घरेलू शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार के बाद हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। HUL, BEL और बिजली कंपनियों के शेयरों पर दबाव रहा, जबकि TCS, Tech Mahindra और Infosys की तेजी से Nifty IT इंडेक्स करीब 3.3 प्रतिशत चढ़ा।
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 28 जुलाई को सीमित उतार-चढ़ाव के बीच मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन FMCG, बैंकिंग, रक्षा और बिजली क्षेत्र के कुछ दिग्गज शेयरों में बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक बढ़त कायम नहीं रख सके।
कारोबार के अंत में BSE Sensex 69.86 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर बंद हुआ। वहीं, NSE Nifty 50 में 10.60 अंक यानी 0.04 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,985.35 पर बंद हुआ।
सोमवार की तेजी के बाद बाजार में ठहराव
इससे पहले सोमवार को भारतीय बाजार में तेज सुधार देखने को मिला था। पांच कारोबारी सत्रों की लगातार गिरावट के बाद Sensex 776.01 अंक यानी 1.02 प्रतिशत उछलकर 76,835.78 पर बंद हुआ था। Nifty 50 भी 228.50 अंक यानी 0.96 प्रतिशत चढ़कर 23,995.95 पर पहुंच गया था।
मंगलवार को बाजार ने सोमवार की तेजी को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक बाजारों की कमजोरी, तिमाही नतीजों पर शेयर-विशिष्ट प्रतिक्रिया और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों से पहले निवेशकों की सतर्कता ने सूचकांकों को सीमित दायरे में रखा।
बाजार में कमजोर रुझान के बावजूद IT शेयरों में हुई खरीदारी ने बड़ी गिरावट को रोक दिया। HDFC Sky के अनुसार बाजार की चौड़ाई कमजोर रही और गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से अधिक थी।
Nifty IT में 3.3 प्रतिशत की तेजी
मंगलवार के कारोबार की सबसे बड़ी विशेषता IT शेयरों में मजबूत खरीदारी रही। Nifty IT इंडेक्स करीब 3.2 से 3.3 प्रतिशत चढ़कर दिन का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स बना।
Tata Consultancy Services यानी TCS करीब 4.47 प्रतिशत चढ़कर प्रमुख लाभ वाले शेयरों में रहा। Tech Mahindra में लगभग 3.5 से 3.8 प्रतिशत और Infosys में 2.47 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। HCL Technologies के शेयरों में भी बढ़त देखने को मिली।
निवेशकों ने भारतीय IT कंपनियों में ऐसे समय खरीदारी की, जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के ऊंचे पूंजीगत खर्च को लेकर चिंता बढ़ रही है। भारतीय IT सेवा कंपनियां चिप निर्माण में सीधे भारी निवेश करने के बजाय डिजिटल सेवाओं, क्लाउड, डेटा और AI सॉल्यूशंस से जुड़ी मांग का लाभ उठा सकती हैं—इस धारणा ने सेक्टर को समर्थन दिया।
मूल कॉपी में ITC की जगह TCS होगा
दिए गए मूल समाचार में ITC के शेयर में 4.47 प्रतिशत की तेजी बताई गई थी। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार यह प्रदर्शन TCS का था। TCS मंगलवार को 4.47 प्रतिशत बढ़कर करीब ₹2,397.80 पर बंद हुआ।
Eternal के शेयर में लगभग 4.02 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि Infosys 2.47 प्रतिशत लाभ में रहा। Sensex की 30 कंपनियों में 17 शेयर बढ़त और 13 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
HUL के शेयर में करीब सात प्रतिशत की गिरावट
Hindustan Unilever यानी HUL मंगलवार को प्रमुख सूचकांकों पर सबसे अधिक दबाव डालने वाले शेयरों में रहा। कंपनी के तिमाही नतीजों पर निवेशकों की नकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इसका शेयर करीब 7.1 प्रतिशत गिर गया।
इसके अलावा Bharat Electronics, Coal India, NTPC, ICICI Bank और Tata Consumer Products के शेयरों में भी गिरावट रही। FMCG शेयरों पर विशेष रूप से HUL के प्रदर्शन का असर पड़ा, जबकि बैंकिंग और बिजली कंपनियों में भी बिकवाली देखने को मिली।
बाजार में मंगलवार को इंडेक्स के स्तर पर हलचल कम रही, लेकिन अलग-अलग कंपनियों के तिमाही नतीजों के आधार पर शेयरों में बड़ी तेजी और गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट हुआ कि फिलहाल बाजार का रुख व्यापक तेजी या बिकवाली के बजाय स्टॉक-स्पेसिफिक बना हुआ है।
कच्चे तेल में गिरावट से मिला सहारा
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों में अस्थायी विराम तथा कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। मंगलवार को Brent Crude करीब 2.86 प्रतिशत गिरकर 85.83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए तेल की कीमतों में गिरावट से आयात खर्च, महंगाई और रुपये पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ती है। इसी कारण कमजोर वैश्विक बाजारों के बावजूद सस्ता कच्चा तेल घरेलू शेयर बाजार के लिए सहायक कारक बना।
हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति अब भी पूरी तरह स्थिर नहीं है। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने या हूती समूह के हमलों से तेल आपूर्ति बाधित होने पर कीमतों में फिर तेजी आ सकती है।
KOSPI में करीब 11 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट
भारतीय बाजार पर एशियाई शेयर बाजारों की बड़ी गिरावट का भी दबाव रहा। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स मंगलवार को 10.84 प्रतिशत टूटकर 6,023.66 पर बंद हुआ। सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी बिकवाली के कारण बाजार में सर्किट ब्रेकर सक्रिय करना पड़ा।
दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियों SK Hynix और Samsung Electronics में 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। चीनी सेमीकंडक्टर कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और AI क्षेत्र में बढ़ते निवेश की स्थिरता पर सवालों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
जापान का Nikkei 225 भी करीब चार प्रतिशत गिरा। ताइवान और दूसरे एशियाई बाजारों में टेक्नोलॉजी तथा चिप कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला।
Fed और Bank of Japan के फैसलों पर नजर
बाजार के निवेशक अब अमेरिकी Federal Reserve और Bank of Japan की मौद्रिक नीति बैठकों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। ब्याज दरों, महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर दोनों केंद्रीय बैंकों के संकेत वैश्विक बाजारों की अगली दिशा तय कर सकते हैं।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक का सख्त रुख डॉलर और बॉन्ड यील्ड को मजबूत कर सकता है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी निवेश की निकासी का जोखिम बढ़ेगा। इसके विपरीत, नरम संकेत मिलने पर इक्विटी बाजारों को समर्थन मिल सकता है।
आगे कैसा रह सकता है बाजार?
निकट अवधि में घरेलू बाजार में सीमित दायरे का कारोबार जारी रह सकता है। गिरते कच्चे तेल, IT शेयरों की मजबूती और घरेलू संस्थागत खरीदारी से बाजार को सहारा मिल रहा है। दूसरी ओर कमजोर वैश्विक संकेत, कंपनियों के मिश्रित तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया की अनिश्चितता तेजी को सीमित कर सकती है।
मंगलवार का कारोबार इसी संतुलन का उदाहरण रहा। IT शेयरों की करीब 3.3 प्रतिशत तेजी के बावजूद HUL और अन्य दिग्गज शेयरों की गिरावट ने Sensex और Nifty को लाल निशान में बंद कराया।




