पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों ऐसे घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी, कांग्रेस और CPI(M) के बीच भविष्य के राजनीतिक संबंधों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया है। दूसरी तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर ममता बनर्जी और CPI(M) महासचिव एमए बेबी के बीच बातचीत हुई है।
इन घटनाओं के बाद Bengal Politics में सवाल उठ रहा है कि क्या लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे ये दल किसी बड़े राजनीतिक मंच पर साथ आ सकते हैं?
फिलहाल उपलब्ध बयानों से किसी औपचारिक चुनावी गठबंधन की पुष्टि नहीं होती। CPI(M) नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच मौजूदा संपर्क issue-based cooperation है, इसे पश्चिम बंगाल में चुनावी समझौता नहीं माना जाना चाहिए।
West Bengal Politics : नंदीग्राम में कांग्रेस को ममता का समर्थन
Bengal Politics में इस चर्चा को सबसे ज्यादा हवा नंदीग्राम उपचुनाव से मिली।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम में अपना उम्मीदवार वापस लेते हुए कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। ममता ने इस फैसले को INDIA गठबंधन को मजबूत करने और विपक्षी दलों के बीच बेहतर संबंध बनाने से जोड़ा था।
यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी और कांग्रेस आम तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती रही हैं। दोनों दलों ने राज्य में आखिरी बार 2011 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया था।
हालांकि नंदीग्राम में समर्थन को पूरे राज्य में कांग्रेस-ममता चुनावी समझौते का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी। यह फैसला फिलहाल एक विधानसभा उपचुनाव तक सीमित है।
एमए बेबी और ममता के बीच फोन पर बातचीत
Bengal Politics में दूसरा महत्वपूर्ण घटनाक्रम CPI(M) महासचिव एमए बेबी और ममता बनर्जी के बीच बातचीत है।
एमए बेबी के अनुसार वाम दलों ने चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर व्यापक विपक्षी सहयोग के लिए गैर-NDA दलों को पत्र भेजे थे। इनमें ममता बनर्जी का गुट भी शामिल था। ममता ने पत्र का जवाब दिया और बाद में बेबी से फोन पर बातचीत भी की।
एमए बेबी ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा पहल एक विशिष्ट मुद्दे पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह संपर्क भविष्य में किसी व्यापक राजनीतिक या चुनावी समझौते में बदलेगा।
West Bengal Politics : ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्षी दल एक मंच पर
ममता बनर्जी, कांग्रेस, CPI(M) और कई अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्षी दलों ने संसद में CEC को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाने की तैयारी की है। 30 सितंबर को विपक्षी दलों की बैठक प्रस्तावित है।
ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग ने विपक्ष की ओर से लगाए गए कई आरोपों से इनकार किया है। Reuters के अनुसार चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
यही मुद्दा फिलहाल Bengal Politics में ममता और वाम दलों के बीच सीमित सहयोग का आधार बना है।
CPI(M) ने चुनावी गठबंधन से किया इनकार
पश्चिम बंगाल CPI(M) नेतृत्व ने ममता बनर्जी के साथ संभावित चुनावी गठबंधन की चर्चा को फिलहाल खारिज किया है।
पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा है कि विभिन्न दलों को संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर साथ आने के लिए पत्र भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि CPI(M) ने ममता बनर्जी के साथ चुनावी गठबंधन कर लिया है।
उनके मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर किसी साझा मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दल एक साथ आंदोलन कर सकते हैं, लेकिन इससे पश्चिम बंगाल के चुनावी समीकरण अपने आप नहीं बदल जाते।
