प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के सांसदों के साथ राज्य की बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। केंद्र ने राहत और बचाव कार्यों में राज्य सरकार के साथ मिलकर हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 28 जुलाई को असम के सांसदों से मुलाकात कर राज्य के विभिन्न हिस्सों में बनी बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और कुशलता की कामना भी की।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, बैठक में राज्य के अलग-अलग जिलों में बाढ़ से हुए नुकसान, राहत शिविरों की व्यवस्था और प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने के प्रयासों पर चर्चा हुई। हालांकि बैठक में शामिल सांसदों के नाम और केंद्र की ओर से दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट में दिया सहायता का भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने असम के सांसदों से मुलाकात कर राज्य के विभिन्न हिस्सों की मौजूदा बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की मदद के लिए असम सरकार के साथ निकटता से काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने सभी लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रार्थना भी की।
करीब 4.45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
मूल समाचार में बाढ़ के कारण “करीब पांच लोग प्रभावित” लिखा गया है, जो टाइपिंग की त्रुटि प्रतीत होती है। 27 जुलाई रात आठ बजे तक उपलब्ध आपदा प्रबंधन आंकड़ों के अनुसार असम के छह जिलों में 4.45 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित थे।
प्रभावित जिलों में शिवसागर, गोलाघाट, चराईदेव, जोरहाट, नगांव और कामरूप मेट्रोपॉलिटन शामिल हैं। कुल 21 राजस्व सर्किलों के 631 गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित बताए गए हैं।
चराईदेव सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां करीब 1.88 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर में लगभग 1.44 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं।
184 राहत शिविर और वितरण केंद्र बनाए गए
राज्य प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 184 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र खोले हैं। इनमें करीब 28,695 लोग शरण लिए हुए हैं। शिविरों में गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएं और दिव्यांग लोग भी शामिल हैं।
बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए राज्य आपदा मोचन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और स्थानीय प्रशासन की टीमें काम कर रही हैं। राहत एवं बचाव अभियान में 67 नावों को लगाया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में चावल, दाल, नमक और दूसरी जरूरी सामग्री का वितरण भी किया जा रहा है।
37 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल डूबी
असम में बाढ़ से कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 37,139.52 हेक्टेयर फसल क्षेत्र पानी में डूबा हुआ है। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने से किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
बाढ़ से 2.56 लाख से अधिक मवेशी और अन्य पशु प्रभावित बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 26 हजार से अधिक पशुओं के बहने की सूचना है। प्रभावित पशुओं के लिए चारा, चिकित्सा और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
घरों और सड़कों को भी नुकसान
बाढ़ के कारण राज्य में 171 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 4,667 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव में कई सड़कें पानी में डूब गईं या उनका कटाव हुआ है।
शिवसागर और जोरहाट के कुछ विद्यालयों में भी पानी भरने और इमारतों को नुकसान पहुंचने की सूचना है। कामरूप मेट्रोपॉलिटन के दिसपुर राजस्व क्षेत्र के चांदमारी इलाके में शहरी जलभराव दर्ज किया गया, हालांकि वहां से आबादी के बड़े स्तर पर विस्थापन की सूचना नहीं दी गई।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही धनसिरी
नुमालीगढ़ में धनसिरी दक्षिण नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट के समय कोई भी नदी अब तक अपने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार नहीं कर पाई थी। प्रशासन नदी के जलस्तर और बारिश की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।
प्रधानमंत्री और असम के सांसदों की बैठक ऐसे समय हुई है, जब राज्य में राहत कार्यों के साथ पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली की जरूरत बढ़ रही है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वच्छ पानी, दवा और अस्थायी आश्रय पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




