पश्चिम बंगाल में कथित Fake Doctors के एक के बाद एक मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर से सामने आया है, जहां पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिस पर खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट बताकर मरीजों का इलाज करने और MBBS, FRCS समेत कई कथित फर्जी योग्यताओं का इस्तेमाल करने का आरोप है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
इसी बीच राज्य में पांच लोगों के फर्जी मेडिकल डिग्री के आधार पर प्रैक्टिस करने के आरोपों की जांच स्वास्थ्य विभाग पहले ही शुरू कर चुका है। अब स्वास्थ्य मंत्री ने करीब 20 संदिग्ध लोगों के जांच के दायरे में होने की बात कही है। इस पूरे विवाद के बीच विभिन्न डॉक्टर संगठनों ने West Bengal Medical Council से जारी रजिस्ट्रेशन की व्यापक जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
सोनारपुर में कथित Fake Doctor गिरफ्तार
सोनारपुर के घासियाड़ा इलाके में सोमवार रात पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उस पर खुद को कैंसर विशेषज्ञ यानी oncologist बताने का आरोप है।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी कई अलग-अलग जगहों पर चेंबर चलाता था और मरीजों से फीस भी लेता था। उसके prescription pad पर कई मेडिकल डिग्रियां लिखी हुई थीं, जिनकी वैधता अब जांच के दायरे में है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने कितने समय तक मरीजों का इलाज किया, किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और क्या उसके पास किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्था की वास्तविक डिग्री या वैध रजिस्ट्रेशन था।
केवल एक मामला नहीं, कई Fake Doctors पर जांच
यह मामला सामने आने से पहले भी पश्चिम बंगाल में Fake Doctors को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।
स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में पांच ऐसे लोगों के खिलाफ जांच शुरू की, जिन पर कथित तौर पर बिहार से फर्जी मेडिकल डिग्रियां और दस्तावेज हासिल कर पश्चिम बंगाल में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने का आरोप है। इनमें से कुछ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से भी जुड़े बताए गए हैं।
Association of Private Hospitals and Nursing Homes ने शिकायत की थी कि इन लोगों ने कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर West Bengal Medical Council से registration number भी हासिल किया।
इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं हुई है।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- करीब 20 लोग जांच के दायरे में
मामला बढ़ने के बाद पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा भी बढ़ाया है।
स्वास्थ्य मंत्री शरदवत मुखर्जी ने Times of India से कहा कि करीब 20 संदिग्ध लोगों की जांच की जा रही है, जिन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन हासिल करने का संदेह है। उन्होंने इसे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
सरकार की जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि कथित Fake Doctors को registration number किस प्रक्रिया से मिला और दस्तावेजों के सत्यापन में कहां चूक हुई।
West Bengal Medical Council की भूमिका पर सवाल
विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू West Bengal Medical Council से जुड़े आरोप हैं।
Association of Private Hospitals and Nursing Homes का आरोप है कि कुछ लोगों ने दूसरे राज्यों से कथित फर्जी डिग्री प्रमाणपत्र जमा किए और इसके आधार पर पश्चिम बंगाल में मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल कर लिया। संगठन ने दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए व्यापक जांच की मांग की है।
Service Doctors Forum समेत कई संगठनों ने भी पूरे मामले में स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग की है।
हालांकि मेडिकल काउंसिल के सदस्यों द्वारा रिश्वत लेकर फर्जी रजिस्ट्रेशन जारी करने जैसे आरोप अभी आरोप ही हैं। ऐसे दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
डॉक्टर संगठनों ने मांगी व्यापक जांच
Association of Health Services Doctors, Service Doctors Forum और अन्य चिकित्सक संगठनों ने मांग की है कि केवल पकड़े गए कथित Fake Doctors तक जांच सीमित न रहे।
संगठनों का कहना है कि पिछले वर्षों में जारी मेडिकल registrations की भी जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी या संदिग्ध प्रमाणपत्रों के जरिए कितने लोगों को प्रैक्टिस की अनुमति मिली।
Service Doctors Forum ने इस पूरे मामले में judicial inquiry की मांग भी की है।
