Rajasthan UCC News: राजस्थान में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। समान सिविल संहिता प्रारूप समिति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को प्रस्तावित विधेयक का ड्राफ्ट सौंप दिया है। समिति ने अलग-अलग माध्यमों से मिले करीब 14 लाख सुझावों और लोगों से हुई चर्चाओं के आधार पर इस प्रारूप को तैयार किया है।
प्रस्तावित Rajasthan UCC Draft में विवाह, बहुविवाह और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह अभी विधेयक का प्रारूप है और अंतिम कानून बनने से पहले इसे निर्धारित संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

Rajasthan UCC
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपा गया ड्राफ्ट
समान सिविल संहिता प्रारूप समिति के सदस्यों ने शनिवार शाम मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप सौंपा। इस दौरान विधि मंत्री जोगाराम पटेल भी मौजूद रहे।
समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को ड्राफ्ट में शामिल प्रमुख सुझावों और प्रस्तावित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना पी. देसाई तथा गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।
समिति में बसंत सिंह छाबा, रामस्वरूप अग्रवाल, डॉ. शुचि चौहान और अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
ये भी पढ़ें-: Rajasthan; नड्डा के बाद शाह का दौरा
करीब 14 लाख सुझावों के बाद तैयार हुआ प्रारूप
Rajasthan UCC को लेकर समिति ने आम लोगों और विभिन्न वर्गों से सुझाव मांगे थे। इसके लिए ऑनलाइन माध्यमों के साथ-साथ प्रत्यक्ष संवाद का भी सहारा लिया गया।
जानकारी के अनुसार समिति को वेबपोर्टल के जरिए 1.48 लाख से ज्यादा सुझाव प्राप्त हुए, जबकि WhatsApp के माध्यम से 12.34 लाख से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं।
इसके अलावा समिति के सदस्यों ने प्रदेश के अलग-अलग संभाग मुख्यालयों पर जाकर विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक समूहों के साथ चर्चा की। इन बैठकों के दौरान मिले सुझावों और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ड्राफ्ट तैयार किया गया।
Rajasthan UCC Draft: शादी की न्यूनतम उम्र पर प्रस्तावित नियम
प्रस्तावित राजस्थान UCC का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विवाह से जुड़े नियम हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक ड्राफ्ट में आदिवासी समुदायों को छोड़कर अन्य धर्मों और समुदायों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु से संबंधित समान प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
इसका उद्देश्य अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद विवाह संबंधी व्यवस्थाओं के स्थान पर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना बताया जा रहा है।
हालांकि, शादी की उम्र से संबंधित अंतिम प्रावधान क्या होंगे और वे किस रूप में लागू किए जाएंगे, यह विधेयक के अंतिम स्वरूप तथा विधानसभा में होने वाली प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।
बहुविवाह पर रोक का प्रस्ताव
Rajasthan UCC Draft में एक से अधिक विवाह यानी बहुविवाह को लेकर भी कड़े प्रावधान प्रस्तावित किए जाने की जानकारी है।
यदि यह प्रावधान अंतिम कानून का हिस्सा बनता है, तो राजस्थान में विवाह संबंधी कानूनी व्यवस्था को एक समान बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
फिलहाल इसे प्रस्तावित प्रावधान के रूप में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि समिति का ड्राफ्ट अभी कानून नहीं बना है।
लिव-इन रिलेशनशिप भी कानून के दायरे में
प्रस्तावित UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नियम बनाए जाने की बात सामने आई है। इसके तहत ऐसे संबंधों के पंजीकरण और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं को विनियमित करने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर पंजीकरण व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों और कानूनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना हो सकता है।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम नियम क्या होंगे, इसकी जानकारी विधेयक के विस्तृत प्रावधान सामने आने और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
Rajasthan UCC Draft: आदिवासी समुदायों को क्यों रखा गया अलग?
