क्या आधुनिकता ने रिश्तों की गर्माहट छीन ली है ? यह कहानी एक ऐसे पिता की है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी परिवार और बेटियों के भविष्य के लिए समर्पित कर दी… लेकिन अंतिम समय में उन्हें सिर्फ ₹5100 की ऑनलाइन राशि और अंतिम संस्कार की वीडियो भेजने का संदेश मिला। यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक मूल्यों, वृद्धाश्रमों की बढ़ती वास्तविकता और भावनात्मक दूरी पर गंभीर सवाल है। Black Canvas में देखिए इस घटना का सामाजिक विश्लेषण और सोचिए — क्या तकनीक सुविधा बनकर रह गई है या रिश्तों की जगह लेने लगी है ?




