महिला 54 किग्रा बॉक्सिंग फाइनल में प्रीति ने तीनों राउंड में दबदबा बनाए रखा। यह ग्लासगो खेलों में भारतीय बॉक्सिंग का पहला और उस समय देश का छठा स्वर्ण पदक था।
ग्लासगो। भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने Commonwealth Games 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 54 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया है। प्रीति ने शनिवार को खेले गए फाइनल में कनाडा की स्कारलेट सवाना डेलगाडो को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से पराजित किया। यह प्रीति का पहला Commonwealth Games पदक भी है।
प्रीति के स्वर्ण पदक के साथ भारत के गोल्ड मेडल की संख्या छह हो गई थी। हालांकि कुछ ही मिनट बाद जैसमीन लांबोरिया ने महिला 57 किग्रा वर्ग का फाइनल जीतकर भारत को सातवां स्वर्ण दिला दिया। इसलिए प्रीति की जीत को भारत के छठे गोल्ड और ग्लासगो में भारतीय बॉक्सिंग के पहले गोल्ड के रूप में दर्ज किया जाएगा।
तीनों राउंड में प्रीति का दबदबा
प्रीति पवार ने फाइनल की शुरुआत से ही अपनी गति, सटीक पंच और मजबूत Footwork के दम पर मुकाबले पर नियंत्रण बना लिया। कनाडा की मुक्केबाज ने शुरुआती क्षणों में आगे बढ़कर हमला करने का प्रयास किया, लेकिन प्रीति ने संयम बनाए रखते हुए Counter-Punching से जवाब दिया।
भारतीय मुक्केबाज ने पहला राउंड सभी पांच जजों के फैसले से अपने नाम किया। दूसरे राउंड में भी उन्होंने डेलगाडो को दूरी बनाकर खेलने पर मजबूर किया और प्रभावी Combinations लगाते हुए बढ़त मजबूत कर ली। अंतिम राउंड में कनाडाई खिलाड़ी ने वापसी का प्रयास किया, लेकिन प्रीति की रक्षा और Ring Movement के सामने वह निर्णायक पंच नहीं लगा सकीं। सभी पांच जजों ने अंतिम फैसला भी प्रीति के पक्ष में दिया।
फाइनल का परिणाम
| मुक्केबाज | देश | परिणाम |
|---|---|---|
| प्रीति पवार | भारत | 5-0 से जीत |
| स्कारलेट डेलगाडो | कनाडा | रजत पदक |
ग्लासगो में भारतीय बॉक्सिंग का पहला गोल्ड
Commonwealth Games 2026 में भारत के 10 मुक्केबाज अपने-अपने वर्ग के फाइनल में पहुंचे हैं, जो इन खेलों में भारतीय बॉक्सिंग का अब तक का सबसे मजबूत अभियान है। प्रीति इस अभियान में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बनीं।
ग्लासगो से पहले भारत ने Commonwealth Games बॉक्सिंग में कुल 44 पदक जीते थे, जिनमें 11 स्वर्ण शामिल थे। प्रीति की जीत ने भारतीय महिला बॉक्सिंग की नई पीढ़ी को इस सूची में जोड़ दिया।
फाइनल तक अजेय रहीं प्रीति
प्रीति ने पूरे टूर्नामेंट में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। महिला 54 किग्रा वर्ग के शुरुआती मुकाबले में उन्होंने मलावी की डेबोराह म्तेनजे को दूसरे राउंड में Referee Stopped Contest के जरिए हराया।
क्वार्टर फाइनल में उनका सामना उत्तरी आयरलैंड की निकोल क्लाइड से हुआ। प्रीति ने शुरुआत से दबाव बनाते हुए क्लाइड को दो बार Standing Count लेने पर मजबूर किया और मुकाबला 5-0 से जीता। इस जीत के साथ उनका पदक सुनिश्चित हो गया था।
सेमीफाइनल में प्रीति ने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को भी 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराया। उन्होंने तेज Footwork, सटीक Counter-Punching और Left-Right Combinations के जरिए मुकाबले को एकतरफा बनाया था।
प्रीति का CWG 2026 अभियान
- Round of 16: डेबोराह म्तेनजे को RSC से हराया
- Quarter-final: निकोल क्लाइड को 5-0 से हराया
- Semi-final: कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराया
- Final: स्कारलेट डेलगाडो को 5-0 से हराया
