Rajasthan Panchayat Election Lottery: राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच बुधवार, 23 सितंबर को आरक्षण लॉटरी का नजारा कई जगह दिलचस्प रहा। कोटा और बाड़मेर में छोटे बच्चों के हाथों से एक-एक कर पर्चियां निकलती रहीं और सामने बैठे संभावित उम्मीदवार व राजनीतिक प्रतिनिधि हर पर्ची के साथ अपना चुनावी गणित जोड़ते-घटाते रहे। बच्चों के लिए कंटेनर से पर्ची निकालना एक खेल जैसा था, लेकिन उन्हीं पर्चियों से कई वार्डों और प्रधान पदों की आरक्षण स्थिति तय हो रही थी।
राजस्थान में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और प्रधान पदों के आरक्षण की प्रक्रिया 23 सितंबर को जिला स्तर पर रखी गई थी। वहीं सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए आरक्षण लॉटरी 24 सितंबर को संबंधित उपखंड स्तर पर हो रही है। आरक्षण कार्यक्रम पहले दो बार बदला जा चुका था, जिसके बाद 23 और 24 सितंबर की तारीख अंतिम रूप से तय हुई।
Rajasthan Panchayat Election Lottery में बच्चे बने आकर्षण
कोटा कलेक्ट्रेट में आयोजित Rajasthan Panchayat Election Lottery के दौरान छोटे बच्चों से पर्चियां निकलवाई गईं।
करीब पौने चार साल की उशार्वी राठौर भी इनमें शामिल थीं। वह एक निजी स्कूल के प्ले ग्रुप में पढ़ती हैं। जब उन्हें कंटेनर से पर्ची निकालने के लिए बुलाया गया तो उन्होंने बिना किसी झिझक के हाथ डालकर पर्ची निकाल दी।
उनसे जब पूछा गया कि उन्होंने किसके लिए लॉटरी निकाली है, तो वह चुनावी प्रक्रिया से अनजान नजर आईं। उनके लिए यह केवल पर्ची निकालने का एक दिलचस्प अनुभव था, जबकि सामने बैठे लोगों के लिए वही पर्ची राजनीतिक भविष्य से जुड़ी हुई थी।
उशार्वी के पिता दीपक साहू जिला कलेक्ट्रेट के राजस्व विभाग में कार्यरत बताए गए हैं।

आदविक को पता था पर्ची निकालनी है, लेकिन क्यों… नहीं
करीब पांच साल के आदविक मीणा ने भी आरक्षण लॉटरी में पर्ची निकाली।
आदविक निजी स्कूल में प्री-प्रेप कक्षा में पढ़ते हैं। उनके पिता ताराचंद मीणा सांख्यिकी विभाग में इंस्पेक्टर हैं।
आदविक को इतना जरूर बताया गया था कि कंटेनर से एक पर्ची निकालनी है, लेकिन उस पर्ची से किस पंचायत समिति, वार्ड या पद की आरक्षण स्थिति तय होने वाली है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी।
यही दृश्य लॉटरी प्रक्रिया को रोचक बना रहा था—एक तरफ बच्चे बेफिक्र होकर पर्चियां निकाल रहे थे और दूसरी तरफ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि हर परिणाम को ध्यान से दर्ज कर रहे थे।
Rajasthan Panchayat Election Lottery: कोटा में 6 प्रधान पदों का आरक्षण तय
कोटा जिले में 23 सितंबर को हुई प्रक्रिया में जिला परिषद के 25 वार्डों और छह पंचायत समितियों के प्रधान पदों की आरक्षण स्थिति तय की गई।
प्रधान पदों में:
- लाडपुरा – सामान्य महिला
- सुल्तानपुर – अनुसूचित जनजाति
- इटावा – अनुसूचित जाति
- चेचट – सामान्य महिला
- खैराबाद – OBC
- सांगोद – सामान्य/अनारक्षित
रखा गया है। जिला परिषद के 25 वार्डों में भी अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण निर्धारित किया गया।
बाड़मेर में जया और मोतीसिंह ने निकाली पर्चियां
Rajasthan Panchayat Election Lottery में बाड़मेर से भी ऐसा ही नजारा सामने आया।
यहां 9 वर्षीय जया सोनी और 8 वर्षीय मोतीसिंह आरक्षण की पर्चियां निकालते हुए आकर्षण का केंद्र बन गए।
बच्चों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके हाथों से निकलने वाली पर्चियां किसी संभावित प्रत्याशी के लिए खुशखबरी बन सकती हैं तो किसी की पहले से तैयार चुनावी रणनीति बदल सकती हैं।
बच्चे लगातार पर्चियां निकालते रहे। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार बच्चों ने इसे मजेदार अनुभव बताया, जबकि पास बैठे राजनीतिक प्रतिनिधियों की नजर हर खुलने वाली पर्ची पर टिकी रही।
Rajasthan Panchayat Election Lottery: बाड़मेर में 8 महिला प्रधान बनेंगी
बाड़मेर में भी 23 सितंबर को जिला परिषद सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति सदस्य पदों की आरक्षण लॉटरी पूरी हुई।
वहां आरक्षण निर्धारण के बाद 8 पंचायत समितियों में महिला प्रधान होने की स्थिति बनी है। बाड़मेर में जिला परिषद के 37 वार्डों और पंचायत समितियों के पदों का वर्गवार आरक्षण भी तय किया गया।
सरपंच और वार्ड पंच पदों की प्रक्रिया 24 सितंबर को संबंधित SDM कार्यालयों में रखी गई है।
बच्चों से ही लॉटरी निकलवाना जरूरी है क्या?
