बोस्टन की संघीय अदालत ने मितुल पटेल को जेल में बिताए एक दिन की अवधि को सजा मानते हुए 1,000 डॉलर का जुर्माना लगाया। पटेल ने खुद को फर्जी सशस्त्र डकैती का पीड़ित दिखाने की साजिश में शामिल होने का अपराध स्वीकार किया था।
बोस्टन। अमेरिका में आव्रजन लाभ हासिल करने के लिए फर्जी सशस्त्र डकैती का नाटक रचने की साजिश में शामिल भारतीय नागरिक मितुल पटेल को बोस्टन की संघीय अदालत ने सजा सुनाई है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश म्योंग जे. जौन ने 40 वर्षीय पटेल को पहले से हिरासत में बिताए गए एक दिन की अवधि को ही जेल की सजा मानते हुए उस पर 1,000 डॉलर का जुर्माना लगाया। अदालत ने उसे अमेरिका से निष्कासित करने का भी आदेश दिया है।
मितुल पटेल अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य के वुस्टर शहर में अवैध रूप से रह रहा था। उसने जून 2026 में Visa Fraud Conspiracy यानी वीजा धोखाधड़ी की साजिश के एक आरोप में अपना अपराध स्वीकार किया था। उसे मार्च 2026 में इस नेटवर्क से कथित रूप से जुड़े 10 अन्य लोगों के साथ आपराधिक शिकायत के आधार पर आरोपित किया गया था।
मुकदमे में दोषी नहीं ठहराया गया, खुद स्वीकार किया अपराध
मूल समाचार के शीर्षक में अदालत द्वारा मितुल पटेल को दोषी ठहराने की बात कही गई है। कानूनी रूप से अधिक सटीक तथ्य यह है कि पटेल ने जून में अदालत के सामने अपराध स्वीकार किया था और 29 जुलाई को उसे सजा सुनाई गई।
अर्थात मामला पूर्ण ट्रायल के बाद जूरी या न्यायाधीश द्वारा दोष सिद्ध किए जाने का नहीं, बल्कि Guilty Plea के बाद Sentencing का था। अदालत ने उसे एक दिन की Time Served सजा और 1,000 डॉलर जुर्माना दिया।
अक्टूबर 2023 की फर्जी डकैती में बना था ‘पीड़ित’
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार मितुल पटेल ने कथित नेटवर्क के आयोजक रामभाई पटेल को पैसे दिए थे, ताकि वह अक्टूबर 2023 में वुस्टर स्थित एक दुकान पर कराई गई फर्जी सशस्त्र डकैती में खुद को पीड़ित के रूप में पेश कर सके।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरी योजना का उद्देश्य ऐसा पुलिस रिकॉर्ड और CCTV फुटेज तैयार करना था, जिसके आधार पर खुद को हिंसक अपराध का पीड़ित बताते हुए U Nonimmigrant Status यानी U-वीजा के लिए दावा किया जा सके।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मितुल पटेल ने संबंधित फर्जी घटना के आधार पर U-वीजा का अंतिम आवेदन जमा किया था या नहीं। आधिकारिक बयान केवल यह कहता है कि उसने आव्रजन लाभ के लिए खुद को कथित पीड़ित के रूप में शामिल कराने हेतु पैसे दिए थे।
इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि उसने U-वीजा पाने के उद्देश्य से साजिश में हिस्सा लिया, न कि उसने इस माध्यम से वीजा हासिल कर लिया था।
कैसे रचा जाता था फर्जी डकैती का नाटक?
अभियोजन पक्ष के अनुसार कथित गिरोह फर्जी डकैती को वास्तविक घटना जैसा दिखाने के लिए पहले से पूरी पटकथा तैयार करता था।
एक व्यक्ति कथित डकैत बनकर दुकान, शराब की दुकान या Fast-Food Restaurant में प्रवेश करता था। वह कर्मचारियों को असली जैसी दिखने वाली बंदूक से धमकाता, Cash Register से पैसे निकालता और वहां से फरार हो जाता था। पूरी घटना दुकान के CCTV कैमरों में रिकॉर्ड होती थी।
अधिकारियों का आरोप है कि कथित डकैत के भागने के बाद कर्मचारी तुरंत पुलिस को सूचना नहीं देते थे। वे पांच मिनट या उससे अधिक समय तक इंतजार करते थे, ताकि वह सुरक्षित रूप से निकल सके। इसके बाद पुलिस को फोन कर घटना को वास्तविक सशस्त्र डकैती के रूप में दर्ज कराया जाता था।
खुद को पीड़ित दिखाने वाले लोग कथित तौर पर रामभाई पटेल को पैसे देते थे। इसके बाद रामभाई उन दुकानदारों को भुगतान करता था, जिनके परिसरों का इस्तेमाल फर्जी डकैती के लिए किया जाता था।
क्या होता है अमेरिका का U-वीजा?