इसलिए मौजूदा Bengal Politics में CPI(M) का आधिकारिक रुख दो स्तरों पर अलग दिखता है—राष्ट्रीय या संवैधानिक मुद्दों पर सहयोग संभव है, लेकिन राज्य में चुनावी समझौते पर पार्टी ने सहमति नहीं दी है।
West Bengal Politics : कांग्रेस का रुख भी पूरी तरह साफ नहीं
कांग्रेस के लिए भी स्थिति अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को ममता बनर्जी के गुट का समर्थन मिला है। 29 सितंबर को कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद मिलन प्रधान चुनाव प्रचार में भी हिस्सा ले सकेंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस चुनाव आयोग के मुद्दे पर व्यापक विपक्षी एकजुटता की कोशिश का हिस्सा है। कांग्रेस कार्यसमिति ने भी चुनाव आयोग और विपक्षी रणनीति पर चर्चा की है।
लेकिन पश्चिम बंगाल में भविष्य में ममता बनर्जी के गुट के साथ स्थायी चुनावी गठबंधन होगा या नहीं, इस बारे में कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
ममता के लिए बदले हैं राजनीतिक हालात
2026 के विधानसभा चुनाव के बाद Bengal Politics का पूरा समीकरण बदला है।
ममता बनर्जी अब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री हैं और राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP सरकार है। इसके साथ ही Trinamool Congress के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस विवाद का फैसला तीन महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है।
ममता के नेतृत्व वाला गुट फिलहाल ‘Mamata All India Trinamool Congress’ के नाम से राजनीतिक गतिविधियां चला रहा है।
इस बदली हुई स्थिति में विपक्ष के अलग-अलग दलों के बीच संपर्क को Bengal Politics के नए चरण के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे किसी स्थायी गठबंधन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
कांग्रेस और Left का पुराना संबंध भी अहम
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और CPI(M) पहले भी चुनावी समझौते कर चुके हैं। दोनों दल लंबे समय तक एक-दूसरे के विरोधी रहे, लेकिन बाद में BJP और TMC के मुकाबले कई चुनावों में उन्होंने साथ मिलकर उम्मीदवार उतारे।
राष्ट्रीय राजनीति में भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब राज्य स्तर पर विरोधी दल केंद्र के स्तर पर किसी सरकार या साझा मुद्दे को लेकर साथ आए।
इसलिए Bengal Politics में राष्ट्रीय स्तर के सहयोग और राज्य स्तर के चुनावी गठबंधन को अलग-अलग देखना जरूरी है।
BJP ने ममता-Left संपर्क पर उठाए सवाल
राज्य की सत्तारूढ़ BJP ने ममता बनर्जी और CPI(M) के बीच बढ़े संपर्क पर राजनीतिक हमला किया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश BJP नेताओं ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता गुट और Left एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। CPI(M) और ममता खेमे ने इसे चुनावी गठबंधन की पुष्टि मानने से इनकार किया है।
इसलिए BJP का यह दावा राजनीतिक आरोप है, न कि किसी घोषित गठबंधन की पुष्टि।
क्या ममता-Congress-CPI(M) गठबंधन तय है?
मौजूदा तथ्यों के आधार पर इसका जवाब है—अभी कोई ऐसा औपचारिक गठबंधन घोषित नहीं हुआ है।
इस समय Bengal Politics में तीन अलग घटनाएं एक साथ चल रही हैं। ममता गुट ने नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन दिया है, ममता और CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर बातचीत की है और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल CEC और SIR के मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बना रहे हैं।
लेकिन CPI(M) ने साफ कहा है कि इसे पश्चिम बंगाल में TMC के साथ चुनावी समझौता नहीं माना जाना चाहिए। कांग्रेस ने भी राज्य स्तर पर किसी नए स्थायी गठबंधन की घोषणा नहीं की है।
इसलिए फिलहाल Bengal Politics में इसे चुनावी गठबंधन से ज्यादा issue-based opposition coordination कहना तथ्यात्मक रूप से अधिक सही होगा।
आगे यह सहयोग केवल चुनाव आयोग और SIR जैसे मुद्दों तक सीमित रहता है या राज्य की चुनावी राजनीति में भी कोई नया समीकरण बनता है, यह संबंधित दलों के भविष्य के औपचारिक फैसलों से ही स्पष्ट होगा।