Rajasthan Panchayat Election Lottery, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।
राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 में विभिन्न आरक्षित पदों के निर्धारण के लिए draw of lots यानी लॉटरी की व्यवस्था दी गई है।
नियमों के अनुसार अधिकृत अधिकारी लॉटरी की जगह, तारीख और समय तय करता है और प्रक्रिया निर्धारित सरकारी नियमों के अनुसार होती है। सरपंच और प्रधान पदों में महिलाओं के लिए आरक्षित पद भी draw of lots से निर्धारित किए जा सकते हैं।
हालांकि इन नियमों में यह नहीं कहा गया है कि पर्ची अनिवार्य रूप से किसी छोटे बच्चे से ही निकलवाई जाए।
इसलिए कोटा या बाड़मेर में बच्चों को पर्ची निकालने के लिए आगे करना लॉटरी की अनिवार्य कानूनी शर्त नहीं, बल्कि निष्पक्ष और सहज random selection के लिए अपनाई गई स्थानीय प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
Rajasthan Panchayat Election Lottery: एक पर्ची और बदल गया चुनावी गणित
आरक्षण लॉटरी का असर सीधे संभावित प्रत्याशियों पर पड़ता है।
किसी सीट के:
- सामान्य होने
- महिला के लिए आरक्षित होने
- SC के लिए आरक्षित होने
- ST के लिए आरक्षित होने
- OBC के लिए आरक्षित होने
से उस सीट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं का पूरा समीकरण बदल सकता है।
यही कारण है कि लॉटरी स्थल पर राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, संभावित प्रत्याशी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहते हैं।
उदाहरण के तौर पर अगर कोई सीट सामान्य से महिला आरक्षित हो जाती है तो वहां पहले से तैयारी कर रहा पुरुष दावेदार स्वयं चुनाव नहीं लड़ सकेगा। इसी तरह SC, ST या OBC आरक्षण आने पर पात्रता के अनुसार उम्मीदवारों की संभावित सूची बदल जाती है।
Rajasthan Panchayat Election Lottery: 23 सितंबर को प्रदेशभर में हुई प्रक्रिया
राजस्थान के कई जिलों में बुधवार को Rajasthan Panchayat Election Lottery आयोजित की गई।
जयपुर में जिला परिषद के 57 वार्डों, पंचायत समिति प्रधानों और पंचायत समिति सदस्यों के लिए प्रक्रिया आयोजित हुई। यहां जिले की 22 पंचायत समितियों के प्रधान पदों का आरक्षण भी तय किया गया।
टोंक में भी जिला कलेक्टर की मौजूदगी में जिला परिषद के 31 वार्डों और आठ पंचायत समितियों से जुड़ी आरक्षण प्रक्रिया हुई।
जैसलमेर, बाड़मेर, कोटा सहित अन्य जिलों में भी इसी दिन आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की गई।
Rajasthan Panchayat Election Lottery: आज सरपंच और वार्ड पंच की लॉटरी
पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया का अगला चरण गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को रखा गया है।
आज ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच पदों के आरक्षण की स्थिति तय की जा रही है। यह प्रक्रिया संबंधित उपखंड अधिकारियों के स्तर पर आयोजित होनी है।
इसके बाद गांवों में संभावित उम्मीदवारों की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाएगी।
Rajasthan Panchayat Election Lottery की बड़ी बातें
- जिला स्तर की आरक्षण लॉटरी 23 सितंबर को हुई।
- इसमें जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और प्रधान पद शामिल रहे।
- कोटा में छोटे बच्चों से पर्चियां निकलवाई गईं।
- उशार्वी राठौर और आदविक मीणा लॉटरी प्रक्रिया में शामिल हुए।
- बाड़मेर में जया सोनी और मोतीसिंह ने पर्चियां निकालीं।
- बच्चों के लिए यह सामान्य पर्ची निकालने जैसा अनुभव था।
- संभावित प्रत्याशियों के लिए हर पर्ची चुनावी समीकरण बदलने वाली थी।
- कोटा में छह पंचायत समितियों के प्रधान पदों का आरक्षण तय हुआ।
- बाड़मेर में आठ महिला प्रधान होने की स्थिति बनी है।
- 24 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच पदों की आरक्षण प्रक्रिया रखी गई है।
- पंचायती राज निर्वाचन नियम draw of lots की व्यवस्था करते हैं, लेकिन बच्चों से पर्ची निकलवाना अनिवार्य कानूनी प्रावधान नहीं है।
Rajasthan Panchayat Election Lottery: बच्चों के लिए खेल, दावेदारों के लिए बड़ा फैसला
कुल मिलाकर Rajasthan Panchayat Election Lottery में बुधवार को दो अलग-अलग तस्वीरें एक साथ नजर आईं। छोटे बच्चे बिना किसी राजनीतिक चिंता के कंटेनर में हाथ डालकर पर्चियां निकालते रहे, जबकि सामने बैठे दावेदार हर पर्ची के साथ अपने चुनावी भविष्य का हिसाब लगाते रहे।
कोटा और बाड़मेर में बच्चों से पर्चियां निकलवाने की तस्वीरों ने आरक्षण प्रक्रिया को रोचक जरूर बना दिया, लेकिन इसके नतीजे पूरी तरह राजनीतिक मायने रखते हैं। किस पंचायत समिति में किस वर्ग का प्रधान होगा और किस वार्ड से कौन चुनाव लड़ सकेगा, इसका बड़ा हिस्सा अब स्पष्ट हो चुका है।
24 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच पदों की आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद गांव स्तर पर भी आगामी पंचायत चुनाव का चुनावी गणित साफ होने लगेगा।
आधिकारिक चुनाव संबंधी जानकारी के लिए Rajasthan State Election Commission देखा जा सकता है।
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