पहली बार Commonwealth Games में उतरीं, सीधे गोल्ड जीता
प्रीति पवार का यह पहला Commonwealth Games था। प्रतियोगिता से पहले उन्होंने कहा था कि इतने बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सम्मान की बात है और वह पूरी तैयारी के साथ स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य से ग्लासगो पहुंची हैं।
प्रीति ने अपने पहले ही Commonwealth Games में बिना कोई मुकाबला गंवाए स्वर्ण पदक जीतकर उम्मीदों को सही साबित किया। विशेष बात यह रही कि क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल—तीनों मुकाबलों में सभी पांच जजों ने उन्हें विजेता चुना।
2026 सीजन में लगातार बड़ी सफलता
प्रीति Glasgow Games में आने से पहले अप्रैल 2026 में Asian Elite Championship भी जीत चुकी थीं। Commonwealth Sport ने उन्हें प्रतियोगिता शुरू होने से पहले भारत की सबसे प्रमुख पदक उम्मीदों में शामिल किया था।
वह Asian Games की कांस्य पदक विजेता भी हैं और महिला 54 किग्रा वर्ग में विश्व स्तर पर भारत की मजबूत चुनौती बनकर उभरी हैं। ग्लासगो में उनका प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वह बड़े मुकाबलों में दबाव संभालने और लगातार आक्रामक प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
भारतीय सेना में भी रचा इतिहास
खेल के साथ प्रीति पवार भारतीय सेना का भी हिस्सा हैं। Commonwealth Sport के अनुसार वह भारतीय सेना में सीधे Junior Commissioned Officer के रूप में नियुक्त होने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं और उन्हें Naib Subedar का पद दिया गया।
उनकी उपलब्धि खेल और सैन्य सेवा दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। ग्लासगो का स्वर्ण पदक उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
डेलगाडो को नहीं दिया वापसी का मौका
स्कारलेट डेलगाडो फाइनल से पहले अच्छी लय में थीं। उन्होंने सेमीफाइनल में इंग्लैंड की लॉरेन मैकी को 4-1 से हराकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया था। इसके बावजूद प्रीति ने उन्हें अपनी पसंद की दूरी और गति पर मुकाबला नहीं लड़ने दिया।
भारतीय मुक्केबाज ने डेलगाडो के शुरुआती हमलों को चकमा देकर सीधे पंच लगाए और फिर सुरक्षित दूरी पर लौटती रहीं। उनकी रणनीति में अनावश्यक आक्रामकता के बजाय सटीकता और नियंत्रण दिखाई दिया।
प्रीति के बाद जैसमीन ने भी जीता गोल्ड
प्रीति की जीत के तुरंत बाद जैसमीन लांबोरिया ने महिला 57 किग्रा फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की अनुभवी माइकेला वॉल्श को 5-0 से हराया। जैसमीन का स्वर्ण भारत का सातवां गोल्ड बना।
इन लगातार दो स्वर्ण पदकों ने भारत के बॉक्सिंग अभियान को मजबूत शुरुआत दी। दिन में साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास, अरुंधति चौधरी, लवलीना बोरगोहेन, जादुमणि सिंह, सचिन सिवाच, अंकुश पंघाल और नरेंद्र बेरवाल के भी खिताबी मुकाबले निर्धारित हैं।
भारतीय महिला बॉक्सिंग के लिए बड़ा संकेत
प्रीति की जीत केवल मेडल टैली में एक और गोल्ड जुड़ने तक सीमित नहीं है। यह दिखाती है कि भारतीय महिला बॉक्सिंग में अलग-अलग भार वर्गों में मजबूत खिलाड़ी तैयार हो रही हैं।
प्रीति ने मुकाबले के हर चरण में तकनीकी नियंत्रण दिखाया। शुरुआती मुकाबले में RSC से जीत, उसके बाद लगातार तीन 5-0 फैसले उनके दबदबे को स्पष्ट करते हैं। ग्लासगो में उनके प्रदर्शन ने उन्हें आने वाली विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए भारत की प्रमुख पदक उम्मीदों में स्थापित कर दिया है।




