चुनावी प्रक्रिया प्रभावित करने पर तीन साल की जेल और 45 हजार यूरो जुर्माने का प्रस्ताव, विदेशी शक्ति के हित में अपराध करने पर छह साल तक की सजा का प्रावधान
पेरिस। France Election Interference: फ्रांस सरकार ने चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विदेशी दखल रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने मंत्रिपरिषद के सामने एक विधेयक पेश किया है, जिसमें चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित करने वाले अपराधों के लिए जेल और आर्थिक जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से 22 जुलाई 2026 को जारी मंत्रिपरिषद की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विदेशी डिजिटल हस्तक्षेप, भ्रामक सूचनाओं और संगठित दुष्प्रचार अभियानों से लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा चुनावी प्रक्रिया की रक्षा करना है।
एक साल से बढ़ाकर तीन साल की जेल का प्रस्ताव
प्रस्तावित विधेयक के तहत चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित करने वाले अपराध की अधिकतम जेल की सजा एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने की तैयारी है। इसके साथ ही जुर्माना 15 हजार यूरो से बढ़ाकर 45 हजार यूरो करने का प्रस्ताव रखा गया है।
यदि चुनाव में हस्तक्षेप का अपराध किसी विदेशी सरकार, विदेशी संगठन, विदेशी कंपनी या विदेशी नियंत्रण वाली संस्था के हित में किया जाता है, तो दोषी को छह साल तक की जेल हो सकती है। हालांकि ये प्रावधान अभी विधेयक का हिस्सा हैं और संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कानून के रूप में लागू होंगे।
ऑनलाइन दुष्प्रचार पर अदालत कर सकेगी तत्काल कार्रवाई
France Election Interference रोकने के लिए तैयार किए गए इस विधेयक में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाए जाने वाले झूठे या भ्रामक कंटेंट के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
विधेयक के अनुसार, यदि जानबूझकर, बड़े स्तर पर और स्वचालित तकनीक के माध्यम से ऐसी गलत जानकारी प्रसारित की जाती है, जिससे फ्रांस की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, सुरक्षा, संस्थाओं या लोकतांत्रिक बहस को गंभीर खतरा हो, तो अदालत उस सामग्री का प्रसार रोकने का आदेश दे सकेगी।
इसके लिए एक विशेष न्यायिक प्रक्रिया बनाई जाएगी, जिसके तहत अभियोजन पक्ष या मामले से प्रभावित व्यक्ति अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर सकेगा। अदालत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, होस्टिंग सेवा या इंटरनेट प्रदाता को संबंधित सामग्री हटाने या उसका प्रसार रोकने का निर्देश दे सकेगी।
स्वतंत्र आयोग देगा जनता को जानकारी
फ्रांस सरकार ने चुनाव के दौरान विदेशी हस्तक्षेप के मामलों की पहचान और जनता को जानकारी देने के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाने का भी निर्णय लिया है।
यह आयोग विभिन्न सरकारी विभागों और सक्षम संस्थाओं से मिलने वाली सूचनाओं का परीक्षण करेगा। विदेशी हस्तक्षेप का खतरा प्रमाणित होने पर आयोग संबंधित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को सूचित कर सकेगा। जरूरत पड़ने पर वह मामले की जानकारी सार्वजनिक करने के साथ उसे न्यायिक अधिकारियों के पास भी भेज सकेगा।
आयोग स्थानीय, राष्ट्रीय, यूरोपीय संसद और सीनेट से जुड़े चुनावों के दौरान काम करेगा। इसकी गतिविधियां चुनावी अवधि में शुरू होंगी और मतदान पूरा होने तक जारी रहेंगी। सरकार का कहना है कि आयोग स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा।
स्थानीय चुनावों में दखल के आरोपों के बाद कदम
फ्रांस का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब मार्च 2026 में हुए स्थानीय चुनावों के दौरान वामपंथी पार्टी ‘फ्रांस अनबोड’ के कुछ उम्मीदवारों के खिलाफ कथित विदेशी दुष्प्रचार अभियान की जांच चल रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान में भ्रामक वेबसाइट, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल विज्ञापनों का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आरोप फैलाए गए थे। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का भरोसा दिया था।
जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अभियान के पीछे कौन था और उसे किसने संचालित या वित्तपोषित किया। इसलिए किसी विशेष देश, संस्था या कंपनी की जिम्मेदारी अभी अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं हुई है।
2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले सुरक्षा की तैयारी
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव का पहला चरण 18 अप्रैल 2027 को होगा। यदि पहले चरण में किसी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत नहीं मिलता है, तो दो प्रमुख उम्मीदवारों के बीच दूसरा चरण 2 मई 2027 को कराया जाएगा। चुनाव की इन तारीखों को फ्रांस सरकार ने जुलाई 2026 में आधिकारिक रूप से घोषित किया था।
मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 2027 का चुनाव लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए नहीं लड़ सकेंगे। फ्रांस के संविधान के अनुच्छेद 6 के अनुसार कोई भी व्यक्ति लगातार दो से अधिक राष्ट्रपति कार्यकाल पूरे नहीं कर सकता। मैक्रों 2017 में पहली बार राष्ट्रपति चुने गए थे और 2022 में उन्हें लगातार दूसरा कार्यकाल मिला था।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी रहेगी चुनौती
फ्रांस सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य लोकतांत्रिक बहस को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि जानबूझकर संचालित विदेशी दुष्प्रचार अभियानों को रोकना है। सरकार ने दावा किया है कि कानून में चुनाव की निष्पक्षता की रक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन रखा जाएगा।
हालांकि कानून बनने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विदेशी हस्तक्षेप और राजनीतिक आलोचना के बीच अंतर कैसे निर्धारित किया जाता है। किसी भी लोकतंत्र में चुनाव की सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर पत्रकारिता, राजनीतिक असहमति या सामान्य ऑनलाइन अभिव्यक्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल फ्रांस सरकार का संदेश साफ है—विदेशी शक्तियों द्वारा चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास केवल डिजिटल शरारत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ गंभीर अपराध माना जाएगा।