कुछ डॉक्टर संगठनों ने West Bengal Medical Council के मौजूदा नेतृत्व की जवाबदेही तय करने और परिषद के कामकाज की समीक्षा की मांग भी उठाई है।
‘संख्या पांच-दस से कहीं ज्यादा हो सकती है’
Association of Health Services Doctors से जुड़े पदाधिकारियों ने आशंका जताई है कि राज्य में Fake Doctors की वास्तविक संख्या अभी सामने आए मामलों से कहीं अधिक हो सकती है।
उनका कहना है कि अगर फर्जी दस्तावेजों के जरिए registration हासिल करने की बात जांच में साबित होती है, तो यह केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी का मामला नहीं रहेगा बल्कि verification system की बड़ी कमजोरी की ओर भी इशारा करेगा।
डॉक्टर संगठनों ने ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ उन लोगों या संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने या उन्हें स्वीकार करने में मदद की।
2017 में भी सामने आया था बड़ा Fake Doctor मामला
पश्चिम बंगाल में Fake Doctors का विवाद नया नहीं है।
2017 में CID ने फर्जी डॉक्टरों और नकली मेडिकल प्रमाणपत्रों को लेकर बड़े स्तर पर जांच की थी। West Bengal CID के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उस दौरान फर्जी दस्तावेजों और दूसरे डॉक्टरों के registration details का इस्तेमाल करने के मामलों में कई FIR दर्ज हुईं और गिरफ्तारियां की गईं।
उस समय रिपोर्ट्स में सैकड़ों संदिग्ध फर्जी डॉक्टरों की बात सामने आई थी। एक मामले में ऐसी संस्था का भी पता चला था जिस पर बड़ी संख्या में अवैध मेडिकल certificates जारी करने का आरोप था।
इसी पुराने मामले का हवाला देकर चिकित्सक संगठन सवाल कर रहे हैं कि पिछली जांचों के बाद सिस्टम में पर्याप्त सुधार क्यों नहीं हुआ।
मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा
Fake Doctors का मामला प्रशासनिक या रजिस्ट्रेशन की गड़बड़ी तक सीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा खतरा मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ा है।
बिना पर्याप्त मेडिकल शिक्षा या प्रशिक्षण वाला व्यक्ति अगर गंभीर बीमारी का इलाज, ऑपरेशन या दवा लिखता है तो गलत diagnosis और treatment का जोखिम बढ़ सकता है।
यही वजह है कि डॉक्टर संगठनों ने पूरे registration database की verification को जरूरी बताया है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी माना है कि मौजूदा जांच patient safety के लिहाज से गंभीर है।
फर्जी डिग्री से रजिस्ट्रेशन कैसे मिला, यही बड़ा सवाल
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मेडिकल डिग्री वास्तव में फर्जी थी तो West Bengal Medical Council से registration कैसे जारी हुआ?
आम तौर पर किसी डॉक्टर को प्रैक्टिस करने के लिए मान्यता प्राप्त मेडिकल qualification और वैध registration की आवश्यकता होती है। राज्य मेडिकल काउंसिल की भूमिका इन credentials को सत्यापित करने में महत्वपूर्ण होती है।
डॉक्टर संगठनों का आरोप है कि अगर दस्तावेजों का उचित सत्यापन किया जाता तो Fake Doctors को वैध डॉक्टर के रूप में काम करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी।
स्वास्थ्य विभाग अब इसी verification process और संबंधित records की जांच कर रहा है।
सरकार ने शुरू की जांच
मामला सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग कई संदिग्ध लोगों के documents और registration details की जांच कर रहा है।
हालिया मामलों में जिला प्रशासन और पुलिस भी शामिल हैं। कुछ आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि अन्य के credentials की जांच जारी है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—पहली, कथित Fake Doctors की पहचान करना और दूसरी, यह सुनिश्चित करना कि भविष्य में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कोई व्यक्ति मेडिकल registration हासिल न कर सके।
जांच के बाद ही साफ होगा कितना बड़ा है नेटवर्क
फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि पश्चिम बंगाल में Fake Doctors का कोई संगठित नेटवर्क कितना बड़ा है या मेडिकल काउंसिल से जुड़े लोगों की इसमें कोई आपराधिक भूमिका रही है या नहीं।
डॉक्टर संगठनों ने गंभीर आरोप जरूर लगाए हैं, लेकिन रिश्वत, राजनीतिक संरक्षण या जानबूझकर फर्जी registration जारी करने जैसे दावों को अभी जांच में साबित किया जाना बाकी है।
इतना जरूर स्पष्ट है कि लगातार सामने आए मामलों ने पश्चिम बंगाल की medical registration और verification व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच अब यह तय करेगी कि यह कुछ अलग-अलग लोगों की धोखाधड़ी है या Fake Doctors से जुड़ी समस्या सिस्टम के भीतर कहीं अधिक गहरी है।

