होना उसकी membership की बाधा नहीं है। Iran, UAE, Saudi Arabia और Egypt पहले ही full members हैं।
मुद्दा ज्यादा गहरा है—consensus, diplomatic acceptability और दूसरे सदस्यों के साथ संबंध।

Pakistan BRICS Membership क्यों चाहता है Islamabad?
पाकिस्तान के लिए BRICS केवल एक diplomatic club नहीं है। वह खुद को Global South और बड़ी emerging economies के साथ जोड़ना चाहता है।
BRICS membership से Islamabad को चीन और रूस के साथ multilateral platform पर ज्यादा राजनीतिक space, New Development Bank जैसे संस्थागत ढांचे से जुड़ने की संभावना और व्यापार तथा investment संबंधों को विस्तार देने का अवसर मिल सकता है।
Pakistan BRICS Membership, इसीलिए पाकिस्तान लगातार अपनी दावेदारी आगे बढ़ाता रहा है।
Pakistan BRICS Membership: IMF कार्यक्रम भी चर्चा में
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति भी उसकी वैश्विक दावेदारी पर चर्चा का हिस्सा बनती रही है। मई 2026 में IMF ने Pakistan के Extended Fund Facility की तीसरी review पूरी कर लगभग $1.1 billion और Resilience and Sustainability Facility के तहत करीब $220 million जारी करने की मंजूरी दी।
31 अगस्त 2026 तक IMF रिकॉर्ड में पाकिस्तान की outstanding purchases and loans करीब 8.03 billion SDR थीं।
लेकिन कमजोर अर्थव्यवस्था को पाकिस्तान की BRICS entry रोकने की कोई आधिकारिक अकेली वजह नहीं बताया गया है। इसलिए IMF dependence को membership rejection का स्थापित कारण नहीं माना जा सकता।
Pakistan BRICS Membership की बड़ी बातें
- पाकिस्तान ने नवंबर 2023 में BRICS membership के लिए आवेदन किया।
- चीन पाकिस्तान की दावेदारी का समर्थक रहा है।
- रूस ने सितंबर 2024 में भी पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन किया।
- BRICS फैसले consensus से करता है।
- भारत के पास अलग formal veto नहीं, लेकिन उसकी सहमति भी महत्वपूर्ण है।
- BRICS ने पाकिस्तान को बाहर रखने की कोई एक आधिकारिक वजह घोषित नहीं की है।
- पाकिस्तान अभी full member या partner country—किसी सूची में शामिल नहीं है।
- BRICS में फिलहाल 11 members और 10 partners हैं।
चीन की दोस्ती के बावजूद रास्ता आसान नहीं
कुल मिलाकर Pakistan BRICS Membership का मामला यही दिखाता है कि किसी multilateral grouping में केवल एक या दो शक्तिशाली देशों का समर्थन पर्याप्त नहीं होता।
चीन Islamabad का करीबी रणनीतिक साझेदार है और रूस भी उसकी दावेदारी का समर्थन कर चुका है, लेकिन BRICS consensus पर चलता है। जब तक पाकिस्तान समूह के सभी मौजूदा सदस्यों के बीच पर्याप्त राजनीतिक और कूटनीतिक स्वीकार्यता नहीं बनाता, तब तक उसकी entry मुश्किल बनी रह सकती है।
Pakistan BRICS Membership, इसलिए दिल्ली BRICS Summit की तस्वीर पाकिस्तान के लिए दिलचस्प होगी—चीन अंदर, रूस अंदर, Iran, UAE और Saudi Arabia भी अंदर… लेकिन Islamabad अब भी membership का इंतजार कर रहा है।
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