राजस्थान के प्रस्तावित UCC में आदिवासी समुदायों को दायरे से बाहर रखने की जानकारी सामने आई है। समिति से जुड़े सूत्रों के अनुसार इसके पीछे संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखा गया है।
आदिवासी समुदायों के व्यक्तिगत, सामाजिक और पारंपरिक मामलों से जुड़े अलग-अलग प्रावधानों तथा संवैधानिक संरक्षण को देखते हुए उन्हें प्रस्तावित व्यवस्था से बाहर रखने की बात कही गई है।
यह पहलू राजस्थान में UCC की चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
Rajasthan UCC Draft: उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का अध्ययन
राजस्थान में UCC का प्रारूप तैयार करने के दौरान अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया गया। समिति ने विशेष रूप से उत्तराखंड और गुजरात में UCC से जुड़े कानूनी प्रावधानों का परीक्षण किया।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है, जबकि गुजरात में UCC से संबंधित विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। राजस्थान समिति ने इन राज्यों के प्रावधानों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न दिशा-निर्देशों का भी अध्ययन किया।
इस अध्ययन के आधार पर राजस्थान की सामाजिक और संवैधानिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट तैयार किया गया है।
Rajasthan UCC Draft: आखिर क्या है Uniform Civil Code?
Uniform Civil Code यानी UCC का सामान्य उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कुछ मामलों में नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है।
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नियम लागू करने की अवधारणा को UCC कहा जाता है।
हालांकि UCC का अर्थ यह नहीं है कि सभी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को समाप्त कर दिया जाएगा। इसका मुख्य संबंध उन व्यक्तिगत कानूनों से है, जिनका सीधा असर नागरिकों के कानूनी अधिकारों और पारिवारिक मामलों पर पड़ता है।
Rajasthan UCC Draft: विवाह पंजीकरण भी हो सकता है महत्वपूर्ण हिस्सा
समान नागरिक संहिता के तहत विवाहों के पंजीकरण को महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था के तौर पर शामिल किया जा सकता है। विवाह का आधिकारिक रिकॉर्ड होने से भविष्य में विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं में दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध रहेगा।
इसी तरह तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में भी समान नियमों की व्यवस्था किए जाने का उद्देश्य महिला और पुरुष दोनों के अधिकारों को स्पष्ट करना हो सकता है।
Rajasthan UCC Draft: महिलाओं के अधिकारों पर भी फोकस
UCC को लेकर होने वाली चर्चाओं में महिलाओं के कानूनी अधिकार एक प्रमुख विषय रहे हैं। विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में समान अधिकार सुनिश्चित करना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल माना जाता है।
राजस्थान के प्रस्तावित ड्राफ्ट में भी व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने पर जोर दिए जाने की जानकारी है।
अभी अंतिम कानून नहीं बना है
राजस्थान में UCC को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्यमंत्री को सौंपा गया दस्तावेज अभी ड्राफ्ट है। इसे अंतिम कानून मानना सही नहीं होगा।
अब प्रस्तावित विधेयक को सरकार की ओर से आगे की कानूनी और विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें आवश्यक परीक्षण, मंत्रिमंडल स्तर पर निर्णय और विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।
विधानसभा में चर्चा और पारित होने के बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा। इसलिए फिलहाल ड्राफ्ट में बताए जा रहे प्रावधानों को प्रस्ताव के तौर पर देखना जरूरी है।
Rajasthan UCC Draft: राजस्थान में UCC को लेकर आगे क्या?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद अब नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर रहेगी। सरकार प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद विधेयक को आगे बढ़ाने पर निर्णय ले सकती है।
अगर यह विधेयक विधानसभा में आता है तो राजस्थान में विवाह, बहुविवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, तलाक और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनों को लेकर व्यापक बहस की संभावना है।
Rajasthan UCC Draft राजस्थान में समान नागरिक संहिता को लेकर तैयार किया गया ड्राफ्ट प्रदेश की व्यक्तिगत कानून व्यवस्था में संभावित बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब 14 लाख सुझावों के अध्ययन के बाद तैयार इस प्रारूप में विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों को लेकर प्रस्तावित नियम शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, अभी अंतिम फैसला बाकी है। ड्राफ्ट के बाद होने वाली कानूनी और विधायी प्रक्रिया यह तय करेगी कि इनमें से कौन-कौन से प्रावधान अंतिम कानून का हिस्सा बनते हैं।