U-वीजा अमेरिका में कुछ गंभीर अपराधों के वास्तविक पीड़ितों के लिए बनाया गया एक मानवीय आव्रजन प्रावधान है। इसके लिए आवेदक को किसी निर्धारित अपराध का पीड़ित होना, मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न सहना और अपराध की जांच या मुकदमे में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए मददगार होना आवश्यक है।
इस योजना में कथित तौर पर इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करने का प्रयास किया गया। फर्जी डकैती के माध्यम से आरोपी ऐसा रिकॉर्ड तैयार करना चाहते थे, जिससे कथित पीड़ित पुलिस जांच में सहयोग करने वाले वास्तविक अपराध पीड़ित दिखाई दें।
ऐसी धोखाधड़ी वास्तविक अपराध पीड़ितों के लिए बनाए गए कार्यक्रम की विश्वसनीयता और सीमित संसाधनों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति को U-वीजा दिया जाएगा या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अमेरिकी आव्रजन एजेंसी पात्रता और दस्तावेजों की जांच के बाद करती है।
कम सजा क्यों मिली, आधिकारिक बयान में कारण नहीं
Visa Fraud Conspiracy के आरोप में अधिकतम पांच वर्ष की जेल, तीन वर्ष तक Supervised Release और 2,50,000 डॉलर तक का जुर्माना हो सकता था। इसके बावजूद मितुल पटेल को केवल एक दिन की Time Served सजा और 1,000 डॉलर का जुर्माना दिया गया।
अमेरिकी न्याय विभाग के सार्वजनिक बयान में यह नहीं बताया गया कि अदालत ने इतनी कम हिरासत वाली सजा किन विशेष कारणों से तय की। इसलिए यह अनुमान लगाना उचित नहीं होगा कि उसे सहयोग, कमजोर भूमिका या किसी समझौते के कारण कम सजा मिली।
अमेरिकी संघीय अदालतें सजा तय करते समय आरोपी की भूमिका, आपराधिक इतिहास, अपराध स्वीकार करने, अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा Sentencing Guidelines सहित कई कानूनी कारकों पर विचार कर सकती हैं। लेकिन इस विशेष मामले में विस्तृत Sentencing Memorandum के बिना कोई निश्चित कारण नहीं बताया जा सकता।
निष्कासन का आदेश, लेकिन तारीख स्पष्ट नहीं
अदालत ने मितुल पटेल को अमेरिका से Removed करने का आदेश दिया है। इसका अर्थ है कि वह अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों की निष्कासन प्रक्रिया का सामना करेगा।
हालांकि आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में उसके अमेरिका से बाहर भेजे जाने की निश्चित तारीख या गंतव्य नहीं बताया गया। इसलिए समाचार में “तुरंत भारत भेज दिया गया” लिखना फिलहाल सही नहीं होगा। सटीक तथ्य यह है कि अदालत ने उसके निष्कासन का आदेश दिया है।
रामभाई पटेल को मिली थी 20 महीने की जेल
इस कथित नेटवर्क के प्रमुख आयोजक रामभाई पटेल को अगस्त 2025 में 20 महीने और आठ दिन की जेल, दो वर्ष की निगरानी और करीब 8.50 लाख डॉलर की रकम जब्त करने की सजा सुनाई गई थी।
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक रामभाई और उसके सहयोगियों ने अमेरिका में कम से कम 18 दुकानों तथा Restaurants में फर्जी सशस्त्र डकैती कराई थीं। इनमें कम से कम पांच घटनाएं मैसाचुसेट्स में हुई थीं। कम से कम दो कथित पीड़ितों ने इन फर्जी घटनाओं के आधार पर U-वीजा आवेदन भी जमा किए थे।
एक कथित पीड़ित ने फर्जी डकैती में शामिल होने के लिए 20,000 डॉलर तक दिए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार रामभाई पटेल ने इस नेटवर्क से लगभग 8.50 लाख डॉलर अर्जित किए, जिसे अदालत ने जब्त करने का आदेश दिया।
कई राज्यों की एजेंसियों ने की जांच
मामले की जांच FBI की Boston Division के साथ USCIS, अमेरिकी Immigration and Customs Enforcement, Massachusetts State Police और कई राज्यों की स्थानीय पुलिस एजेंसियों ने की।
जांच में न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन, ओहायो, मिसौरी और केंटकी सहित कई राज्यों के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालयों तथा FBI Field Offices ने भी सहयोग दिया।
मितुल पटेल ने अपराध स्वीकार कर लिया है और उसे सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि इसी मामले में आरोपित शेष लोगों के खिलाफ आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है। अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है कि शेष आरोपी तब तक निर्दोष माने जाएंगे, जब तक उनके विरुद्ध अपराध कानूनी रूप से सिद्ध नहीं हो जाता।




